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  • Feb 27 2019 6:13AM

रणनीतिक जीत है भारत की

रणनीतिक जीत है भारत की
अजय साहनी
सुरक्षा विशेषज्ञ
delhi@prabhatkhabar.in
 
पुलवामा हमले के बाद भारतीय सेना की पाकिस्तान की सीमा में घुसकर की गयी इस कार्रवाई को सेना के ऐतबार से उत्साहजनक माना जा सकता है. लेकिन, इसका कोई दीर्घावधि के लिए कोई बड़ा फायदा होगा, इसकी संभावना कम है. किसी भी जवाबी कार्रवाई से आतंकवाद पर कोई खास असर नहीं पड़ता है, पूर्व के वर्षों में यही देखा गया है. 
 
यही नहीं, इससे पाकिस्तान का रवैया भी नहीं बदलनेवाला है. हम यह कतई न सोचें कि इससे पाकिस्तान सुधर जायेगा और वह आतंकी गतिविधियों को अंजाम नहीं देगा, तो यह हमारी नादानी होगी. इस कार्रवाई से भारतीय सेना की शक्ति परिलक्षित होती है, जैसा कि माना जा रहा है, यह उचित नहीं दिखता है.
 
अपने जहाज को किसी देश की सीमा में कुछ दूरी तक भेजकर कुछ बम आदि गिराकर उसे वापस बुला लेना साहस का काम तो है, लेकिन यह कोई बहुत बड़ी सैन्य-रणनीति का हिस्सा नहीं है और न ही इसे यह कहा जा सकता है कि हमारी सेना में मजबूती आयेगी. इन बातों को समझने के लिए थोड़ा जमीनी सच्चाई को देखना होगा. 
 
दरअसल, भारत-पाक सीमा पर रोज ही कुछ न कुछ घटित होता रहता है, गोली-बारी होती रहती है. अब आप बतायें कि इससे भारतीय सेना में कितनी मजबूती आयी? कुछ भी नहीं! सीमा पर रोज-रोज की छोटी-बड़ी सैन्य गतिविधियों में कुछ जवान हम खो देते हैं, कुछ पाकिस्तान खो देता है. 
 
क्या इससे सेना मजबूत होती है? इसलिए मुझे लगता है कि भारतीय वायुसेना की यह कार्रवाई कोई बड़ा बल प्रदर्शन नहीं है, हां पाकिस्तान की धमकियों के लिए यह ठीक है. भारत और पाकिस्तान के बीच में जो एक पुरानी आपसी समझ थी कि ऐसा हो सकता है, वैसा हो सकता है, या फिर हम अपनी-अपनी जनता की रक्षा के लिए सीमाओं पर तैनात रहेंगे, यह विचारधारा इस कार्रवाई से बिखर जाती है. 
 
क्योंकि, इसके पहले मुझे कोई ऐसी घटना याद नहीं आती, जिसमें हमारी सेना पाकिस्तान की सीमा में जाकर इस तरह से बम गिराकर वापस चली आयी हो. इसलिए यह लगता है कि यह कोई बड़ी रणनीति का हिस्सा नहीं है, लेकिन हां, यह एक टैक्टिकल चीज जरूर है कि हम किसी की सीमा में बम गिराकर वापस आ जायें. 
 
दरअसल, सेना की जो रणनीति होती है, उसका इस्तेमाल हमेशा सेना अपने देश की रक्षा और आंतरिक सुरक्षा के लिए करती है. लेकिन, टैक्टिकल चीजों का इस्तेमाल हमेशा सियासी हो जाता है, जिसका मतलब सेना को मजबूत करना नहीं, बल्कि सियासत को भुनाना होता है. 
यह कोई नयी बात नहीं है, हर देश की सत्ता इस तरह के हथकंडे अपनाकर ही अपनी शक्तियाें का प्रदर्शन करती है. इस कार्रवाई का इरादा भी कुछ इसी नजरिये से किया गया लगता है. हालांकि, इसे ठोस रूप में नहीं कहा जा सकता. लेकिन, यह ठोस जरूर है कि इस कार्रवाई का असर आगामी लोकसभा चुनाव पर जरूर पड़ेगा. 
 
भारत जैसे मजबूत और बड़े लोकतंत्र में सैन्य-गतिविधियों का सियासी इस्तेमाल नहीं होना चाहिए. भारत की राजनीतिक पार्टियों को ऐसा करने से बचना चाहिए, क्योंकि जहां कहीं भी सेना का सियासी इस्तेमाल होता है, वहां सबसे पहले उसके लोकतंत्र पर ही बड़ा खतरा मंडराने लगता है. इसलिए, इस कार्रवाई पर सियासत कतई न हो, यही भारतीय लोकतंत्र के हित में है. 
 
पाकिस्तान में वहां के सियासी गलियारे से यह बात सामने आयी है कि वहां जनता के बीच यह कहा गया कि भारत के जहाज उसकी सीमा में आये तो थे जरूर, लेकिन पाक सेना ने उन पर जवाबी कार्रवाई शुरू की, तो वे वापस लौट गये और जाते-जाते घबराकर अपने जहाज से कुछ बम हमारे क्षेत्र में छोड़ गये. पाकिस्तान के नेता अपने घरेलू लोगों को संबोधित कर रहे हैं और इस तरह की बातें कर रहे हैं. 
 
पाकिस्तान अपनी सेना को मजबूत बता रहा है. पहले भी पाकिस्तान इस तरह से अपनी सेना का सियासी इस्तेमाल करता आया है और इसलिए इस बार भी उसने यही किया. भारत में ऐसा न हो, तो ही बेहतर है, क्योंकि इससे देश की रक्षा-सुरक्षा पर असर पड़ता है.
 
इसमें कोई संदेह नहीं कि भारत की सेना को हर स्तर पर मजबूत होना चाहिए और वह है भी. लेकिन, साथ ही यह भी जरूरी है कि इसके लिए सैन्य बजट को और बढ़ाया जाये. एक मजबूत सेना के पास ही बेहतरीन रणनीति होती है. 
 
जिस तरह से पुलवामा हमले के बाद मीडिया और सोशल मीडिया के गलियारे में ढेर सारे सवाल उठाये गये, कुछ अतिरेक को छोड़ दें, तो वह जरूरी है. हमें रणनीति पर बात करनी चाहिए. यहां यह सवाल ही गौण हो गया है कि हमारी रणनीति क्या थी, बस हम टैक्टिस पर उत्साहित होकर इस बात को नजरअंदाज कर रहे हैं कि आखिर सच क्या है. 
 
दरअसल, देश में इस तरह की मांग तो थी ही कि पुलवामा हमले का जवाब दिया जाये. इसलिए हमारी सरकार अपनी जनता को बता रही है कि हमने कर दिखाया है और हजार किलो के बम गिराकर आतंकी ठिकानों को ध्वस्त कर दिया है. यहां एक प्रतीकात्मक रूप हमें इस कार्रवाई में नजर आता है, जो विशुद्ध रूप से सियासी है. 
 
जहां तक आतंकवाद की बात है, जहां तक दोनों देशों के बीच में जो सैन्य-संतुलन बनाये रखने की बात है, इन सबको एक रणनीति के तहत देखना होगा. एक बेहतरीन सैन्य-रणनीति का होना ही हमारी सेना और देश दोनों के हित में है. 

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