Advertisement

calcutta

  • Oct 15 2019 1:53PM
Advertisement

#NobelPrize : भारत में नोबेल पुरस्कारों का गढ़ बना बंगाल

#NobelPrize : भारत में नोबेल पुरस्कारों का गढ़ बना बंगाल

-अर्थशास्त्र में अमर्त्य सेन के बाद प्रोफेसर अभिजीत को मिला है नोबेल
-बंगाल से रवींद्रनाथ टैगोर और मदर टेरेसा को भी मिल चुका है नोबेल
-नोबेल पुरस्कार विजेता सीवी रमन का भी रहा है कोलकाता से नाता, कलकत्ता विश्वविद्यालय में थे भौतिकी के प्रोफेसर
कोलकाता :
भारतीय अमेरिकी अभिजीत विनायक बनर्जी के नाम का चयन अर्थशास्त्र के क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार के लिए किया गया है. इसके साथ ही बनर्जी उन भारतीय और भारतीय मूल के लोगों में शामिल हो गये हैं, जिन्हें यह प्रतिष्ठित पुरस्कार विभिन्न क्षेत्रों में दिया गया है. श्री बनर्जी को नोबेल पुरस्कार मिलने के साथ ही पूरे देश में  बंगाल नोबेल पुरस्कार का गढ़ बना गया है.

श्री बनर्जी ने कलकत्ता विश्वविद्यालय और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय से अपनी पढ़ाई की. इसके बाद 1988 में उन्होंने हावर्ड विश्वविद्यालय से पीएचडी की उपाधि हासिल की. श्री बनर्जी उन भारतीय और भारतीय मूल के लोगों में शामिल हो गये हैं, जिन्हें भौतिकी, रसायन, शांति, अर्थशास्त्र और चिकित्सा जैसे विषयों में योगदान के लिए प्रतिष्ठित नोबेल पुरस्कार से नवाजा गया है. सबसे पहले 1913 में साहित्य के लिए कवि गुरु रवींद्रनाथ टैगोर को उनकी कालजयी रचना ‘गीतांजलि' के लिए नोबेल पुरस्कार दिया गया था. उनके नाम की घोषणा करते हुए अकेडमी ने कहा था कि उन्हें काव्यात्मक तरीके से गूढ़ संवेदनशील, ताजा और उत्कृष्ट सुंदर पद्य लिखने के लिए यह पुरस्कार दिया गया है.

सीवी रमण को 1930 में प्रकाश के प्रकीर्णन पर किए गए उनके महत्वपूर्ण काम के लिए दिया गया. इस प्रभाव का नाम भी उनके नाम के आधार पर ‘रमन प्रभाव’ रखा गया है. उन्हें ‘भारत रत्न’ सम्मान से सम्मानित किया गया है. कलकत्ता विश्वविद्यालय में 1917 में श्री रमन भौतिकी के प्राध्यापक बने थे. भारतीय अमेरिकी वैज्ञानिक हर गोविंद खुराना को दो अन्य लोगों के साथ चिकित्सा क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार से 1968 में सम्मानित किया गया. उन्हें ‘कोशिका के आनुवंशिक कोड की संरचना और प्रोटीन के संश्लेषण में इसकी भूमिका’ की खोज करने के लिए नोबेल पुरस्कार दिया गया था. अल्बानियाई मूल की भारतीय नागरिक मदर टेरेसा को 1979 में नोबेल के ‘शांति पुरस्कार’ से नवाजा गया था. मदर टेरेसा ने कोलकाता में अपना सेवामूलक कार्य किया था. ‘द मिशनरीज ऑफ चैरिटी’ की संस्थापक मदर टेरेसा को यह पुरस्कार ‘पीड़ित मानवता की सेवा करने के लिए’ दिया गया था.

भारतीय अमेरिकी सुब्रह्मण्यम चंद्रशेखर को 1983 में विलियम ए फाउलर के साथ भौतिकी में नोबेल पुरस्कार से नवाजा गया. उन्हें यह पुरस्कार ‘तारों की संरचना और उसकी उत्पत्ति में भौतिकी प्रक्रियाओं’ के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए दिया गया. बंगाल के ही अमर्त्य सेन को ‘कल्याणकारी अर्थशास्त्र में उनके योगदान’ के लिए 1998 में अर्थशास्त्र का नोबेल पुरस्कार दिया गया. भारतीय मूल के वेंकटरमण रामाकृष्णन को 2009 में दो अन्य वैज्ञानिकों के साथ ‘राइबोजोम की संरचना और उसके प्रक्रियात्मक पहलुओं’ के अध्ययन के लिए रसायनशास्त्र के नोबेल पुरस्कार से नवाजा गया. पाकिस्तान की किशोरी मलाला यूसुफजई के साथ कैलाश सत्यार्थी को 2014 में नोबेल के शांति पुरस्कार से नवाजा गया. उन्हें यह पुरस्कार ‘बच्चों और किशोरों के दमन के खिलाफ संघर्ष और शिक्षा का अधिकार सभी बच्चों को दिलाने की दिशा में भूमिका’ के लिए मिला. नोबेल पुरस्कार 1901 में शुरू हुआ और 2018 तक यह 935 व्यक्तियों एवं संगठनों को दिया गया है.

Advertisement

Comments

Advertisement
Advertisement