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crime

  • Jul 13 2019 12:51AM
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पोक्सो कोर्ट ने बेगुनाह कह रिहा किया, एक लाख मुआवजा

 मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष पेश न कर सका एक भी गवाह

शिकायतकर्त्ता भी नहीं आयी कोर्ट में, कालना कोर्ट के निर्णय की हो रही चर्चा
 
बर्दवान : कालना अनुमंडल  पोक्सो अदालत जज तपन कुमार मंडल ने बार-बार नोटिश भेजने के बाद भी गवाहों के उपस्थित न होने पर सीआरपीसी की धारा 232  के तहत आरोपी कालना थाना अंतर्गत मुख्तारपुर निवासी  ध्रुव पात्र को निर्दोष मानते हुए रिहा करने का आदेश दिया,  साथ ही उसे बेवजह परेशान करने के लिए जिलाशासक के फंड से एक लाख रुपये देने का आदेश दिया.
 
सनद रहे कि शिकायत पर सबूत पेश नहीं करने पर अक्सरहां आरोपी को रिहा कर दिया जाता है. लेकिन पोक्सो अदालत में आरोपी के बेकसूर रिहा होने पर सरकार की भूमिका पर सवाल उठा है.  आरोप पत्र में 17 गवाहों की सूची पेश की गई थी. लेकिन अभियोजन पक्ष एक भी गवाह को कोर्ट में पेश नहीं कर सका. गवाहों की गैरमौजूदगी के कारण मामले की सुनवाई लंबे समय तक लंबित रही. दो-दो  सरकारी अधिवक्ता नियुक्त किये गये.
 
कालना के सरकारी अधिवक्ता   अरिंदम वाजपेई ने कहा कि बार-बार गवाहों को नोटिस भेजा गया, लेकिन गवाह नहीं आये. उन्होंने कहा कि पीड़िता को न्याय मिलना चाहिए था.
 
कालना थाना अंतर्गत मुख्तारपुर निवासी ध्रुव राय के खिलाफ नाबालिग के यौन उत्पीड़न का आरोप था.  27 मई, 2018 को कालना थाने में पीड़िता की मां ने प्राथमिकी दर्ज कराई थी. पीड़िता की मेडिकल जांच की गई .
 
आरोपी के अधिवक्ता गौतम गोस्वामी और देबराज राय ने दावा किया कि घटना के सात दिन  बाद पुलिस से शिकायत दर्ज की. पीड़िता के बयान से स्पष्ट है कि  आरोप वेबुनियाद है, झूठा मामला सजाया गया था. स्वयं शिकायतकर्त्ता भी कोर्ट में हाजिर 
नहीं हुई.
 
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