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calcutta

  • May 27 2019 6:37AM
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कोलकाता में चलेंगी जुलाई से 40 बड़ी इलेक्ट्रिक बसें

 कोलकाता : पश्चिम बंगाल सरकार ने पर्यावरण संरक्षण पर विशेष बल देते हुए महानगर की सड़कों पर पर्यावरण फ्रेंडली बसों को उतारी है, जो विभिन्न रूटों में चल रही हैं लेकिन जल्द ही अधिक सीटों वाली पर्यावरण फ्रेंडली बड़ी बसें भी महानगर की सड़कों पर दौड़ने वाली हैं. जुलाई माह के अंत तक बंगाल में अधिक सीटोंवाली पर्यावरण फ्रेंडली इलेक्ट्रिक बड़ी बसें आ जायेंगी. 

 
इसे लेकर अगले माह ही पश्चिम बंगाल परिवहन निगम विभाग के एक प्रतिनिधि दल की टीम कर्नाटक स्थित उक्त फैक्टरी में जानेवाली है, जहां इस तरह की बसें तैयार की जा रही हैं. 
 
 पश्चिम बंगाल परिवहन निगम सूत्रों के मुताबिक, परिवहन निगम विभाग के एक प्रतिनिधि दल की टीम अगले माह के प्रथम सप्ताह में प्रोटोटाइप बसों का परिदर्शन करने के लिए इस तरह की बसें तैयार करनेवाली संस्था के कर्नाटक स्थित फैक्टरी में जायेगी. वहां जाकर बसों का परिदर्शन किया जायेगा और फिर लगभग 40 बड़ी इलेक्ट्रिक बसें शहर में लायी जायेंगी. 
 
बड़ी बसों में होंगी 41 सीटें
परिवहन निगम सूत्रों के मुताबिक, इसके पहले कई खेप में शहर में छोटी-छोटी 40 इलेक्ट्रिक बसें आयी हैं. उन बसों की लंबाई 9 मीटर है. बसों में सीटों की संख्या 32 है. ये बसें बागबाजार-नवान्न-मंदिरतल्ला, कूंदघाट-एयरपोर्ट और जोका-न्यूटाउन सहित विभिन्न रूटों में चल रही हैं, लेकिन आनेवाली बड़ी बसों की लंबाई करीब 12 मीटर के आस-पास है. उसमें सीटों की संख्या 41 होगी.
 
गर्मी में पर्यावरण फ्रेंडली एसी बसों की है मांग
बताया जाता है कि पर्यावरण फ्रेंडली बसों को लेकर यात्रियों में भी उत्साह है. बढ़ते गर्मी के कारण शहर में एसी बसों की मांग ज्यादा बढ़ रही है. ऐसे में पर्यावरण फ्रेंडली एसी बसें अधिक आने से यात्रियों की मांग पूरी होगी. यात्रियों में पर्यावरण फ्रेंडली बसों को लेकर भी उत्साह है. 
 
बढ़ाये जायेंगे चार्जिंग प्वाइंट
परिवहन निगम सूत्रों के मुताबिक, कोलकाता में इलेक्ट्रिक बसों को चलाने के लिए 9 डिपो और 8 टर्मिनलों में चार्जिंग प्वाइंट बनाने की योजना थी. अभी तक नोनापुकुर, कसबा, लेक, ठाकुरपुकुर और बेलघरिया में डिपो और सांतरागाछी, नवान्न, हावड़ा स्टेशन, राजाबाजार और न्यूटाउन टर्मिनल्स में चार्जिंग प्वाइंट बनाने का काम समाप्त हो गया है. नयी बसें आने पर जरूरत के अनुसार और चार्जिंग प्वाइंट भी बनाये जायेंगे.
 
 डीजल संचालित बसों की तुलना में खर्च भी कम
परिवहन निगम के एक अधिकारी ने बताया कि डीजल चालित बसों की तुलना में पर्यावरण फ्रेंडली इलेक्ट्रिक बसों को चलाने में खर्च भी कम पड़ते हैं. अनुमानन अभी तक करीब 55 प्रतिशत खर्च कम हो रहा है. एक किलो मीटर बस चलाने के लिए 1.3 यूनिट विद्युत की जरूरत होती है, लेकिन खर्च की बात नहीं है, बल्कि पर्यावरण सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सरकार ने इलेक्ट्रिक बसों पर अधिक बल दिया है. 
 
यात्रियों की मांग पर निर्भर करेगा नया रूट 
परिवहन निगम के एक अधिकारी ने बताया कि 40 नयी बसें आने पर नये रूटों में भी चलाया जा सकता है. फिलहाल पहले से चालित इलेक्ट्रिक बसों को पुराने रूटों में ही चलाया जा रहा है. यात्रियों की मांग को देखते हुए नये रूटों में भी चलाने पर विचार होगा.
 
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