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chatra

  • Sep 19 2019 10:38AM
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बड़ा खुलासा: उग्रवादी संगठन के नाम पर CCL कर्मी व सेल्स इंचार्ज वसूलते हैं लेवी, TPC तक पहुंचता है बड़ा हिस्सा

बड़ा खुलासा: उग्रवादी संगठन के नाम पर CCL कर्मी व सेल्स इंचार्ज वसूलते हैं लेवी, TPC तक पहुंचता है बड़ा हिस्सा

टीपीसी उग्रवादी समर्थक ने पुलिस को दी जानकारी
रांची :
चतरा के विभिन्न कोल परियोजनाओं में सीसीएल के कर्मी और कोल परियोजना के सेल्स इंचार्ज विस्थापन समिति और कोल फील्ड लोडर एसोसिएशन के नाम पर उग्रवादी संगठन टीपीसी के लिए लेवी की वसूली करते हैं. इस काम में कांटा घर के कर्मचारी सहित अन्य लोग शामिल हैं. लेवी का बड़ा हिस्सा टीपीसी उग्रवादियों तक पहुंचाया जाता है. इस बात का खुलासा वसूली गयी लेवी के साथ धनराज सिंह भोक्ता और छापेमारी के दौरान घर में मौजूद विगन भोक्ता ने पूछताछ में किया है.

विगन भोक्ता के घर पर स्पेशल टास्क फोर्स ने छापेमारी की थी. उसने पूछताछ में बताया है कि टीपीसी के ब्रजेश गंझू, आक्रमण एवं अन्य के संरक्षण में पिपरवार थाना अंतर्गत अशोका, पिपरवार एवं पुरनाडीह कोल परियोजना में विस्थापित ग्रामीण संचालन समिति का गठन किया गया है. जिसमें ग्रामीण बेंती, विजनटोला, न्यू मंगरदाहा, सरैया ठेठांगी, सरैया के कुछ व्यक्ति अशोक कोल परियोजना में, ग्राम कल्याणपुर, बहेरा, राजधर के कुछ व्यक्ति पिपरवार कोल परियोजना में और ग्राम पुरनाडीह, जामडीह, एकराडीहगड़ा व कठौन  के कुछ व्यक्ति पुरनाडीह कोल परियोजना में संचालन समिति में शामिल किया गया है.

संचालन समिति के सदस्य कोल परियोजना से जुड़े कोल व्यवसायी, डीओ होल्डर और ट्रांसपोर्टर इत्यादि से टीपीसी उग्रवादी संगठन का भय दिखाकर रंगदारी के रूप में प्रति टन 130 रुपये लेते हैं.

टीपीसी तक पहुंचता है बड़ा हिस्सा : दोनों ने यह भी बताया है कि वसूली का बड़ा हिस्सा टीपीसी के उग्रवादियों को पहुंचाया जाता है. हालांकि संचालन समिति के सदस्य भी रुपये को आपस में बांट लेते हैं. विनय खलखो के संबंध में ग्रामीणों ने पुलिस को जानकारी दी है कि वह उग्रवादियों के संरक्षण में संचालन समिति के नाम पर अवैध तरीके से लेवी की वसूली करता है. बरवाडीह गांव निवासी धनराज भोक्ता उर्फ मिठू ने पूछताछ में बताया है कि कांटा घर में वाहनों का कांटा होने के बाद जब लोडिंग के लिए वाहनों को भेजा जाता है, तो उसके पहले विस्थापित ग्रामीण विजमैन संचालन समिति या कोल फील्ड लोडर एसोसिएशन को एक हजार रुपये वाहन मालिक देता है. रुपये नहीं देने पर कोयला लोड नहीं होने दिया जाता है. 

और क्या दी जानकारी: विगन भोक्ता और धनराज भोक्ता ने पूछताछ में बताया है कि टीपीसी के ब्रजेश गंझू, भीखन गंझू, आक्रमण, आदेश गंझू, आजाद, सौरभ और मुकेश के संरक्षण में पिपरवार कोल परियोजना में बबलू सागर मुंडा, जानकी महतो, क्यूम अंसारी, मुन्ना मियां, असलम, प्रकाश मुंडा, विनोद महतो, विजय महतो, गब्बर महतो, बालेश्वर उरांव, दिनेश भगत, कैलाश करमाली, शिव प्रकाश प्रजापति, दर्शन गंझू, अवध ठाकुर, तालेश्वर उरांव, देवनारायण गंझू, प्रेम सागर मुंडा, रतन महतो, वासुदेव, विकास, नागेश्वर गंझू, अर्जुन गंझू, धनेश्वर गंझू, सुरेश गंझू, विजन, देवलाल गंझू, सुखी गंझू, फागू गंझू आदि के नाम पर वसूली की जाती है. जिसमें एजाजुल, विशुन देव, प्रेम गंझू, सुरेंद्र राम, जुगेश, अनिल चौबे माइनिंग सरदार सीसीएल के द्वारा टीपीसी उग्रवादियों एवं संचालन समिति के बीच तालमेल स्थापित कर टीपीसी उग्रवादी संगठन के निर्देशों को संचालन समिति के सदस्यों तक पहुंचाया जाता है.

जेल में बंद उग्रवादी के नाम पर भी होती है वसूली

दोनों ने यह भी बताया कि अशोक कोल परियोजना के सेल्स इंचार्ज दीपक कुमार एवं कांटा घर के कर्मचारी नागेंद्र पांडेय, गणेश, टी सिंह तथा पिपरवार कोल परियोजना के सेल्स इंचार्ज एके सिंह एवं कांटा घर के कर्मचारी सेवा सिंह, टिकेश्वर महतो, केके सिंह का  कोल व्यवसायियों और टीपीसी से संबंध है. इनके द्वारा भी संचालन समिति के सदस्यों को टीपीसी के नाम पर कोल परियोजना से जुड़े व्यवसायियों से पैसा वसूली करने एवं टीपीसी उग्रवादियों तक पहुंचाने में सहयोग किया जाता है. इसके अतिरिक्त विनय सिंह, महेश एवं राजेश गंझू के द्वारा संचालन समिति के नाम पर कोयला व्यवसायी से लेवी की वसूली की जाती है. वहीं, जेल में बंद रोहन गंझू और राजेश गंझू के नाम पर भी लेवी की वसूली की जाती है.

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