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bbc news

  • Nov 19 2019 10:21PM
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अमरीका ने कहा कि वेस्ट बैंक में इसराइली बस्तियां अब अवैध नहीं

अमरीका ने कहा कि वेस्ट बैंक में इसराइली बस्तियां अब अवैध नहीं
नेवे याकूव बस्ती, पूर्वी येरूसलम
AFP
इसराइल ने पूर्वी येरूसलम समेत वेस्ट बैंक में 100 से अधिक यहूदी बस्तियां बनाई हैं

अमरीका ने कब्ज़े वाले वेस्ट बैंक पर चार दशक पुरानी अपनी विदेश नीति में बदलाव किया है.

अंतरराष्ट्रीय क़ानून के मुताबिक़ वेस्ट बैंक में इसराइल की ओर से की गई बसावट अवैध है लेकिन इसराइल ऐसा नहीं मानता और अब अमरीका ने भी इस पर अपनी मुहर लगा दी है.

अमरीका की इस नई नीति को इसराइल के पक्ष में उठाया गया बड़ा क़दम माना जा रहा है.

अमरीकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने कब्ज़े वाले वेस्ट बैंक में बस्तियां बसाने को अंतरराष्ट्रीय क़ानून का उल्लंघन नहीं बताया है.

पोम्पियो ने कहा कि वेस्ट बैंक पर अमरीकी स्थिति इसराइल और फ़लीस्तीनी प्रशासन के बीच बातचीत को लेकर थी.

ओबामा प्रशासन के फ़ैसले को पलटने के इस अमरीकी क़दम का इसराइल ने स्वागत किया है.

दरअसल इसराइल कब्ज़े वाले वेस्ट बैंक में लगातार यहूदी बस्तियों को बसाता जा रहा है.

1967 में हुए मध्य पूर्व युद्ध के बाद इसराइल ने मिस्र से गज़ा पट्टी और सिनाई, सीरिया से गोलन पहाड़ियों और जॉर्डन से वेस्ट बैंक और पूर्वी येरूशलम के इलाके छीन लिए थे.

तब से वेस्ट बैंक इसराइल, अंतरराष्ट्रीय समुदाय और फ़लस्तीनियों के बीच विवादित बना हुआ है.

माइक पोम्पियो
Getty Images
माइक पोम्पियो

माइक पोम्पियो ने रिपोटर्स से कहा, "क़ानूनी जिरह के सभी पक्षों को सावधानीपूर्वक पढ़ने के बाद अमरीका इस नतीजे पर पहुंचा कि वेस्ट बैंक में इसराइली बस्तियों को बसाना अंतरराष्ट्रीय क़ानून के ख़िलाफ़ नहीं है."

उन्होंने कहा, "बस्तियों को अंतरराष्ट्रीय क़ानून के ख़िलाफ़ बताना सही नहीं है. इससे शांति प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ रही."

फ़लिस्तीन वार्ताकार सायेब इरेकता ने अमरीका के इस फ़ैसले को 'अंतरराष्ट्रीय अस्थिरता, सुरक्षा और शांति' के लिए ख़तरा बताया और कहा कि इससे अंतरराष्ट्रीय क़ानून के 'जंगल का क़ानून' बन जाने का संकट है.

इसराइली प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू ने कहा कि अमरीका का यह नीतिगत बदलाव 'ऐतिहासिक ग़लती का सुधार' है, साथ ही उन्होंने दूसरे देशों से भी ऐसा करने की उम्मीद जताई.

यहूदी बस्ती
BBC

यहूदी बस्तियों का विवाद क्या है?

यहूदी बस्तियों का मामला इसराइल और फलस्तीन के बीच लंबे वक्त से चला आ रहा विवाद है.

वेस्ट बैंक और पूर्वी येरूशलम पर कब्ज़े के बाद इसराइल ने यहां 140 बस्तियां बसाई, जिसमें छह लाख से अधिक यहूदी रहते हैं.

अंतरराष्ट्रीय क़ानून में इन बस्तियों को अवैध समझा जाता है, वहीं इसराइल हमेशा इसका विरोध करता रहा है.

दूसरी तरफ फ़लस्तीन इन सभी बस्तियों को हटाए जाने की मांग करता रहा है.

पोम्पियो ने कहा कि अमरीकी फ़ैसले में इस पूरे विवाद को सुलझाने में अहम भूमिका निभाने की संभावना है.

लेकिन अब यह समझौता इसराइली शर्तों पर किए जाने की संभावना है क्योंकि अमरीका के ताज़ा फ़ैसले के बाद अब इसराइल अधिक मजबूत पक्ष बन गया है.

साथ ही इससे अब नई यहूदी बस्तियों को बसाने को भी बढ़ावा मिलेगा. जब से अमरीका में ट्रंप प्रशासन सत्ता में आया है तब से बस्तियों की योजना बनाने और बसाने के मामलों में वृद्धि हुई है.

वहीं अमरीका के इस फ़ैसले से फ़लस्तीन में निराशा है. फ़लस्तीन विश्लेषक कहते हैं कि यहूदी बस्तियों के इस तरह बढ़ते जाने से दरअसल इस समस्या के 'टू नेशन' हल की संभावना को ही ख़त्म कर दिया है.

यहूदी बस्ती
Getty Images

पलटने से पहले अब तक क्या थी अमरीकी स्थिति?

1978 में जिमी कार्टर प्रशासन ने यह निष्कर्ष निकाला था कि यहां लोगों की बस्तियों को बसाना अंतरराष्ट्रीय क़ानून का उल्लंघन है.

1981 में राष्ट्रपति रोनल्ड रीगन ने बस्तियों को बुनियादी रूप से वैध मानने से इनकार कर दिया.

तब से अमरीका ने इन बस्तियों को अनुचित तो माना लेकिन अवैध मानने से इंकार कर दिया और इस मुद्दे पर संयुक्त राष्ट्र में इसराइल का बचाव करता रहा है.

हालांकि ओबामा प्रशासन ने अपने कार्यकाल के दौरान 2016 के अंत में इन अवैध बस्तियों को हटाए जाने के संयुक्त राष्ट्र प्रस्ताव पर वीटो नहीं किया.

राष्ट्रपति ट्रंप प्रशासन बस्तियों के मामले में ओबामा की तुलना में बहुत हद तक उदार रवैया अपनाया है.

पोम्पियो ने कहा कि ट्रंप प्रशासन सभी पक्षों पर विस्तार से अध्ययन के बाद इस बहस पर रीगन से सहमति जताता है.

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