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budget 2019

  • Jul 6 2019 12:25PM
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मोदी-2 सरकार का पहला बही खाता, इंफ्रास्टक्ट्रचर को विकसित करने में होगा मददगार

मोदी-2 सरकार का पहला बही खाता, इंफ्रास्टक्ट्रचर को विकसित करने में होगा मददगार

-डॉ. अश्विनी महाजन- 

मोदी-2 सरकार का पहला बजट यानी यूं कहें बही खाता भारत की पहली पूर्णकालिक वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा संसद में पेश हो चुका है. वैसे तो, सभी सरकारों पर जनता का दबाव रहता है कि ऐसा बजट बने, जिसमें सभी वर्गों के लिए कुछ-न-कुछ हो और सभी को संतुष्ट किया जा सके. लोकसभा चुनाव में प्रचंड बहुमत के उपरांत इस सरकार पर यह दबाव कुछ ज्यादा ही था. लेकिन, देश की अर्थव्यवस्था की यह जरूरत भी थी कि लोकलुभावन विषयों को छोड़ बजट में इस प्रकार के प्रावधान हो, ताकि निवेश और उपभोक्ता मांग दोनों को बढ़ाया जा सके, मंदी की मार झेल रही अर्थव्यवस्था उससे उभर पाये. इंफ्रास्ट्रक्चर, जिसके विकास के लिए अगले पांच वर्षों में 100 लाख करोड़ रुपया खर्च हो, ऐसी सरकार की मंशा है, उसके लिए भी बजट में प्रावधान चाहिए थे.  

वित्तीय क्षेत्र जैसे बैंक और गैर बैंक वित्तीय संस्थान आज बुरी अवस्था में है.  बैंकों के भारी मात्रा में एनपीए और गैर बैंक वित्तीय संस्थानों की खराब सेहत के चलते देश में क्रेडिट का प्रवाह रूक-सा गया है, इसकी भी चिंता वित्त मंत्री को करनी थी. उधर देश और दुनिया में बढ़ते प्रदूषण और उसके कारण बदलते मौसम आज किसान से लेकर आम आदमी तक के लिए चिंता का विषय बने हुए हैं, उसके लिए भी प्रावधानों की जरूरत थी. मंदी की मार झेल रहे मैन्युफैक्चरिंग को एक सहारे की भी जरूरत थी, ताकि उसे सस्ते विदेशी आयातों की मार से बचाया जा सके.  

इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए हैं बड़े प्रावधान

प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के लिए बड़ा प्रावधान है. ऐसा कहा गया है कि अगले पांच वर्षों में 80,250 करोड़ रुपये के खर्च से 1,25,000 किमी लंबी सड़कों को बेहतर बनाया जायेगा. इसके अलावा रेलवे का विस्तार, जो पिछले काफी समय से बहुत धीमी गति से हो रहा है उसके लिए भी कुछ योजना की जरूरत थी. रेल पटरी की जरूरत के मुताबिक उसका विस्तार धन के अभाव में सीमित हो पाता है, ऐसे में वित्त मंत्री ने प्रस्ताव रखा है कि पीपीपी यानी सरकारी निजी साझेदारी में रेल पटरी का विस्तार किया जाये. 

हाउसिंग

पिछले काफी समय से हाउसिंग यानी रियल इस्टेट क्षेत्र भारी संकट से गुजर रहा है, लाखों फ्लैट्स तैयार होकर खड़े है, जिनका कोई खरीदार नहीं है. इसलिए नये घरों का निर्माण रुक गया है. रियल इस्टेट और हाउसिंग एक ऐसा क्षेत्र है, जिसका विकास होने पर कई उद्योग पनपते हैं, सीमेंट, लोहा, टाइल्स, ग्लास ही नहीं, इसके अतिरिक्त बीसियों प्रकार के उद्योग हाउसिंग से जुड़े हुए है. वित्तमंत्री ने हाउसिंग क्षेत्र के लिए एक बड़ा ऐलान किया है. इस बजट में 45 लाख रुपये तक के घरों के लिए ऋण के लिए ब्याज में 3.5 लाख रुपये सालाना तक की आयकर में छूट का प्रावधान रखा गया है. उधर ग्रामीण एवं शहरी गृह निर्माण पर भारी बल दिया जा रहा है, जिसका लाभ लोगों को तो मिलेगा ही, अर्थव्यवस्था को भी इससे प्रोत्साहन मिल सकता है. ऐसा कहा गया है कि अभी से 2022 तक एक 1.95 करोड़ नये ग्रामीण घरों का निर्माण होगा. तकनीक का भी उपयोग इसके लिए किया जायेगा. ये घर एलपीजी, बिजली और शौचालयों से सुसज्जित रहेंगे. 

इलेक्ट्रिक कार

देश और दुनिया आज पर्यावरणीय संकट से जूझ रही है. इसके लिए जरूरी है कि देश पेट्रोल डीजल वाहनों से आगे बढ़ते हुए इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाये. इस बजट में इस संबंध में खासा प्रावधान किया गया हैं. इलेक्ट्रिक कार पर जीएसटी 12 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत किया गया है. अगर कोई इलेक्ट्रिक वाहन खरीदता है, तो उस पर दिये गये 1.5 लाख रुपये तक के ब्याज पर आयकर से छूट मिलेगी. ऐसा लगता है कि इन छूटों के कारण लोग इलेक्ट्रिक कारों की तरफ आकर्षित होंगे.

मेक इन इंडिया

यूं तो मेक इन इंडिया के लिए बजट में प्रावधान हैं ही, लेकिन इस बजट में इसके अलावा भी प्रयास हुए हैं और पिछले साल की भांति इस साल भी कई आयातित वस्तुओं पर शुल्क घटाया गया है. जैसे - विनायल फ्लोरिंग, टाइल्स, मार्बल इत्यादि. इससे आयात प्रतिस्थापन होगा और देश में इन वस्तुओं का उत्पादन बढ़ेगा.

वित्तीय क्षेत्र

एनपीए संकट से जूझते बैंकों को 70,000 करोड़ रुपये उपलब्ध कराये जा रहे हैं, जिससे वे अपनी पूंजी की आवश्कताओं को पूरा कर सकें और आगे उधार बढ़ा सकें. साथ ही गैर बैंक वित्तीय संस्थानों (एनबीएफसी) को मदद करने के लिए उनके द्वारा दिये जा रहे हाउसिंग ऋणों को रिजर्व बैंक के अंतर्गत लाने का फैसला लिया गया है.  

एफडीआई

सिंगल ब्रांड एफडीआई में सरकार ने अपने संकल्प के विपरीत घरेलू सोर्सिंग के प्रावधान को ढीला करने का फैसला किया है. गौरतलब है कि अभी तक सिंगल ब्रांड एफडीआई कंपनियों को 30 प्रतिशत भारत से ही खरीद करने की हिदायत है. यह कदम मेक इन इंडिया के खिलाफ जायेगा. संतोष की बात यह है कि इस बार बजट में नये क्षेत्रों को एफडीआई के लिए तुरंत खोलने का फैसला नहीं किया गया. मीडिया, बीमा आदि क्षेत्रों में एफडीआई को अनुमति देने के संबंध में सरकार ने हितधारकों के साथ बातचीत का फैसला किया है. यह एक स्वागत योग्य कदम है क्योंकि इससे होनेवाले नुकसानों के बारे में सरकार को पता लगाने का मौका मिलेगा. 

कुल मिलाकर इसे लोकलुभावन बजट नहीं कहा जा सकता, लेकिन यह बजट देश में विकास की गति को बढ़ाने, मैन्युफैक्चरिंग को मदद करने, वित्तीय क्षेत्र की सेहत को सुधारने और इंफ्रास्टक्ट्रचर को विकसित करने के प्रभावित कदमों से पूर्ण हो सकता है.  

(लेखक डीयू के एसोसिएट प्रोफेसर हैं) 

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