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Delhi

  • Aug 14 2019 1:18PM
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विंग कमांडर अभिनंदन के परिवार की रगों में है देशभक्ति, जानें खास बातें

विंग कमांडर अभिनंदन के परिवार की रगों में है देशभक्ति, जानें खास बातें

नयी दिल्ली : वायु सेना के विंग कमांडर अभिनंदन वर्धमान को स्वतंत्रता दिवस पर वीर चक्र से सम्मानित किया जाएगा. 26 फरवरी को बालाकोट में आतंकवादियों के ठिकानों को निशाना बनाने के एक दिन बाद पाकिस्तान ने हवाई हमलों की कोशिश की थी.

एक दिन बाद, 27 फरवरी को, भारतीय हवाई क्षेत्र का उल्लंघन करने वाले पाकिस्तानी लड़ाकू विमानों को खदेड़ने के दौरान हवा में हुई लड़ाई में अभिनंदन का मिग-21 बाइसन विमान दुर्घटनाग्रस्त हो कर गिर गया और अभिनंदन को पाकिस्तानी सेना ने पकड़ लिया था. इससे पहले उन्होंने पाकिस्तान के एफ-16 विमान को मार गिराया था.

अभिनंदन लगभग तीन दिन तक पाकिस्तान की कैद में रहे. पाकिस्तान ने विंग कमांडर को एक मार्च रात को रिहा किया था. आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि भारतीय वायुसेना के बेंगलुरु स्थित ‘इंस्टीट्यूट ऑफ एयरोस्पेस मेडिसिन' ने गहन जांच के बाद अभिनंदन को फिर से विमान उड़ाने की मंजूरी दे दी है. आइए जानते हैं अभिनंदन वर्धमान के बारे में कुछ खास बातें...

1. 21 जून, 1983 को भारत की पावन धरती पर जन्म लेने वाले अभिनंदन का भारतीय वायुसेना के साथ पीढ़ियों पुराना संबंध रहा है. वह आज मिग-21 उड़ाते हैं और उनके पिता सिंहकुट्टी वर्धमान मिग-21 उड़ाने का काम पहले ही कर चुके हैं.

2. अभिनंदन स्कूल के दिनों की अपनी साथी तन्वी मरवाह से शादी के बंधन में बंधे. वह भी वायु सेना में स्क्वाड्रन लीडर रही हैं. इस कपल ने स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद माइक्रोबायोलॉजी में आगे की पढ़ाई भी एक साथ ही की. इस दंपती के दो बच्चे हैं.

3. अभिनंदन के पिता पांच वर्ष पहले ही सेवानिवृत्त हुए हैं. वे देश के उन चुनिंदा पायलट में से हैं, जिनके पास 4000 घंटे से ज्यादा समय तक 40 तरह के विमान उड़ाने का अनुभव हैं. कारगिल युद्ध की बात करें तो इस दौरान वे वायुसेना की मिराज स्क्वाड्रन के चीफ ऑपरेशंस ऑफिसर थे.

4. अभिनंदन के दादा की बात करें तो वे भी भारतीय वायुसेना के अंग रह चुके हैं. अभिनंदन के परिवार के खून में देशभक्ति और देश के लिए कुछ करने का जुनून शामिल है.

5. देशसेवा और बहादुरी की बात की जाए तो अभिनंदन की मां डॉ. शोभा वर्धमान का भी नाम आता है. अपने परिवार और बच्चों के प्रति अपने दायित्वों का निर्वहन करते हुए उन्होंने मानवता की सेवा में अपना पूरा जीवन लगा दिया. वे दुनियाभर में मुफ्त में चिकित्सा सेवाएं देने वाले स्वयंसेवकों में से एक हैं.

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