Advertisement

bbc news

  • Dec 2 2019 10:49PM
Advertisement

हैदराबाद: क्या हम बलात्कारी मर्द बनकर ख़ुश हैं?: नज़रिया

हैदराबाद: क्या हम बलात्कारी मर्द बनकर ख़ुश हैं?: नज़रिया
प्रतीकात्मक तस्वीर
iStock

सवाल एक है और सालों से घूम रहा है. हर बार जब बलात्‍कार की कोई घटना सुर्ख़‍ियों में आती है तो यह सवाल घूमने लगता है.

दिक्‍कत यह है कि इसका जवाब एक नहीं है. हम सभी, सब जवाब पर एकमत नहीं हैं. कुछ जवाब मर्दाना समाज की तरफ़ से हैं. कुछ जवाब स्‍त्र‍ियों की ओर से हैं. कुछ जवाब बहुत ज़्यादा व्‍यापक और गंभीर सवाल खड़े करते हैं. हम भी कोशिश करते हैं. मुकम्‍मल जवाब का दावा नहीं, कोशिश ही है.

किसी की इच्‍छा के ख़िलाफ़ किया गया काम बलात्‍कार है. किसी पर अपनी ख्‍़वाहिश को जबरन थोपना बलात्‍कार है. यक़ीनन यह क़ानूनी परिभाषा नहीं है. उस पर चर्चा फिर कभी. हम अभी कुछ मोटा-मोटी बात करते हैं.

सवाल यही है कि मर्द बलात्‍कार क्‍यों करते हैं?

हम मर्द बलात्‍कार करते हैं क्‍योंकि हम 'अपनी' यौन इच्‍छा पूरी करना चाहते हैं. इसमें दूसरे की इच्‍छा की कोई जगह नहीं है. हम मर्द बलात्‍कार करते हैं क्‍योंकि हम अपनी तनाव भरी उत्‍तेजना को किसी और की इच्‍छा और रज़ामंदी के बग़ैर शांत करना चाहते हैं.

हम मर्द बलात्‍कार करते हैं क्‍योंकि हम अपनी क्षणिक उत्‍तेजना को शांत करने के लिए एक जगह तलाशते हैं. स्‍त्री शरीर में हमें वह जगह दिखाई देती है. मगर कई बार यह जगह हमें छोटे बच्‍चे-बच्‍च‍ियों और जानवरों में भी साफ़ नज़र आती है.

हम मर्द बलात्‍कार करते हैं क्‍योंकि हम स्‍त्री देह को काबू में करना चाहते हैं. हम मर्द बलात्‍कार करते हैं, क्‍योंकि हम स्‍त्री देह को अपनी निजी जायदाद मानते हैं.

प्रतीकात्मक तस्वीर
Getty Images

हम मर्द बलात्‍कार करते हैं, क्‍योंकि हम बदला लेना चाहते हैं. हम मर्द बलात्‍कार करते हैं क्‍योंकि हम अपने से अलग जाति या धर्म के मर्दों को सबक सिखाना और नीचा दिखाना चाहते हैं.

हम मर्द बलात्‍कार करते हैं क्‍योंकि हम अपने से अलग जाति या धर्म या समुदाय की 'इज्‍़ज़त' को मटियामेट करना चाहते हैं.

हम मर्द बलात्‍कार करते हैं और बलात्‍कार के लिए रिश्‍ते बनाते हैं. रिश्‍तों को सुंदर-सा नाम देते हैं. फिर बलात्‍कार का हक़ हासिल करते हैं. फिर हक़ के साथ बलात्‍कार करते हैं.

हम मर्द हैं और इसलिए अक्सर हम मजबूर और कमजोर को तलाशते हैं. चॉकलेट पर फुसल जाने वाले की खोज में रहते हैं. हम मर्द हैं और हमारी नीयत में बलात्‍कार है.

हम मर्द हैं. चालाक हैं. रंग बदलने में बहुत माहिर हैं. इसलिए बलात्‍कार करते हैं और बलात्‍कारी भी नहीं कहलाते. रिश्‍ते में हक से बलात्‍कार करते हैं.

सरेआम बलात्‍कार करते हैं और धर्म के रक्षक कहलाते हैं. हम बंदूक की ज़ोर पर बलात्‍कार करते हैं और 'अपनी' श्रेष्‍ठ जाति के श्रेष्‍ठ योद्धा बन जाते हैं. हम जिनके साये से भी कोसों दूर रहना चाहते हैं, उनकी देह की ख़ूश्‍बू के लिए हर ज़ोर आज़ामइश करते हैं. हम बलात्‍कार करते हैं. हम मर्द हैं.

कार्टून
BBC

बलात्‍कार, हिंसा है. इसमें तो कोई शक नहीं है?

हम मर्द बलात्‍कारी हैं क्‍योंकि हमें हिंसा में यक़ीन है इसलिए हम अहिंसा को नार्मदगी मानते हैं. अहिंसा की बात करने वाले मर्दों को हम नामर्द, नपुंसक, डरपोक, कायर कहकर उनकी खिल्‍ली उड़ाते हैं.

हम बलात्‍कारी मर्द हैं और हम चढ़ाई को और चढ़ कर मारने को 'मर्दानगी' की पहचान मानते हैं. सदियों से दूसरे मोहल्‍लों पर चढ़ते रहे हैं, दूसरे राज्‍यों पर चढ़ते रहे हैं, दूसरे देशों पर चढ़ाई करते रहे हैं इसलिए आज भी चढ़ाई को ही 'असली मर्दानगी' की निशानी मानते हैं और चढ़ाई तो मर्ज़ी के खिलाफ़ होती है. यही तो बलात्‍कार है.

हम मर्द हैं और बलात्‍कार करते हैं और बलात्‍कार के लिए हमारा दिमाग़ कम्‍प्‍यूटर से भी तेज़ चलता है. हम 'इनोवेशन' करते हैं.

प्रतीकात्मक तस्वीर
iStock

वैसे, हम कहीं भी बलात्‍कार कर सकते हैं. घर में, बिस्‍तर पर. बस में. ट्रेन पर. स्‍कूल-कॉलेज- यूनिवर्सिटी के नुक्‍कड़ पर. बाज़ार में. मॉल में. खेतों में. आलीशान ऑफि़सों के अंदर.

हमारे बलात्‍कार का साम्राज्‍य कोई छोटा-मोटा नहीं है. यह हमारा 'मर्दाना साम्राज्‍य' है. हम इस साम्राज्‍य में अपनी ख्‍़वाहिश के ख़िलाफ़ कुछ नहीं करने देना चाहते. हमें बर्दाश्‍त नहीं है कि कोई हमें ना कहे. कोई हमारी ख्‍़वाहिश टाले. हमारे खिलाफ़ कोई काम करे. हमारे विचार से अलग कोई कुछ भी करे. सोचे नहीं, बोले नहीं, करे नहीं, लिखे नहीं, पढ़े नहीं, आये-जाये नहीं, उठे-बैठे नहीं, दोस्‍ती नहीं करे, खाये-पिये नहीं, पहने-ओढ़े नहीं.

हमें बर्दाश्‍त नहीं है. हम यह सब सिर्फ स्‍त्री के साथ नहीं करते. हम मर्द हैं. हम सबके साथ करते हैं. घर से बाहर तक हमारा साम्राज्‍य है. मर्दाना साम्राज्‍य. इस तरह हम हर जगह बलात्‍कार कर सकते हैं. करते हैं. जीवन का कोई ऐसा हिस्सा नहीं, जो हमारी बलात्‍कारी दृष्टि से बच जाए.

हम मर्द हैं और बलात्‍कार करते हैं लेकिन इससे पहले ही हम इसे जायज़ ठहराने का ज़बरदस्‍त उपाय कर लेते हैं. यक़ीन नहीं आ रहा है तो सुनिए. हम बलात्‍कार करते हैं और ख़म ठोककर कहते हैं- लड़की रात के अँधेरे में क्‍या कर रही थी? वह इतनी रात में क्‍यों बाहर जा रही थी? वह 'उस' लड़के के साथ क्‍या कर रही थी? उसने छोटे कपड़े क्‍यों पहन रखे थे? उसने शराब क्‍यों पी थी? वह सिगरेट क्‍यों पी रही थी?

प्रतीकात्मक तस्वीर
Getty Images

उसने अपनी मर्जी से अपना साथी कैसे चुना? उसने मेरे धर्म के बारे में क्‍यों बोला? उसकी हिम्‍मत कैसे हुई कि वह मेरी जाति के सामने खड़ी हो सके?

अब होश ठिकाने आ जायेगा क्‍योंकि वह फलाँ धर्म की थी. वह फलाँ जाति की थी. वह फलाँ समुदाय की थी, इलाक़े की थी, अब ये किसी को मुँह दिखाने के काबिल नहीं रहेगी. और वह मेरी ब्‍याहता है. वह मेरी पत्‍नी है, क़ानून और समाज इसके गवाह हैं. तो मैं बलात्‍कार करता हूँ लेकिन वह बलात्‍कार नहीं कहलाता.

मुमकिन है, मर्दों के झुंड में इन बातों से आक्रोश पैदा हो. नाराज़गी हो. मुमकिन है, ग़ुस्‍से में कई फिर बलात्‍कार करने लगें. बोल से भी तो बलात्‍कार हो सकता है. मगर इस बार बलात्‍कार से पहले सोचें.

विरोध प्रदर्शन में पोस्टर
Getty Images

ज़ाहिर है, दो राय नहीं है, सभी मर्द बलात्‍कारी नहीं होते हैं. लेकिन यह भी सच है कि सभी मर्द एक जैसे बलात्‍कारी नहीं होते हैं. कई क़ानून के मुताबिक बलात्‍कारी के दायरे में भी नहीं आते हैं. लेकिन ज्‍यादातर मर्द ही बलात्‍कारी क्यों होते हैं, इस पर विचार करना जरूरी है.

बलात्‍कार भी विचार है. स्‍त्री देह पर हमले से पहले उस विचार की ठोस बुनियाद तैयार की जाती है. बुनियाद के लिए मिट्टी-गारा-बालू-सिमेंट-पानी हम मर्द देते हैं.

तो सोचिए न, देश-समाज में हर जगह 'मर्दाना बलात्‍कार' होता रहे और स्‍त्री उससे बची रहे, क्‍या यह मुमकिन है?

स्‍त्री की ज़िंदगी से बलात्‍कार हटाने के लिए/ स्‍त्री जीवन को हिंसा मुक्‍त बनाने के लिए और सबसे बढ़कर बेहतर समाज बनाने के लिए 'मर्दाना बलात्‍कार' के निशान हर जगह से मिटाने होंगे.

दबंग मर्दाना सोच को ज़मींदोज़ करना होगा. दबंग मर्दाना सोच के साथ जुड़ी हर तारीफ़, हर सम्‍मान, श्रेष्‍ठता के हर पायदान को ज़मींदोज़ करना होगा.

तो बोलिये मर्दाना लोग इसके लिए तैयार हैं या हम 'बलात्‍कारी मर्दाना' बनकर ख़ुश हैं?

(आलेख में लेखक के निजी विचार हैं)

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

]]>
Advertisement

Comments

Advertisement
Advertisement