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  • Oct 15 2019 2:32PM
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क्या राजनीति में होगी गांगुली की एंट्री ? 10 महीने बीसीसीआई प्रमुख रहने के बाद...

क्या राजनीति में होगी गांगुली की एंट्री ? 10 महीने बीसीसीआई प्रमुख रहने के बाद...

मुंबई : क्या  'प्रिंस ऑफ कोलकाता' के नाम से मशहूर सौरव गांगुली राजनीति में अपनी किस्मत आजमाने वालें हैं ? इस बात को लेकर चर्चा का बाजार गर्म है. खबरों की मानें तो पश्चिम बंगाल में 2021 में होने वाले विधानसभा चुनाव में गांगुली सूबे में भाजपा का चेहरा हो सकते हैं. हालांकि, जब गांगुली से इस संबंध में सवाल किया गया तो उन्होंने बड़े ही शांत स्वभाव से कहा कि कोई राजनेता मेरे संपर्क में नहीं है और यही हकीकत है. जहां तक ममता दीदी की बात है तो मैं उनका बधाई संदेश पाकर काफी खुश हूं. आगे गांगुली ने कहा कि मेरी काबिलियत के कारण मुझे बीसीसीआई में यह पद मिला है. बीसीसीआई की बेहतरी के लिए मैं काम करूंगा. विराट कोहली अच्छा खेल रहे हैं मैं उन्हें आगे भी प्रमोट करूंगा. हम आपको यहां बताते चलें कि रविवार को बीसीसीआई की अनौपचारिक बैठक के पहले गांगुली ने शनिवार रात दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की थी. इसके बाद से ही ऐसे कयास लगाये जा रहे थे कि गांगुली ही अगले बीसीसीआई अध्यक्ष हो सकते हैं. एक हकीकत यह भी है कि गांगुली अमित शाह के अलावा अनुराग ठाकुर और हेमंत बिस्वा शर्मा से मिले हैं.

अमित शाह से मिल कर अध्यक्ष बनने की इच्छा जाहिर की
गांगुली ने शनिवार को गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की थी. श्रीनिवासन ने गृह मंत्री अमित शाह से मिल कर बृजेश पटेल का नाम सामने रखा था वही गांगुली ने भी अमित शाह को बीसीसीआइ चीफ बनने की इच्छा जाहिर कर दी थी.

10 महीने ही होगा कार्यकाल
गांगुली 10 महीने के लिए बोर्ड के अध्यक्ष होंगे. गांगुली 5 साल 2 महीने से बंगाल क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष हैं. नये नियमों के अनुसार बोर्ड का कोई भी सदस्य लगातार 6 साल तक ही किसी पद पर रहेगा. इस तरह गांगुली का बोर्ड में कार्यकाल सितंबर 2020 में समाप्त हो जायेगा.

बोर्ड में सबसे अनुभवी प्रशासक
गांगुली बीसीसीआइ के ऐसे पहले अध्यक्ष होंगे, जिनके पास 400 से ज्यादा अंतरराष्ट्रीय मैच का अनुभव होगा. उन्होंने 424 मैच खेले हैं. गांगुली से पहले 1954 से 1956 तक तीन टेस्ट खेलने वाले विजय आनंद गणपति राजू) ही पूर्णकालिक अध्यक्ष थे. बीसीसीआइ के भावी अध्यक्ष सौरव गांगुली ने सोमवार को कहा कि उनके लिए यह कुछ अच्छा करने का सुनहरा मौका है, क्योंकि वह ऐसे समय में बोर्ड की कमान संभालने जा रहे हैं, जब उसकी छवि काफी खराब हुई है. मेरी प्राथमिकता प्रथम श्रेणी क्रिकेटरों की देखभाल होगी. गांगुली का इरादा भारतीय क्रिकेट के सभी पक्षों से मिलने का और वे सारे काम करने का है, जो पिछले 33 महीने में प्रशासकों की समिति नहीं कर सकी. मेरी प्राथमिकता प्रथम श्रेणी क्रिकेटरों की देखभाल करना होगा.

सभी पदों के लिए निर्विरोध चुना जाना तय
गांगुली और शाह के अलावा माहिम वर्मा (उपाध्यक्ष), अरुण सिंह धूमल (कोषाध्यक्ष), बृजेश पटेल (आइपीएल संचालन परिषद सदस्य), जयेश जॉर्ज (संयुक्त सचिव), खैरुल जमील मजूमदार (संचालन परिषद सदस्य) और प्रभजोत सिंह भाटिया (पार्षद) ने नामांकन भरा है. इन उम्मीदवारों का 23 अक्तूबर को बीसीसीआइ की सालाना आम बैठक में निर्विरोध चुना जाना तय है. गांगुली और जॉर्ज को बीसीसीआइ में पद संभालने के बाद क्रमश: बंगाल क्रिकेट संघ और केरल क्रिकेट संघ के अध्यक्ष पद को छोड़ना होगा.

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