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  • Apr 16 2019 8:32AM
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सारेगामा ने कोर्ट से कहा: एल्बम के सीडी कवर पर मन्ना डे की फोटो और नाम का इस्तेमाल नहीं करेंगे

सारेगामा ने कोर्ट से कहा: एल्बम के सीडी कवर पर मन्ना डे की फोटो और नाम का इस्तेमाल नहीं करेंगे

नयी दिल्ली : देश की सबसे पुरानी संगीत कंपनियों में से एक सारेगामा इंडिया लि. ने सोमवार को उच्चतम न्यायालय से कहा कि वह प्रख्यात गीतकार दिवंगत मन्ना डे की तस्वीर और नाम का इस्तेमाल अपने ‘होयतो तोमरी जान्नो' एल्बम के सीडी कवर पर इस्तेमाल नहीं करेगी. पद्म भूषण और दादासाहेब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित मन्ना डे के नाम से विख्यात प्रबोध चंद्र डे ने ‘ऐ मेरी जोहरा जबीं', ‘लागा चुनरी में दाग' और ‘तू प्यार का सागर है' जैसे अनेक यादगार गीत गाये थे.

न्यायमूर्ति एस ए बोबडे और न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर की पीठ को सारेगामा कंपनी ने मन्ना डे की पुत्री की याचिका पर सुनवाई के दौरान अपने इस दृष्टिकोण से अवगत कराया.

मन्ना डे की पुत्री ने कर्नाटक उच्च न्यायालय के पिछले साल 13 दिसंबर के आदेश को चुनौती दी है जिसने उनके पिता के कापीराइट के अधिकारों के अतिक्रमण के आरोपों पर अंतरिम रोक लगाने का उसका अनुरोध अस्वीकार कर दिया था. शुमिता देब ने अपनी याचिका में कहा है कि यह संगीत कंपनी 14 गानों के एलबम की सीडी बेच रही है जिसमे दो गानों को मन्ना डे ने तैयार किया था लेकिन उन्हें किसी अन्य गीतकार ने गाया है.

सारेगामा कंपनी के वकील ने पीठ से कहा कि यह सीडी मन्ना डे को श्रृद्धांजलि है तो न्यायमूर्ति बोबडे ने पूछा, ‘‘अभी हमें बतायें, क्या आप मन्ना डे की फोटो हटायेंगे?'' इस पर वकील ने कहा, ‘‘हम अंतरिम रूप से मन्ना डे की फोटो हटा लेंगे.''

हालांकि, देब के वकील ने कहा कि यह संगीत कंपनी तो एलबम के सीडी कवर पर भी मन्ना डे के नाम का इस्तेमाल नहीं कर सकती. इस पर पीठ ने कहा कि वह उसकी याचिका पर नोटिस जारी करेंगे और उच्च न्यायालय के आदेश पर रोक लगा देंगे. पीठ के इस रूख को देखते ही सारेगामा कंपनी के वकील ने कहा कि वह सीडी के कवर से भी मन्ना डे का नाम हटा लेगी.

पीठ ने अपने आदेश में कहा कि संगीत कंपनी और सोनी डीएडीसी मैन्यूफैक्चरिंग (इं) प्रा लि के वकील ने कहा है कि वे मन्ना डे की फोटो हटा लेंगे और सीडी के कवर पर भी उनके नाम और फोटो का इस्तेमाल नहीं करेंगे. शीर्ष अदालत ने इस मामले में बेंगलुरू की जिला अदालत में दाखिल दीवानी वाद के मामले में निर्देश दिया कि इसका फैसला यथाशीघ्र और हो सके तो एक साल के भीतर ही किया जाये.

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