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  • Jul 16 2019 4:28PM
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लास एंजेल्‍स का 13 वर्षीय अहिलान संतूर की शिक्षा लेने पहुंचा है कोलकाता

लास एंजेल्‍स का 13 वर्षीय अहिलान संतूर की शिक्षा लेने पहुंचा है कोलकाता

- शास्त्रीय संगीत की चाहत हॉलीवुड से खींच लायी कोलकाता 

कोलकाता : भारतीय कलाकारों की अमेरिका और हॉलीवुड में अपनी कला के प्रदर्शन की चाहत होती है, लेकिन अमेरिका के लास एंजेल्स में रहने वाले 13 वर्षीय अहिलान हेट्टी और उनके मां अरुणा हेट्टी व पिता विक्रम हेट्टी को शास्त्रीय संगीत की चाहत कोलकाता खींच लायी है. आंध्र प्रदेश के गुडीवाड़ा की मूल निवासी और पेशे से वकील अरुणा और कर्नाटक के मूल निवासी व पेशे से रेडियोलॉजिस्ट विक्रम हेट्टी वर्षों पूर्व भारत से अमेरिका चले गये हैं और अब वहीं के नागरिक हैं, लेकिन अमेरिका में रहने के बावजूद दिल हिंदुस्तानी ही है.

 

उनकी आत्मा शास्त्रीय संगीत की सुरों में बसती है. प्रभात खबर से बातचीत में अरुणा बताती हैं कि हालांकि वे लोग लंबे समय से लास एजेंल्स में रहते हैं, लेकिन उनका दिल हिंदुस्तानी ही है. भारत की संस्कृति और शास्त्रीय संगीत की बारीकियां उन लोगों को आकर्षित करती रहती थी. वे लोग चाहते थे कि शास्त्रीय संगीत की सुरों से वे लोग जुड़ पाएं, लेकिन अमेरिका में भारतीय शास्त्रीय संगीत के शिक्षक को ढ़ूढ़ना बहुत सरल नहीं था. 

 

वह बताती हैं कि अहिलान की उम्र चार वर्ष की रही होगी. कैलिफोर्निया में संतूर वादक रंजीत पाठक का कंसर्ट था. वे लोग उस कंसर्ट को देखने के लिए गये थे. संतूर की झंकार और सुर ने उन लोगों को इतना आकर्षित किया कि उन लोगों अहिलान को संतूर की विधिवत शिक्षा दिलाने का निर्णय लिया,लेकिन शिक्षक की तलाश में चार वर्ष बीत गये. लगभग सात वर्ष की आयु में अहिलान ने संतूर सीखना शुरू कर दिया.

 

अहिलान के पिता विक्रम हेट्टी बताते हैं कि अहिलान ने बहुत जल्द ही संतूर की बारीकियां और कई राग सीख लिये और उसके कंसर्ट लास एजेंल्स, मेरीलैंड सहित अमेरिका में विभिन्न शहरों में होते रहते हैं, लेकिन वह क्षण वे लोग अभी तक नहीं ‍भूल पा रहे हैं, जब उसने नामी-गिरामी शास्त्रीय संगीत के कलाकारों के साथ तबला वादक ज्योतिर्मय की संगत में हॉलीवुड में संतूर वादन किया था.

 

उस कंसर्ट में विश्व के नामी गिरामी कलाकारों ने हिस्सा लिया था, लेकिन उनमें अहिलान सबसे कम उम्र का था और दर्शकों की उसे बहुत ही वाहवाही मिली थी. वह बताते हैं कि मैसूर में रहने वाली उनकी दादी जयामम्मा हट्टी वीणा बजाया करती थी. अहिलान को दादी से संगीत विरासत में मिली है. 

 

वह बताते हैं कि भारत खासकर कोलकाता में शास्त्रीय संगीत की आत्मा बसती है. उन लोगों ने संतूर वादक पंडित तरुण भट्टाचार्य का नाम सुना था. अहिलान को उनसे संतूर की बारीकियों का प्रशिक्षण मिले. इसलिए वे लोग कोलकाता आये हैं. पंडित भट्टाचार्य बताते हैं कि अहिलान संतूर आश्रम के कई कार्यक्रमों में प्रदर्शन कर चुका है तथा उज्जवल भविष्य उसका इंतजार कर रहा है.

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