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  • Sep 9 2019 4:43AM
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जुर्माने के जोर से सुधारने की कोशिश

 आशुतोष चतुर्वेदी

प्रधान संपादक, प्रभात खबर
ashutosh.chaturvedi@prabhatkhabar.in
 
नये मोटर वाहन कानून लागू कर दिया गया है और जुर्माने की भारी-भरकम राशि को लेकर देशभर में कोहराम मचा हुआ है. नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहन चालकों और यातायात पुलिस के कर्मचारियों के बीच हाथापाई की घटनाएं भी सामने आने लगी हैं. यह दलील लोगों के गले नहीं उतर रही है कि यह सब उनके भले के लिए ही किया जा रहा है. 
 
सरकार की मंशा इस नये कानून के जरिये दुर्घटनाओं पर रोकथाम की है. परिवहन मंत्री नितिन गडकरी देश की ट्रैफिक व्यवस्था के प्रति सकारात्मक सोच रखते हैं, लेकिन जो व्यवस्था सामने आयी है, जनता इसे बोझ की तरह देखती है. लोगों को इसके पीछे ऐसी मानसिकता नजर आ रही है कि इस देश के लोग ऐसे नहीं सुधरेंगे, इन्हें जुर्माने के डंडे से ही सुधारा जा सकता है. 
 
जुर्माना इतना अधिक है कि यह आम जन की हैसियत के बाहर है. दूसरी ओर ट्रैफिक पुलिस कुछ ज्यादा ही उत्साहित नजर आ रही है और भारी जुर्माना वसूलने से लोगों में धीरे-धीरे आक्रोश बढ़ता जा रहा है. पिछले दिनों देशभर में यातायात नियमों की अनदेखी को लेकर किये गये जुर्माने के जो मामले सामने आये, उनमें से कुछेक देख लीजिए. एक स्कूटी चालक के पास स्कूटी का रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट, बीमा, प्रदूषण के कागजात और ड्राइविंग लाइसेंस में से कुछ नहीं मिला.
 
 इस पर यातायात पुलिस ने नये नियमों के तहत 23 हजार रुपये का चालान काट दिया. नये नियमों के अनुसार बिना लाइसेंस और आरसी नहीं होने के पांच-पांच हजार रुपये, वाहन बीमा नहीं होने का दो हजार और प्रदूषण प्रमाणपत्र नहीं होने का 10 हजार रुपये का चालान करने का प्रावधान है. बिना हेलमेट का चालान एक हजार रुपये का है और इस तरह कुल 23 हजार रुपये का चालान हुआ है. नये मोटर वाहन कानून के तहत चालान कटने से गुस्साये एक शख्स ने अपनी मोटरसाइकिल को आग लगा दी. 
 
यह घटना दिल्ली की है. जब इस शख्स का वाहन जब्त किया जा रहा था, तभी उसने अपनी मोटर साइकिल की तेल टंकी में आग लगा दी. घटना को लेकर एक मामला दर्ज किया गया और वाहन मालिक को गिरफ्तार कर लिया गया. नये यातायात नियम के तहत पुलिस ने उसका 25 हजार रुपये का चालान कटा था. चालान कटते ही युवक ने कहा कि उसकी पुरानी बाइक की कीमत ही 15 हजार रुपये है. 
 
इसलिए इसका चालान क्या कटवाना और उसने उसमें आग लगा दी. गुरुग्राम में एक ट्रैक्टर चालक को नये कानून की मार झेलनी पड़ी. ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने पर उसके खिलाफ 59 हजार का चालान काटा गया. मुजफ्फरपुर से खबर है कि ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने पर एक युवक 17,500 रुपये जुर्माना ठोंका गया. इस पर वह अपनी बाइक छोड़ गया.
 
 दरअसल, उसकी पुरानी बाइक की कीमत मात्र 10 हजार रुपये है. युवक के पास ड्राइविंग लाइसेंस नहीं था. इस पर 5 हजार रुपये, प्रदूषण प्रमाणपत्र नहीं होने पर 10 हजार रुपये, इंश्योरेंस न होने पर दो हजार रुपये और ट्रैफिक नियम तोड़ने पर 500 रुपये जुर्माना किया गया था. अपने देश में दोपहिया वाहन मध्य वर्ग का पारिवारिक वाहन है. 
 
इस पर पति-पत्नी और बच्चे यात्रा करते हैं. मुझे याद है कि एक समय दोपहिया वाहनों का विज्ञापन होता था कि कैसे पूरा परिवार उस पर यात्रा कर सकता है. शुरुआती दौर में मैं भी परिवार के साथ इसका इस्तेमाल करता था. अब चार साल से अधिक के बच्चे के दोपहिया वाहन पर बैठने पर वाहन चालक पर जुर्माना लगेगा. मेरे एक साथी ने बताया कि शनिवार को रांची में पैरेंट्स-टीचर्स मीटिंग में कम अभिभावक पहुंचे. 
 
उन्हें डर था कि दोपहिया वाहन से बच्चे के साथ गये, तो दो हजार रुपये का चालान कट सकता है. रांची में ही 200 से अधिक लोगों के ड्राइविंग लाइसेंस तीन माह के लिए निलंबित करने की अनुशंसा की गयी है. निलंबन के दौरान अगर चालक गाड़ी चलाते हैं, तो उनसे 10 हजार रुपये का जुर्माना वसूला जायेगा.
 
नया मोटर वाहन कानून एक सितंबर से लागू हुआ है. इसमें चालान की राशि को इतना बढ़ा दिया गया है कि अगर आप गलती से यातायात के नियमों का उल्लंघन करते पकड़े गये, तो आपका पूरा बजट बिगड़ सकता है. ओवर स्पीडिंग में 5000 रुपये तक का चालान, गाड़ी चलाते समय मोबाइल फोन का इस्तेमाल करने पर 5000 रुपये तक कर जुर्माना है. गलत दिशा में गाड़ी चलाने पर जुर्माना बढ़ा कर 5000 कर दिया गया है. रेड लाइट जंप करने पर पहले जुर्माना पहले 100 रुपये था, जो अब पहली बार पकड़े जाने पर 1000 रुपये, दूसरी बार पकड़े जाने पर 2000 रुपये कर दिया गया है. 
 
मोटर व्हीकल एक्ट में एक नया चालान शामिल किया गया है, जिसमें इमरजेंसी वाहनों को रास्ता न देने पर 10 हजार जुर्माना है. लोगों के गिड़गिड़ाने और पैसे नहीं होने की मजबूरी भी जुर्माना राशि से उन्हें बचा नहीं पा रही है और कई लोगों पर एक से अधिक नियमों के उल्लंघन के कारण हजारों रुपये तक का जुर्माना वसूला जा रहा है. 
 
10-15 हजार की पुरानी गाड़ी के लिए 10 हजार फाइन भरना पड़े, यह कैसे न्यायसंगत है. कानून व्यावहारिक होना चाहिए. केवल जुर्माने से व्यवस्था नहीं सुधरने वाली है. लोगों को पहले सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था उपलब्ध करानी होगी. साथ ही साथ लोगों की मानसिकता भी बदलनी होगी.
 
पश्चिम देशों से इसकी तुलना की जा रही है, जो एकदम गलत है. वहां के लोगों की आर्थिक हैसियत और अपने देशों की आर्थिक स्थिति की तुलना करना बेमानी है. दूसरे विकसित देशों की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था इतनी मजबूत है कि लोग अपने वाहन लेकर निकलना पसंद ही नहीं करते हैं. मुझे बीबीसी में लंदन में काम करने और तीन वर्ष तक वहां रहने का अनुभव रहा है, लेकिन मुझे किसी भी दिन कार की आवश्यकता महसूस नहीं हुई. 
 
मेट्रो और लोकल बसों की सुविधा इतनी बेहतर है कि आप जरूरत ही महसूस नहीं करते हैं. मैं ऐसे कई लोगों को जानता हूं, जो वर्षों से ब्रिटेन में रह रहे हैं और जब चाहें कई कारें खरीद सकते हैं, लेकिन उन्हें उसकी जरूरत महसूस नहीं होती, जबकि इसकी तुलना में रांची और पटना की सार्वजनिक व्यवस्था की तुलना कीजिए. 
 
क्या आप निर्धारित समय पर अपने ऑफिस या कार्यस्थल पर सार्वजनिक व्यवस्था से पहुंच सकते हैं. चालान के नाम पर भारी-भरकम राशि वसूलने से जनता परेशान है और उनमें नाराजगी बढ़ती जा रही है. सड़क जर्जर हैं, बड़े-बड़े गड्ढे हैं, फुटपाथ है नहीं, हर दिन जाम लगता है. जितने वाहन हैं, उस हिसाब से पार्किंग नहीं है. झारखंड में जितने भी मॉल बने हैं, उन्हें देख लीजिए क्या उनमें पर्याप्त पार्किंग की व्यवस्था है, जबकि इनके कारण रोजाना जाम लगता है. बेहतर होता कि पहले व्यवस्था दुरुस्त की जाती और जुर्माने को इतना किया जाता कि लोग उसका बोझ उठा सकते. जोर का झटका धीरे से दिया जाता, तो बेहतर होता.
 
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