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Delhi

  • Dec 3 2019 3:21AM
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झारखंड चुनाव पर है विदेशी दूतावासों की नजर, राजनीतिक माहौल बदलता है तो निवेश के कई प्रस्तावों पर भी लग सकता है ग्रहण

झारखंड चुनाव पर है विदेशी दूतावासों की नजर, राजनीतिक माहौल बदलता है तो  निवेश के कई प्रस्तावों पर भी लग सकता है ग्रहण

अंजनी कुमार सिंह, नयी दिल्ली : महाराष्ट्र और हरियाणा में विधानसभा चुनाव के बाद बदले राजनीतिक समीकरण को देखते हुए विदेशी दूतावासों की नजर झारखंड चुनाव पर टिक गयी है. झारखंड प्राकृतिक संसाधन के मामले में काफी समृद्ध है और यहां निवेश की अपार संभावनाएं है. लेकिन चुनाव के बाद अगर राजनीतिक माहौल बदलता है तो पूर्व में निवेश के कई प्रस्तावों पर ग्रहण भी लग सकता है. इसे देखते हुए जापान, चीन, सिंगापुर, इंडोनेशिया, अल्बानिया, अमेरिका आदि दूतावासों की नजर झारखंड पर टिक गयी है. 

 
पीएम नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता के बाद भी अगर भाजपा की स्थिति राज्यों  में कमजोर होती है, तो इसका भविष्य में भारत की राजनीति और आर्थिक स्थिति  पर क्या प्रभाव पड़ेगा. कई दूतावास यह भी पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता में कमी आ रही है. 
 
गौरतलब है कि  महाराष्ट्र में गैर भाजपा सरकार बनने के बाद निवेश की कई परियोजनाओं पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं. सबसे बड़ा संकट मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन योजना को लेकर है. इस योजना के लिए जापान सरकार ने भारी-भरकम निवेश किया है. 
 
इसके अलावा नानूर में बनने वाली रिफाइनरी को लेकर भी भ्रम की स्थिति पैदा हो गयी है. इस रिफाइनरी में सउदी अरब की अरमाको का निवेश होना है. ऐसे में विदेशी दूतावासों की नजर झारखंड विधानसभा चुनाव पर टिक गयी है.  
 
झारखंड में निवेश को लेकर विदेशी कंपनियां सशंकित
एक दूतावास के  अधिकारियों  ने जब प्रभात खबर से संपर्क किया तो वह यह जानने को उत्सुक  दिखे कि राज्य में किसकी सरकार बनने की संभावना है. उत्सुकता का कारण पूछने  पर बताया कि निवेश के अलावा देश के अन्य राज्यों में भाजपा की क्या स्थिति  बन रही है, यह जानना उनके देश के लिए जरूरी है.
 
 उक्त देश के सलाहकार और  सेकेंड सेक्रेटरी ने स्वीकार किया कि महाराष्ट्र के बाद यदि झारखंड में  विपक्ष की सरकार बनती है, तो निवेश के माहौल को लेकर  कंपनियां सशंकित हैं. झारखंड में सड़क निर्माण, स्टील, खनन और अन्य  क्षेत्रों में कई विदेशी  कंपनियों ने निवेश का प्रस्ताव दिया है. सरकार बदलने की सूरत में कई  योजनाओं पर ग्रहण लग जाता है. दूतावासों की दिलचस्पी सीएनटी और एसपीटी  एक्ट को लेकर भी है.
 
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