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  • May 16 2019 10:21PM

कोलकाता में टूटी विद्यासागर की मूर्ति, झारखंड के करमाटांड़ में जनाक्रोश, जानिये कैसे...?

कोलकाता में टूटी विद्यासागर की मूर्ति, झारखंड के करमाटांड़ में जनाक्रोश, जानिये कैसे...?

कोलकाता : कोलकाता में ईश्वर चंद्र विद्यासागर की मूर्ति तोड़ने की घटना को लेकर पूरे बंगाल के साथ ही पूरे देश में राजनीतिक बवाल मचा हुआ है. इस राजनीतिक बवाल के बीच बंगाल की इस घटना को लेकर झारखंड के करमाटांड़ स्थित विद्यासागार के पैतृक गांव के लोगों में भारी रोष है. विद्यासागर स्मृति रक्षा समिति ने इस पूरे मामले की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. समिति ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के साथ ही अमित शाह के पास भी आवेदन करने का निर्णय लिया है.

समाजिक विकास में सक्रिय योगदान

झारखंड के जामताड़ा जिला स्थित करमाटांड़ में ईश्वर चंद्र विद्यासागर का मकान है, जहां अंतिम क्षण व्यतीत किये थे. उस जमीन के अंतर्गत बिहार-बंगाली समिति भी है. इस जमीन पर ही ग्यारह कमरे का मूल भवन है. उस घर को केंद्र करके ही विद्यासागर स्मृति रक्षा समिति विभिन्न तरह के सामाजिक कार्यक्रमों का पालन करती है.

फोटो गैलरी के माध्यम से ईश्वर चंद्र विद्यासागर की जीवनी को दर्शाया गया है. वहां दंत चिकित्सालय भी चल रहा है. महिलाओं को सिलाई सिखायी जा रही है. 26 सितंबर 1993 को विद्यासागर के जन्मदिन पर उनकी एक मूर्ति भी स्थापित की गयी. करमाटांड़ में लगभग 17 साल ईश्व चंद्र विद्यासागर रहे. वहां आदिवासी समाज की शिक्षा व सामाजिक विकास के लिए भी काम किये. वहां से ही वर्ण परिचय का छठवां संस्करण प्रकाशित किये थे.

करमाटांड़ में होता है विद्यासागर मेले का आयोजन


बिहार-बंगाली समिति के महासचिव और स्मृति रक्षा समिति के संयुक्त सचिव सुनिर्मल दास ने बताया कि विद्यासागर के बचपन के साथ-साथ करमाटांड़ के लिए उन्होंने जो काम किये, वे सारे फोटो गैलरी में उन दृश्यों को समेटा गया है. एक म्युजियम भी बनाने की योजना है. प्रत्येक साल 25, 26 और 27 सितंबर को करमाटांड़ में विद्यासागर मेला का आयोजन किया जाता है. विद्यासागर के जन्म दिन पर कई कार्यक्रम की योजना है. यहां तक कि जिस दिन जमीन खरीदी गयी है, 29 मार्च को उस दिन को गुरु दक्षिणा दिन के रूप में मनाया जाता है. 29 जुलाई को पुण्य तिथि मनायी जाती है.

भाजपा और बंगाल सरकार दोनों पर उठाये सवाल


कोलकाता में विद्यासागर की मूर्ति तोड़ने की घटना से करमाटांड़ आहत है. पटनावासी होने के बावजूद सुनिर्मल दास करमाटांड़ को दूसरा ठिकाना बना लिये हैं. वह इस मूर्ति तोड़ने की घटना को लेकर भाजपा के साथ-साथ समान रूप से ही पश्चिम बंगाल की सरकार को भी दोषी करार दिये हैं. उनका कहना है कि सरकार खुद की संपत्ति की रक्षा नहीं कर सकती है? इस घटना के लिए दोनों ही पक्ष जिम्मेदार है. ईश्वरचंद्र विधवा विवाह चालू करने और दहेज प्रथा को बंद करने के लिए आंदोलन किये थे.

जब स्टेशन का नाम रखा गया विद्यासागर

उन्होंने बताया कि केवल विद्यासागर के मकान को सुरक्षित रखना अथवा उनकी मूर्ति स्थापित करना ही नहीं बल्कि उनके नाम से झारखंड में रेलवे स्टेशन भी है. साल 1973 में जामताड़ा में स्मृति रक्षा समिति की पहली बैठक 27 से 29 अप्रैल के बीच हुई. उस दिन अन्य प्रस्ताव के साथ ही करमाटांड़ रेलवे स्टेशन का नाम विद्यासागर रखने का प्रस्ताव भी पास हुआ. संबंधित विभाग के पास इस प्रस्ताव को रखा गया. इसके बाद 1978 में करमांटाड़ रेलवे स्टेशन का नाम बदल कर विद्यासागर किया गया.

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