Advertisement

cricket

  • Jul 20 2019 1:29AM
Advertisement

धौनी का फिलहाल संन्यास लेने का कोई इरादा नहीं है, बिजनेस पार्टनर और करीबी मित्र अरुण पांडेय का बयान

धौनी का फिलहाल संन्यास लेने का कोई इरादा नहीं है, बिजनेस पार्टनर और करीबी मित्र अरुण पांडेय का बयान

 नयी दिल्ली : महेंद्र सिंह धौनी के करीबी मित्र और बिजनेस पार्टनर अरुण पांडे ने शुक्रवार को कहा कि इस भारतीय विकेटकीपर बल्लेबाज की अभी संन्यास लेने की कोई योजना नहीं है. भले ही उनके भविष्य को लेकर अटकलबाजियां चल रही हों. विश्व कप के सेमीफाइनल में न्यूजीलैंड से भारत के हारने के बाद से धौनी के भविष्य को लेकर अटकलें बढ़ गयी हैं. पांडे ने फोन पर कहा : उसकी अभी तुरंत संन्यास लेने की कोई योजना नहीं है. उस जैसे महान खिलाड़ी के भविष्य को लेकर चल रही लगातार अटकलें काफी दुर्भाग्यपूर्ण हैं. 

 
 अरुण पांडे की यह प्रतिक्रिया रविवार को वेस्टइंडीज दौरे के लिए टीम चयन से पहले आयी है. धौनी की योजना को लेकर स्थिति तभी स्पष्ट हो पायेगी, जब तीन अगस्त से शुरू होने वाले दौरे के लिए टीम चुन ली जायेगी. 
 
 बीसीसीआइ अधिकारियों के टीम चयन से पहले दो बार के इस विश्व कप विजेता कप्तान से बात करने की उम्मीद है. अरुण पांडे लंबे समय से धौनी से जुड़े हुए हैं और खेल प्रबंधन कंपनी रीति स्पोर्ट्स के संचालन के अलावा उनके व्यावसायिक मामलों को भी देखते हैं.
 
जेएससीए गये धौनी, दो घंटे बिताये
धौनी इन दिनों रांची में हैं.  रांची में रहने पर भी वह अपनी फिटनेस से समझौता नहीं करते. फिटनेस के लिए वह प्रतिदिन जेएससीए स्टेडियम जाते हैं और वहां कभी जिम तो कभी टेनिस में हाथ आजमाते हैं. शुक्रवार को शाम आठ बजे वह जेएससीए स्टेडियम गये और जिम में लगभग दो घंटे बिताये. रात दस बजे के करीब वे वापस घर लौटे.
 
धौनी का सही विकल्प मौजूद नहीं : जगदाले
इंदौर. महेंद्र सिंह धौनी के संन्यास की अटकलों के बीच पूर्व राष्ट्रीय चयनकर्ता संजय जगदाले ने शुक्रवार को कहा कि हालांकि भारतीय टीम के पास 38 वर्षीय विकेटकीपर बल्लेबाज का सही विकल्प तुरंत मौजूद नहीं है, लेकिन चयन समिति को धौनी से मिलकर भविष्य के बारे में उनके मन की थाह लेनी चाहिए. जगदाले ने कहा : धौनी एक बेहतरीन खिलाड़ी हैं और उन्होंने भारतीय टीम के लिए हमेशा नि:स्वार्थ क्रिकेट खेला है. मेरे मत में टीम इंडिया के पास विकेटकीपर बल्लेबाज के रूप में अभी धौनी का उपयुक्त विकल्प तुरंत मौजूद नहीं है. ऐसी अटकलें लगायी जा रही हैं कि टेस्ट प्रारूप से पहले ही संन्यास ले चुके धौनी ने अपना अंतिम वनडे खेल लिया है, जो विश्व कप में भारत का सेमीफाइनल था और न्यूजीलैंड के खिलाफ खेले गये इस मुकाबले में भारत को हार का सामना करना पड़ा.
 
धौनी पर इमोशनल न हों प्रैक्टिकल फैसला लें : गंभीर
नयी दिल्ली. भारत के पूर्व सलामी बल्लेबाज गौतम गंभीर ने कहा है कि महेंद्र सिंह धौनी ने जिस तरह युवा खिलाड़ियों की मांग करके बतौर कप्तान भविष्य में निवेश किया, उसी तरह उनके बारे में ‘व्यावहारिक फैसला' लेने की जरूरत है, क्योंकि युवा खिलाड़ी इंतजार में खड़े हैं. ऐसी अटकलें हैं कि धौनी विश्व कप में भारत के लिए आखिरी वनडे खेल चुके हैं. भारत को सेमीफाइनल में न्यूजीलैंड ने हराया था. 
 
चयन समिति की बैठक रविवार को होगी, जिसमें वेस्टइंडीज दौरे के लिए टीम का चयन किया जायेगा. इसमें पूरा फोकस धौनी पर रहेगा. गंभीर का मानना है कि जज्बात से परे फैसला लेना होगा. गंभीर ने कहा: भविष्य के बारे में सोचना जरूरी है. मुझे याद है कि धौनी ने आॅस्ट्रेलिया में कहा था कि मैं, सचिन और सहवाग तीनों सीबी सीरीज नहीं खेल सकते, क्योंकि मैदान बड़े हैं. 
 
उन्होंने कहा: उन्होंने विश्व कप के लिए युवा खिलाड़ी मांगे थे. जज्बाती होने के बजाय व्यावहारिक फैसले लेना जरूरी है. युवाओं को मौका देने की जरूरत है. चाहे वह रिषभ पंत हो, संजू सैमसन, ईशान किशन या कोई और विकेटकीपर. 
जिसमें भी क्षमता दिखे, उसे विकेटकीपर बनाया जाना चाहिये. गंभीर ने कहा कि युवाओं को जब तक पर्याप्त मौके नहीं मिलेंगे, वे भारत के लिये अच्छा प्रदर्शन नहीं कर सकेंगे. 
उन्होंने कहा: उन्हें डेढ साल मौका दें और अगर वे अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाते तो किसी और को आजमाया जाये. इससे पता चल जायेगा कि अगले विश्व कप में विकेटकीपर कौन होगा. क्रिकेट से राजनीति में आये गंभीर ने कहा धौनी भारत के सर्वश्रेष्ठ कप्तानों में से है लेकिन टीम की सफलता का पूरा श्रेय उन्हें देना और विफलता का ठीकरा उन पर फोड़ना गलत है. उन्होंने कहा: आंकड़ों को देखें तो वह सर्वश्रेष्ठ कप्तान है लेकिन इसका यह मतलब नहीं कि दूसरे कप्तान कमतर थे. सौरव गांगुली अच्छे कप्तान थे. हमने विदेश में उनकी कप्तानी में जीता.
 
 विराट कोहली की कप्तानी में हमने दक्षिण अफ्रीका में वनडे और आॅस्ट्रेलिया में टेस्ट श्रृंखला जीती. गंभीर ने कहा: यह सही है कि धौनी ने हमें दो विश्व कप (2007 और 2011) जिताये लेकिन कप्तान को सफलता का सारा श्रेय देना और नाकाम रहने पर उसे गुनहगार ठहराना गलत है. धौनी ने चैंपियंस ट्राॅफी और विश्व कप जीते लेकिन दूसरे कप्तान भी भारत को आगे ले गये. अनिल कुंबले और राहुल द्रविड़ ने यह काम किया है.
 
Advertisement

Comments

Advertisement
Advertisement