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  • Aug 14 2019 2:17AM
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चार साल चला केस, तब कोर्ट ने माना रमानाथ महतो थे निर्दोष, अब केस बंद

 उत्तम महतो, रांची : बोकारो जिले के पिंडराजोरा थाना के कुम्हारदागा गांव के रमानाथ महतो को बिजली चोरी के आरोप में 18 दिन जेल में गुजारना पड़ा. रमानाथ का गुनाह बस इतना था कि उसी के नाम से गांव में एक दूसरा व्यक्ति भी रहता था, जो बिजली विभाग का डिफॉल्टर था. लेकिन बिजली विभाग ने जीवित रमानाथ के नाम पर केस कर दिया. इस कारण उसे 18 दिन जेल में गुजारना पड़ा. 

 
रमानाथ पर बिजली विभाग द्वारा 16 जून 2015 को केस किया गया था. नौ जुलाई को पुलिस ने घर से उठाकर उन्हें जेल भेज दिया. छह दिनों तक जेल में रहने के बाद घरवालों ने उसकी बेल करवायी. इधर, केस पूर्व की भांति चलता रहा. आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं होने के कारण रमानाथ डेट पर कोर्ट में हाजिर नहीं हो सके. 
 
इस कारण उसे दोबारा छह जुलाई 2019 काे जेल भेज दिया गया. 17 जुलाई को परिजनों ने फिर उसका दोबारा बेल करवाया. 22 जुलाई 2019 को जब मामले पर कोर्ट में बहस हुई, तो कागजात देख कर जज ने भी रमानाथ को निर्दोष माना. इसके बाद केस बंद कर दिया गया.   
 
डीसी व अभियंताओं से कई बार निर्दोष होने की बात कही, लेकिन किसी ने नहीं सुनी 
 
रमानाथ के पुत्र शिशिर महतो के अनुसार पिता के जेल जाने के बाद हमारा पूरा परिवार चार बार बोकारो उपायुक्त, एसपी सहित बिजली विभाग के एसडीओ (सहायक अभियंता) से मिला. हमने उन्हें कागजात दिखाये कि हम बिजली चोर नहीं हैं. हमारे पास वैध बिजली कनेक्शन है. जिसका हम पैसा जमा करते हैं. 
 
अप टू डेट बिजली की रसीद दिखाई. लेकिन किसी ने हमारी बात पर ध्यान नहीं दिया. डीसी के पास से कभी बिजली विभाग, तो बिजली विभाग से कभी थाना जाने को कहा जाता. हर जगह केवल आश्वासन ही मिला. पिता को जेल से निकालने के लिए किसी ने ठोस कार्रवाई नहीं की. 
 
ऐसे केस में फंसा रमानाथ महतो 
15 जून 2015 को बिजली विभाग द्वारा कुम्हारदागा गांव में छापेमारी अभियान चलाया गया. इस दौरान बिजली विभाग के कर्मचारियों के पास डिफॉल्टर लिस्ट थी. इसमें एक नाम रमानाथ महतो का था. बिजली विभाग के लोगों ने गांव के लोगों से रमानाथ महतो के घर का पता पूछा. लोगों ने उन्हें रमानाथ महतो का घर दिखा दिया. 
 
इसके बाद बिजली विभाग की टीम ने रमानाथ का बिजली कनेक्शन काटते हुए उसके नाम पर पिंडराजोरा थाना में प्राथमिकी दर्ज कर दी. जबकि उसी गांव में एक दूसरा रमानाथ महतो भी रहता था, जो बिजली विभाग का डिफॉल्टर था तथा उसकी मृत्यु हो गयी थी. इस कारण पुलिस ने जीवित रमानाथ को जेल भेज दिया.
 
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