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  • Dec 11 2019 1:31PM
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पिंडी बॉयज़ का ग्राउंड जिसके प्रशंसकों में क्लाइव लॉयड भी थे

पिंडी बॉयज़ का ग्राउंड जिसके प्रशंसकों में क्लाइव लॉयड भी थे

रावलपिंडी क्रिकेट स्टेडियम, PAKvsSL

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साल 1997 में, वेस्टइंडीज के दिग्गज़ बल्लेबाज़ और पूर्व कप्तान क्लाइव लॉयड ने रावलपिंडी की पिच को देखकर कहा था कि उनके अनुभव के अनुसार ये दुनिया की बेहतरीन टेस्ट पिचों में से एक है.

उस वर्ष तीन दिसंबर के दिन लॉयड इस पिच को देख कर अपने सिर को हिलाते हुए कह रहे थे, वेरी बैड. तब पाकिस्तान, वेस्टइंडीज को यह टेस्ट एक पारी और 29 रनों से अंतर से हरा चुका था. साथ ही खड़े पिच क्यूरेटर मोहम्मद अशरफ़ घबरा कर उनकी तरफ़ देखते हुए पूछते हैं कि आप मेरी पिच को बुरा क्यों कह रहे हैं?

लॉयड मुस्कुराए और कहने लगे कि मैं आपकी पिच को नहीं अपनी टीम को बुरा कह रहा हूँ जो इतनी अच्छी विकेट का फायदा नहीं उठा सकी.

इसके बाद पत्रकारों से बात करते हुए लॉयड ने कहा कि मेरे अनुभव के अनुसार ये दुनिया की बेहतरीन टेस्ट पिचों में से एक है.

लेकिन अफ़सोस कि अब तक ये पिच सिर्फ़ आठ टेस्ट और 21 वनडे मैचों की ही मेज़बानी कर सकी है.

लेकिन ये सिलसिला इस माह की 11 तारीख़ को टूटने वाला है जब 15 साल बाद इस मैदान पर और एक दशक के बाद पाकिस्तान में टेस्ट क्रिकेट की वापसी होगी. यहां श्रीलंका के साथ टेस्ट मैच होने जा रहा है.

इस सम्बन्ध में हमने दो ऐसे पत्रकारों से बात की जिन्होंने पिंडी स्टेडियम में सारे अंतरराष्ट्रीय मैच देखे और साथ ही रावलपिंडी के दो खिलाड़ियों सुहैल तनवीर और मुहम्मद वसीम से भी बात की और उनसे इस ग्राउंड से जुडी यादों के बारे में पूछा.

क्रिकेट
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पिंडी बॉयज़ का ग्राउंड

जोजी के नाम से जाने जाने वाले पत्रकार रिज़वान अली ने अपने साथी अब्दुल मुही शाह की तरह इस ग्राउंड पर खेले जाने वाले सभी मैचों की कवरेज की है.

वो कहते हैं कि इस ग्राउंड पर पिंडी बॉयज़ ने बहुत आतंक मचाई है. ग्राउंड से बाहर भी और मैदान में भी.

क्रिकेट
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वो याद करते हैं की यहाँ खेले जाने वाले एक मैच के दौरान लोग चादरों और कंबलों के ज़रिये स्टेडियम में दाखिल होने की कोशिश करते रहे जिस पर बहुत से लोगों पर लाठियां भी बरसाई गई और आंसू गैस का इस्तेमाल भी किया गया.

दूसरी तरफ पत्रकार अब्दुल मुही शाह रावलपिंडी के लोगों की क्रिकेट से मुहब्बत के फैन हैं.

कहते हैं कि रावलपिंडी में क्रिकेट की वापसी ऐसे है जैसे सूखे के बाद बारिश आगई हो. मुझे यक़ीन है कि रावलपिंडी के लोग यहाँ भारी संख्या में मैच देखने आएँगे.

खिलाड़ियों की बात करें तो पाकिस्तान की तरफ से खेलने वाले सबसे मशहूर पिंडी बॉय और रावलपिंडी एक्सप्रेस का नाम पाने वाले शोएब अख़्तर के मशहूर होने की वजह भी यही स्टेडियम है.

1994 में उन्होंने यहाँ न्यूज़ीलैंड की अंडर 19 टीम को चारो खाने चित करते हुए आठ विकेट हासिल किए थे.

पत्रकार मुही शाह याद करते हैं कि वो उस सुबह एक घंटे की देरी से स्टेडियम पहुंचे थे और तब तक शोएब आधी किवी टीम को आउट कर चुके थे. शायद इमरान ख़ान को शोएब के बारे में पहले पता होता तो वो उसे 1992 के वर्ल्ड कप में ले जाते.

डेमियन फ्लेमिंग
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डेमियन फ्लेमिंग

डेब्यू करने वालों के लिए उपयुक्त ग्राउंड

इस ग्राउंड की ख़ास बात शायद इसका डेब्यू करने वाले खिलाड़ियों पर मेहरबान होना है.

1994 में इस ग्राउंड पर ऑस्ट्रेलिया के तेज़ गेंदबाज़ डेमियन फ्लेमिंग अपना पहला टेस्ट मैच खेल रहे थे. उन्होंने उस टेस्ट की दूसरी पारी में ही हैट्रिक कर डाली. आमिर मालिक, इंज़माम उल हक़ और 278 रन बनाने वाले सलीम मलिक उनका शिकार बने.

इसी तरह तेज़ गेंदबाज़ मोहम्मद ज़ाहिद इस मैदान पर 10 विकेट लेने वाले एकमात्र गेंदबाज़ हैं और उन्होंने भी ये उपलब्धि अपने डेब्यू पर ही हासिल की थी.

पिंडी से ही सम्बन्ध रखने वाले इज़हार महमूद ने 1997 में इसी ग्राउंड से डेब्यू किया और उस मैच में शतक लगाया. इसी मैच में एक और डेब्यू हुआ अली नक़वी का और उनका पहला मैच भी उनके लिए शतक की सूरत में यादगार बन गया. सियालकोट के ख़िलाफ़ पिंडी में शतक यादगार था.

क्रिकेट
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2007 में अपने करियर की शुरुआत करने वाले ऑल राउंडर सुहैल तनवीर को पाकिस्तान में तो क्रिकेट खेलने का मौका मिला लेकिन वो अब तक अपने पैतृक शहर में कोई अंतरराष्ट्रीय मैच नहीं खेल सके.

बीबीसी को उन्होंने बताया कि टेस्ट क्रिकेट वापस आने की खुशी तो है ही लेकिन यह मैच मेरे पैतृक शहर में हो रहा है तो इस से बेहतर कुछ नहीं हो सकता.

दो टेस्ट 62 वनडे और 57 टी20 अंतरराष्ट्रीय मुक़ाबलों में पाकिस्तान का प्रतिनिधित्व करने वाले सुहैल तनवीर रावलपिंडी स्टेडियम में अपनी सफलताओं के बारे में बताते हुए गेंदबाज़ी की बजाये बैटिंग के कारनामों को याद करते हैं.

घास वाली पिच पर नंबर आठ पर आकर सियालकोट के ख़िलाफ़ शतक लगाना यादगार था. वो कहते हैं कि गेंदबाज़ी में तो उनका यहाँ प्रदर्शन सही है, लेकिन ये शतक यादगार है.

रावलपिंडी पिच के बारे में सुहैल तनवीर का कहना था कि रावलपिंडी में स्पिनर और तेज़ गेंदबाज़ को मदद देने वाली पिचें होती हैं, ख़ास कर सर्दी के मौसम में यहां तेज़ गेंदबाज़ों को कामयाबी मिलती है.

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बॉल पिकर से पाकिस्तानी टेस्ट क्रिकेटर तक

18 टेस्ट और 25 वनडे अंतरराष्ट्रीय में पाकिस्तान का प्रतिनिधित्व करने वाले ओपनर वसीम का सम्बन्ध भी रावलपिंडी से है. वो कहते हैं कि उन्हें पता है कि रावलपिंडी के लोगों के लिए क्रिकेट की वापसी कितनी अहम है.

रावलपिंडी स्टेडियम से जुडी यादों के हवाले से बात करते हुए मोहम्मद वसीम ने कहा कि एक समय था जब मैं हसरत भरी निगाहों से इस ग्राउंड को देखता था. फिर ऑस्ट्रेलिया की 1994 की सिरीज़ के दौरान मैं बाल पिकर बना और फिर यहीं से मेरे सफ़र की शुरुआत हुई.

मोहम्मद वसीम, जो अब एक सेलेक्टर भी हैं, कहते हैं कि टेस्ट क्रिकेट की पाकिस्तान में वापसी खासतौर पर उन खिलाड़ियों के लिए बहुत ख़ास है जिन्होंने पकिस्तान में क्रिकेट नहीं खेली.

Arjuna Ranatunga, अर्जुन राणातुंगा
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अर्जुन राणातुंगा

मलिक की वो पारी, द्रविड़ के 270 और राणातुंगा का ज़ख़्मी हाथ

कहने को रावलपिंडी क्रिकेट स्टेडियम का इतिहास छोटा है लेकिन यहाँ कई दिलचस्प मैंच खेले गए और बैटिंग-बॉलिंग में बेहतरीन कारनामे और खुशगवार लम्हें आए हैं.

1997 में दक्षिण अफ्रीका के ख़िलाफ़ एक मैच के दौरान ब्रिटेन की महारानी एलिज़ाबेथ आईं और दोनों टीमों से मिलीं.

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यहाँ खेले गए दूसरे टेस्ट मैच में एक बार ऑस्ट्रेलिया ने पाकिस्तान की टीम को फॉलो ऑन दिया लेकिन सलीम मलिक की बेहतरीन 237 रनों की पारी की बदौलत पाकिस्तान मैच ड्रॉ कराने में कामयाब हो गया.

इसी तरह इस मैदान में आखरी मैच भारत और पाकिस्तान के बीच 2004 में खेला गया जिसमें पाकिस्तान को पारी की हार का सामना करना पड़ा. मैच का मुख्य आकर्षण भारतीय बल्लेबाज राहुल द्रविड़ की 270 रनों की शानदार पारी थी.

यहाँ सबसे दिलचस्प मैच पाकिस्तान और श्रीलंका के बीच 2000 में खेला गया. तब मैच की दूसरी पारी के दौरान श्रीलंकाई कप्तान अर्जुन राणातुंगा वक़ार यूनुस की बॉलिंग से ज़ख़्मी होकर पैवेलियन लौटे थे. लेकिन मैच के अंत में ऐसा वक़्त आया कि पाकिस्तान ने श्रीलंका के आठ खिलाड़ी आउट कर दिए तो फिर राणातुंगा को अपने ज़ख़्मी हाथों के साथ ही पिच पर आए अहम किरदार निभाते हुए श्रीलंका को जीत दिला दी.

पिंडी क्रिकेट स्टेडियम का इतिहास

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यह इससे पहले एक क़्लब ग्राउंड था. 1992 की शुरुआत में इसे टेस्ट मैच ग्राउंड का दर्जा दिया गया. ये पकिस्तान का 14वां टेस्ट ग्राउंड है.

अब्दुल मुही शाह याद करते हैं कि ये एक तालाब की तरह का मैदान हुआ करता था जिस पर घास का नामोनिशान भी नहीं था. लेकिन 1996 के वर्ल्ड कप को नज़र में रखते हुए इस स्टेडियम के निर्माण की शुरुआत की गई.

पहली बार इस पर अंतरराष्ट्रीय मैच के रूप में एक वनडे खेला गया. वह मैच भी इत्तेफ़ाक से पाकिस्तान और श्रीलंका के बीच ही खेला गया था. पाकिस्तान ने इस मैच में 117 रनों से जीत हांसिल की थी.

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लेकिन ग्राउंड सिर्फ आठ टेस्ट मैंचों की ही मेज़बानी कर सका है जिनमें पाकिस्तान को तीन में कामयाबी और इतने ही मुक़ाबलों में नाकामी का सामना करना पड़ा है, अन्य दो मैच बेनतीजा रहे.

यहां खेला गया पहला टेस्ट भी यादगार है. तब पांचदिनी टेस्ट मैच के दौरान एक दिन आराम का रखा जाता था और ये वो मैच था जिसमें पाकिस्तान की धरती पर आखिरी बार टेस्ट मैच मुक़ाबले में (रविवार को) आराम का दिन रखा गया था.

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