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darbhanga

  • Aug 22 2016 2:45AM

संस्कृत की देन वसुधैव कुटुंबकम

संस्कृत सप्ताह का समापन . मुख्य अितथि शाहनवाज हुसैन ने कहा

दरभंगा  : भाजपा के राष्ट्रीय मुख्य प्रवक्ता शाहनवाज हुसैन ने कहा है कि भारतीय सोच संकुचित हो ही नहीं सकता. यहां की संस्कृति इसकी इजाजत नहीं देती. यहां वसुधैव कुटुंबकम की परंपरा रही है. यह देन संस्कृत भाषा की है. संस्कृत सबसे प्राचीन भाषा है. उन्होंने कहा कि मनुष्य के पैदा होने से मृत्यु तक संस्कृत की ही जरूरत पड़ती है. आज पूरा देश संस्कृत और संस्कृति के लिए एक है. श्री शाहनवाज ने कहा कि संस्कृति की भाष संस्कृत कैसे बने जब भारत की सरकारी भाषा हिंदी हो सकती है. इसके लिए चिंतन करने की जरूरत है.
 
उन्होंने कहा कि संस्कृत भाषा के प्रचार-प्रसार के लिए विश्वविद्यालय के विद्वानों के द्वारा कोई ऐसा नया कोर्स विकसित करना चाहिए जो कम समय में समान कोर्स को जानने वालों को भी संस्कृतज्ञ बना सके. इसके लिए 60 से 50 घंटे का कैप्सूल कोर्स चलाएं जो गारंटी के साथ लोगों को संस्कृत बोलने और जानने की शिक्षा प्राप्त करने में सहायक हो. उन्होंने नगर विधायक संजय सरावगी द्वारा इस विश्वविद्यालय को केंद्रीय विश्वविद्यालय बनाये जाने के प्रस्ताव पर सहर्ष सहमति जताते हुए कहा कि यह प्रस्ताव लेकर विवि के कुलपति, स्थानीय विधायक सहित आवश्यक सहयोगी के साथ दिल्ली आने का उन्होंने निमंत्रण देते हुए कहा कि केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर से मिलकर इस प्रस्ताव की मंजूरी के लिए प्रयास करेंगे. 
एम्स की शाखा खोलने में देंगे हरसंभव सहायता: इसके अलावा दरभंगा में आम नागरिकों के लिए एम्स की शाखा खोले जाने तथा हवाई सेवा उपलब्ध करवाने में हरसंभव सहयोग देने की बात कही. कहा कि इसके लिए दरभंगा उचित हकदार भी हैं. हम सबों का सौभाग्य है कि संस्कृत का विश्वविद्यालय हमारे बिहार के दरभंगा में स्थापित है.
 
श्री हुसैन कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित संस्कृत सप्ताह कार्यक्रम के समापन समारोह को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे. 
 
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलपति डॉ नीलिमा सिन्हा ने कहा कि शिक्षा ही मानसिक एवं शारीरिक स्वास्थ्य का निर्माण करती है. संस्कृत शिक्षा के माध्यम से दोनों तरह का स्वास्थ्य लाभ संभव हो पाता है. उन्होंने संस्कृत भाषा के प्रचार-प्रसार के लिए आवश्यक लिंगवा लैब बनाने का प्रस्ताव रूसा को भेजने की बात कही. मंच पर मौजूद रूसा के उपाध्यक्ष ने विवि द्वारा भेजे जाने वाले प्रस्ताव को स्वीकृत करवाने के लिए प्रयास करने का आश्वासन दिया. कार्यक्रम की शुरूआत डॉ विद्येश्वर झा के वैदिक एवं डॉ दयानाथ झा के लौकिक मंगलाचरण से की गयी. मंचासीन अतिथियों का स्वागत मिथिला परंपरा के अनुसार किया गया. कुलगीत एवं स्वागत गान डॉ अमरनाथ झा एवं सत्येंद्र मिश्र ने किया. कार्यक्रम का संचालन डॉ श्रीपति त्रिपाठी एवं धन्यवाद ज्ञापन डॉ सुरेश्वर झा ने किया. स्वागत भाषण डॉ शशिनाथ झज्ञ ने किया. 
 
कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विवि 0की ओर से काय्रक्रम आयोजित
 
चयनित छात्र हुए पुरस्कृत : दरभंगा. कार्यक्रम के दौरान विभिन्न प्रकार के प्रतियोगिता के सफल प्रतिभागियों को मुख्य अतिथि एवं मंचासीन अतिथियों के द्वारा प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया. इसमें अंत्याक्षरी प्रतियोगता में प्रथम स्थान पानेवाले कृष्ण कुमार झा, द्वितीय रचना कुमारी, तृतीय शालिनी कुमारी एवं सांत्वना पुरस्कार के रूप में गजेंद्र कुमार झा का नाम शामिल है. भाषण प्रतियोगता में क्रमश: विभव कुमार झा, कृष्ण कुमार झा, सुभाष कुमार मिश्र के अलावा सुभाष झा का नाम शामिल है.
संस्कृति की रक्षा संस्कृत से ही संभव: विधायक संजय सरावगी ने कहा कि देश की संस्कृति की रक्षा संस्कृत से ही संभव है. आज विश्व के विज्ञान ने भी संस्कृत की मान्यता दी.
 
उन्होंने कहा कि महाराज ने जिस उद्देश्य के साथ इस विवि की स्थापना की थी, यह तभी पूरा होगा जब अधिक से अधिक छात्र इस विश्वविद्यालय से उच्च शिक्षा पाकर देश-विदेश में नाम रौशन करेंगे. श्री सरावगी ने कहा कि केंद्र में जब-जब भाजपा की सरकार रही है, संस्कृत के उत्थान के लिए काम होता रहा है.
 उद‍्घाटन करते भाजपा प्रवक्ता शाहनवाज हुसैन, कुलपति डाॅ नीलिमा सिन्हा, नगर विधायक संजय सरावगी व अन्य.
राष्ट्रवाद की बुनियाद है संस्कृत
रूसा के उपाध्यक्ष डॉ कामेश्वर झा ने कहा कि केवल संस्कृत भाषा को ही यह सौभाग्य प्राप्त हुआ है, जिसके विद्वानों की लेखनी विश्वप्रसिद्ध हुए हैं. संस्कृत के तत्व चिंतामणी, नव्य न्याय सहित कई ऐसे पुस्तकें विश्व प्रसिद्ध है जो मानव के जीवन आधार को समेटे हुए हैं. भारत की राष्ट्रवाद की बुनियाद केवल संस्कृत है. भारत सरकार के द्वारा विभिन्न विषयों के अध्ययन के क्रम में संस्कृत भाषा पढ़ने का अवसर च्वाइस बेस्उ क्रेडिट सिस्टम के तैयार पाठ‍्यक्रम में दिया गया है. मिथिला की भूमि ऐसी रही है जहां संस्कृत शिक्षा के कारण सनातन धर्म को बदलने में बौद्ध धर्मी सफल नही हो पाये. उन्होंने एस्ट्रोलॉजी की पढ़ाई भौतिकी एवं रसायन विषय से जोड़ एस्ट्रॉफी जैसे नये कोर्स चलानेका सुझाव दिया. संस्कृत डॉ प्रेमचंद्र झा ने कहा कि देवभाषा जनभाषा बने, सरकार की ऐसी मनसा है. उन्होंने अपने संकल्प से अवगत कराते हुए कहा कि 2020 के भीतर मिथिला क्षेत्र के किसी एक गांव को संस्कृत ग्राम बनाऊंगा. उस गांव के वासी संस्कृत के बोलने व समझने वाले होंगे. 
 
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