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begusarai

  • Sep 12 2019 5:08AM
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एक साथ दो बहनों की उठी अर्थी, गमगीन हुआ माहौल

 भगवानपुर :  भगवानपुर थाना क्षेत्र के बगरस निवासी श्याम बिहारी महतो की 20 वर्षीय पुत्री चांदनी और 22 वर्षीय पुत्री मौसम की मौत के बाद इलाके में मातमी सन्नाटा पसर गया है. क्षेत्र के लोगों को यह पता नहीं था कि बुधवार का दिन इस गांव के लिए अशुभ साबित होगा और एक साथ दो युवतियों की शवयात्रा निकलेगी. 

 
प्रतिदिन की तरह दलसिंहसराय जाने के लिए घर से निकली थीं दोनों बहनें  :प्रतिदिन की तरह दोनों बहनें एक साथ अपने घर से दलसिंहसराय पढ़ने जा रही थी. इसी क्रम में तेघड़ा से दलसिंहसराय के लिए रांची जयनगर एक्सप्रेस पर चढ़ गयी. 
 
जब दलसिंहसराय ट्रेन पहुंची तो दोनों बहन ट्रेन से उतरने का प्रयास की लेकिन ट्रेन नहीं रूक पायी. जब ट्रेन नहीं रुकी तब मौसम एवं चांदनी दोनों ट्रेन से कूद गयी.जिसमें दोनों बहनें गंभीर रूप से घायल हो गयी. बाद में इलाज के दौरान दोनों बहनों ने दम तोड़ दिया. 
 
सहेली की बच गयी जान :मौसम व चांदनी की लापरवाही की वजह से ही उसे अपनी जान से हाथ धोना पड़ा. बताया जाता है कि इसी दोनों बहनों के साथ गांव के ही संजय महतो की पुत्री आरती कुमारी भी पढ़ने गयी थी.आरती गाड़ी की रफ्तार देख ट्रेन से नहीं उतरी.वह समस्तीपुर स्टेशन जाकर  ट्रेन से उतर गयी. उसे घर वालों ने समस्तीपुर स्टेशन से घर लाया. 
 
दोनों बहनों की मौत के बाद परिजनों में मचा कोहराम : ट्रेन से कटकर  मौसम एवं चांदनी की मौत की खबर पाकर भगराज गांव में मातम छा गया एवं परिजनों का रो-रो कर बुरा हाल हो गया है. एक साथ गांव से दो सगी बहनों की अरथी निकलते ही सैकड़ों लोगों के आंखों से आंसू छलक पड़े. 
 
बेसुध पड़ी है मां :आब केना जीबै हो बाबू दोनों हमर बेटी काल के गाल में समाई गेलै हमरा लोग फोटो खिंचे छै बेटी के बियाह करितयै ते केतना फोेटो खीचेतै रे.यह वेदना  उस मां की है जो अपनी दो जवान बेटी को खो दी.   मृत छात्रा की माता सोनाकली देवी दहाड़ मार कर कर रही थी. मां अपने पास से दोनों बेटियों की अर्थी उठते देख फफक कर रोने लगती थी. इस दौरान बराबर बेहोश हो जा रही थी. 
 
मौसम और चांदनी के नहीं रहने के बाद अब उस घर में इकलौता भाई पंकज बच गया है. अपनी दोनों बहनों को सदा के लिए अलग होने से भाई भी अपने आंसुओं को रोक नहीं पा रहा था. परिवार के साथ-साथ पूरे इलाके में इस दर्दनाक घटना ने लोगों को स्तब्ध कर दिया है. घटना के बाद सैकड़ों लोग मातमपुरसी के लिए पीड़ित के घर पहुंचते रहे.
 
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