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Delhi

  • Jul 19 2019 7:32PM
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मोदी की नसीहत बेअसर - लोकसभा में एक समय मंत्रियों और सांसदों की संख्या बराबर

मोदी की नसीहत बेअसर - लोकसभा में एक समय मंत्रियों और सांसदों की संख्या बराबर

नयी दिल्ली : लोकसभा में शुक्रवार को भोजनावकाश के बाद होने वाले गैर सरकारी कामकाज के दौरान एक ऐसा नजारा देखने को मिला जिसमें सदन के भीतर मौजूद सदस्यों और मंत्रियों की संख्या लगभग बराबर थी.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भाजपा संसदीय पार्टी की पिछली कुछ बैठकों में पार्टी सांसदों के समुचित संख्या में सदन में मौजूद नहीं रहने पर अपनी नाराजगी जता चुके हैं. उन्होंने पिछली बैठक में तो रोस्टर ड्यूटी से गायब रहने वाले मंत्रियों का ब्योरा भी तलब किया था. मोदी की नसीहत के बावजूद गैर सरकारी कामकाज के दौरान सदस्यों की उपस्थिति पर कोई असर नहीं देखने को मिला. सदन में शुक्रवार करीब शाम करीब चार बजे भाजपा के कुंवर पुष्पेंद्र सिंह चंदेल द्वारा पेश संकल्प पर पहले से जारी चर्चा को आगे बढ़ाया गया. इस दौरान जब भाजपा के राजेंद्र अग्रवाल ने 5 बजकर 50 मिनट पर अपनी बात समाप्त की तो लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि सदस्य चाहें तब वह कार्यवाही की अवधि आगे बढ़ा सकते हैं (छह बजे के बाद). इस पर पर्यटन मंत्री प्रह्लाद पटेल को यह कहते सुना गया, जितने मंत्री हैं, उतने ही सांसद हैं.

दरअसल, 5 बजकर 50 मिनट पर निचले सदन में आठ मंत्री और आठ सांसद थे. इन मंत्रियों में गजेंद्र सिंह शेखावत, रमेश पोखरियाल निशंक, प्रह्लाद पटेल, रतन लाल कटारिया, नित्यानंद राय, अश्विनी चौबे और वीके सिंह शामिल थे. उल्लेखनीय है कि 28 जून को भी गैर सरकारी कामकाज के दौरान कोरम के अभव में सदन की कार्यवाही को निर्धारित समय से पहले स्थगित करना पड़ा था. वैसे यदि गैर सरकारी कामकाज को छोड़ दिया जाये तो सत्रहवीं लोकसभा के पहला सत्र अभी तक कामकाज के लिहाज से काफी उत्पादक रहा है और बैठक कई बार रात 11 बजे के बाद तक चली है.

शुक्रवार को ही सूचना का अधिकार संशोधन विधेयक 2019 पेश करने के दौरान मत विभाजन हुआ और नौ के मुकाबले 224 मतों से पेश करने की अनुमति दी गयी. पंद्रह जुलाई को लोकसभा में ‘राष्ट्रीय अन्वेषण अधिकरण संशोधन विधेयक 2019' पर मत विभाजन हुआ था और सदन ने 6 के मुकाबले 278 मतों से विधेयक को मंजूरी दी थी. लोकसभा में भाजपा के 303 सांसद हैं और भाजपा नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के 353 सदस्य हैं. एक रिपोर्ट में कहा गया है कि 20 वर्षों के दौरान आहूत किसी भी सत्र के मुकाबले यह सबसे ज्यादा कामकाज वाला सत्र रहा है. सत्रहवीं लोकसभा के पहले सत्र की उत्पादकता 128 प्रतिशत रही.

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