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  • Jan 19 2020 8:25PM
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सीएए के बाद अब जनसंख्या नियंत्रण कानून के पक्ष में आरएसएस-भाजपा

सीएए के बाद अब जनसंख्या नियंत्रण कानून के पक्ष में आरएसएस-भाजपा

देश के सर्वांगीण विकास के लिए जनसंख्या नियंत्रण आवश्यक : दिलीप घोष 

कोलकाता : नागरिकता संशोधन कानून के बाद अब जनसंख्या नियंत्रण कानून को लेकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और भाजपा ने जनता के बीच जागरुकता पैदा करने की पहल शुरू कर दी है. हालांकि फिलहाल यह केवल विचार स्तर पर ही है. लेकिन इसे लेकर आरएसएस और भाजपा में विचार मंथन शुरू हो गया है. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने शनिवार को मुरादाबाद में आरएसएस के एक कार्यक्रम में इस पर बहस छेड़ दी है.

उन्होंने कहा : सरकार को ऐसे कदम उठाने चाहिए, जिससे जनसंख्या पर लगाम लग सके. जनसंख्या नियंत्रण कानून की तत्काल जरूरत है. उल्लेखनीय है कि वर्ष 2015 में श्री भागवत ने सबसे पहले जनसंख्या नियंत्रण की बात कही थी. दूसरी बार, देश में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार गठन के बाद पहले कश्मीर से धारा 370 में संशोधन किया गया और धारा 370 को हटाया गया. 

राम मंदिर निर्माण को लेकर सर्वोच्च न्यायालय का ऐतिहासिक फैसला आया और अयोध्या में राम मंदिर बनाने के संकल्प को गति मिली. उसके बाद देश में लंबे समय से प्रताड़ना की जिंदगी बिता रहे शरणार्थियों के लिए नागरिकता संशोधन कानून लाया. हालांकि इसे लेकर विपक्षी पार्टियां लगातार देश में प्रदर्शन कर रही हैं. लेकिन आरएसएस और भाजपा का कहना है कि यह कानून देश हित में है.

वोट बैंक को लेकर विपक्षी पार्टियां भ्रम फैला रही हैं, लेकिन लोगों की गलतफहमी शीघ्र ही दूर होगी. भाजपा के वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि केंद्र सरकार ‘टू चाइल्ड पॉलिसी’ लाने की पक्षपाती है. अगले सत्र से लोकसभा का सत्र शुरू हो रहा है. उस सत्र में इस पर चर्चा होने की संभावना है. 

इस बारे में प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष व सांसद दिलीप घोष से पूछे जाने पर कहा : लगातार बढ़ती जनसंख्या हमारे देश में बहुत बड़ी समस्या है. जनसंख्या पर नियंत्रण होना ही चाहिए. जिस दर से जनसंख्या बढ़ रही है. उससे सारी योजना फेल हो जाती है. देश की विकासमूलक योजनाओं को सही से लागू करने के लिए जनसंख्या नियंत्रण आवश्यक है. सारे देश में जनसंख्या नियंत्रण का कड़ाई से पालन किया जाता है. 

इसे अपने देश में पालन करना होगा, लेकिन जब हम इसकी बात करते हैं, तो कुछ नेता चिल्लाने लगते हैं, उन्हें वोट बैंक की याद आ जाती है. यदि जनसंख्या नियंत्रण नहीं किया गया, तो सामाजिक व राजनीतिक सभी तरह का बैलेंस गड़बड़ा जायेगा.

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