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  • Dec 23 2018 8:47AM
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बिहार आते ही लिट्टी-चोखा खातीं हैं फातिमा सना शेख

बिहार आते ही लिट्टी-चोखा खातीं हैं फातिमा सना शेख
pic taken from Social media

जिंदगी में कुछ हासिल करने की तमन्ना हो, तो इंसान उसे पाकर रहता है. इसलिए अपनी चाहत को हमेशा बुलंद रखना चाहिए बुलंद हौसले के साथ बॉलीवुड में नयी पहचान बनाने वाली फातिमा सना शेख ने कुछ इसी अंदाज में अपनी बात कही. दंगल और ठग्स ऑफ हिंदुस्तान फिल्म में दमदार किरदार निभा चुकी फातिमा शनिवार को पटना में मौजूद थीं. उन्होंने प्रभात खबर से खास बातचीत में कई सारी बातों को साझा किया. 

-आने से पहले बिहार के बारे में क्या ख्याल था
मैं बिहार व पटना को ज्यादा नहीं जानती है़ लेकिन, बिहार का नाम आते लोग लिट्टी-चोखा का नाम लेते हैं. इसलिए मैं पटना आते ही लिट्टी-चोखा मंगवायी हूं. क्योंकि, मुझे इसे टेस्ट करना था. मेरा मानना है कि आप जब कहीं खुद से जाकर नहीं देखते हैं. अंदाजा नहीं लगा सकते. 

-फिल्मों में कैसे आना हुआ
मेरी मां का शौक था कि मैं फिल्म में आऊं. उन्हें हमेशा फिल्म की शूटिंग देखना अच्छा लगता था. सेलिब्रिटी के साथ फोटो खिंचाना अच्छा लगता था. वे ऑडिशन के बारे में पता करते रहती थी. इस दौरान ऑडिशन दी और काम करना शुरू की. मैंने चाची 420 में भी काम किया है. तब मैं करीब चार साल की थी.

-दंगल और ठग्स ऑफ हिंदुस्तान फिल्म में कैसा अनुभव रहा

दंगल मेरी पहली फिल्म रही. इसलिए बहुत ज्यादा खुश थी. मुझे दंगल के कारण ही इस इंडस्ट्री में आने का मौका मिला. मुझे इतने बड़े कलाकार के साथ काम करने का मौका मिला, इसलिए दंगल के साथ कई सारे नये अनुभव हैं. ठग्स ऑफ हिंदुस्तान भी हमारे लिए बहुत अहम फिल्म है. दोनों फिल्मों में काम करके बहुत कुछ सिखा है. सबसे खास बात यह है कि दोनों फिल्मों में मुझे अनुभवी लोगों के साथ जुड़ने का मौका मिला. 

-शुरुआत फिल्मों से हुई कभी टीवी में काम करने का अनुभव
सच मानें, तो मुझे टीवी में काम करना बिल्कुल भी पसंद नहीं है. क्योंकि, मैं एक तरह का किरदार लगातार नहीं कर सकती. टीवी सीरियल में एक ही पात्र को लंबे एपीसोड तक निभाना होता है. मैं हमेशा अलग-अलग पात्रों में काम करना चाहती हूं. हमेशा नया काम करना चाहती हूं. सभी तरह का किरदार निभाना चाहती हूं. इसलिए मुझे फिल्मोें में काम करना ही पसंद हैं.

-बॉलीवुड में नयी पहचान बनाने के लिए कितनी परेशानी हुई

एक लड़की को थोड़ी परेशानी होती है. खास कर जिन्हें कोई इस इंडस्ट्री में पहचानता नहीं है. मुंबई में फास्ट लाइफ है. ऐसे में मैंने रिक्शा, ऑटो से कई सफर करने का बाद ऑडिशन में सफल हुई. हालांकि, मुझे कभी गलत लोगों का सामना नहीं हुआ. मैं इससे पहले फोटोग्राफी भी करती थी. कई शादियों में फोटोग्राफी भी की हूं. अब फिल्मों में काम कर रही हूं. आगे भी अच्छे काम मिलेंगे, तो जरूर करूंगी.  

-नये लोगों का क्या टिप्स देना चाहती हैं
अपनी पहचान खुद बनानी होती है. टैलेंट होना जरूरी है. क्योंकि, कोई भी काम दिला सकता है,लेकिन उस काम को सही तरीके से खुद से करना होता है. इसलिए खुद को परखे और बुलंद हौसला के साथ आगे बढ़े. कई बार परेशानियां मिलती है, लेकिन परेशानियों से डरना नहीं चाहिए. 

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