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  • Oct 23 2019 7:24AM
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सीरिया पर रूस और तुर्की में 'ऐतिहासिक समझौता'

सीरिया पर रूस और तुर्की में 'ऐतिहासिक समझौता'

अर्दोआन और पुतिन

Reuters

तुर्की और रूस के बीच मैराथन बैठक के दौरान उत्तरी सीरिया में कुर्दों के ख़िलाफ सैन्य कार्रवाई को लेकर सहमति बनी है. दोनों देशों ने इसे 'ऐतिहासिक समझौता' बताया है.

ये समझौता रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और तुर्की के राष्ट्रपति रचेप तैय्यप अर्दोआन के बीच रूस के सोची में हुई बैठक के दौरान हुआ.

तुर्की सीरिया सीमा पर रुस और तुर्की दोनों के ही सैनिक तैनात हैं. अमरीका ने इस इलाके से अपने सैनिकों को वापस बुला लिया है.

तुर्की ने सीरिया के कुर्द मिलीशिया के ख़िलाफ़ आक्रामक अभियान चलाया हुआ है. तुर्की कुर्दों के एक हिस्से को 'आतंकवादी समूह' बताता है.

अब तुर्की और सीरिया मिलकर तुर्की सीरिया की सीमा की संयुक्त पेट्रोलिंग करेंगे. ये इस इलाक़े के बदलते शक्ति संतुलन को भी दिखाता है.

अमरीका ने बीते हफ़्ते कुर्द लड़ाकों और तुर्की की सेना के बीच संघर्ष विराम कराया था. इसकी समय सीमा पूरी होने के ठीक पहले ही रूस और तुर्की के बीच नया समझौता हुआ है.

कुर्द लड़ाकों का कहना है कि समझौते के तहत उन्होंने अपने लड़ाकों को हटाने का काम पूरा लिया है लेकिन तुर्की और रूस के बीच हुए समझौते ने लड़ाकों को हटाने की समय सीमा को बढ़ा दिया है.

उन्हें सीमा से 32 किलोमीटर की दूरी तक लड़ाकों को हटाने के लिए कहा गया है. इसे 'सेफ़ ज़ोन' यानी सुरक्षित क्षेत्र कहा जा रहा है और इस इलाक़े से लड़ाकों को हटाने के लिए 150 घंटे का वक़्त और दिया जा रहा है.

उत्तरी सीरिया के कुर्द बल में कुर्दिश पीपुल्स प्रोटेक्शन यूनिट्स (वाईपीजी) मिलीशिया का दबदबा है. तुर्की इसे अपनी सीमा पर मौजूद ख़तरे की तरह देखता है.

समझौते के तहत इस क्षेत्र का सैन्य नियंत्रण रूस और तुर्की के बीच प्रभावी तरीके से बांटा गया है. ताकि अमरीका के अचानक अपने सैनिकों को वापस बुलाने से खाली हुई भूमिका की भरपाई हो सके.

रूस की भूमिका

अमरीकी सैनिकों की वापसी के बाद तुर्की के राष्ट्रपति रचेप तैय्यप अर्दोआन ने नौ अक्टूबर को सीमा पार आक्रामक अभियान की शुरुआत की. इस क्षेत्र में अमरीका इस्लामिक स्टेट समूह से लड़ रहे कुर्द लड़ाकों को समर्थन दे रहा था.

रूस सीरिया के राष्ट्रपति का सहयोगी है और उसने अपने सैनिकों को सीमा के करीब तैनात किया हुआ है ताकि सीरिया के क्षेत्र पर विदेशी शक्ति काबिज न हो सकें.

रुस के सैनिकों की तैनाती की वजह से रूस और तुर्की के बीच टकराव की आशंका रहती है. इस स्थिति को रुस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और तुर्की के राष्ट्रपति अर्दोआन दोनों ही टालना चाहते हैं.

इन दोनों नेताओं के बीच सोची में करीब छह घंटे तक बैठक चली और इस दौरान दोनों पक्षों के बीच समझौते पर सहमति बन गई.

रूस ने तुर्की को अभियान चलाने की सहमति दे दी. इससे दोनों देशों के बीच टकराव का ख़तरा ख़त्म हो गया.

तुर्की अपना अभियान रास अल एन से तेल अब्याद के बीच 120 किलोमीटर के इलाके में चला रहा है. लेकिन अर्दोआन कथित तौर पर सीमा के पूरे 440 किलोमीटर के इलाके को 'सेफ़ ज़ोन' तय करना चाहते थे.

रूस और तुर्की की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि कुर्द बलों को मनबिज और तेल रिफत शहरों से हटाया जाएगा.

कुर्द मिलीशिया ने अब तक ये संकेत नहीं दिया है कि क्या उन्हें ये मांग मंजूर है?

अमरीका की भूमिका

बीते चार सालों से अमरीका की अगुवाई वाला बहुदेशीय गठबंधन सीरिया में इस्लामिक स्टेट से लड़ने के लिए वाईपीजी पर भरोसा करता रहा है. तुर्की इसे आतंकवादी संगठन मानता है जिसके संपर्क तुर्की में संघर्ष कर रहे विद्रोही कुर्द समूह से हैं. अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के सीरिया की सीमा से सैनिकों को हटाने के फ़ैसले की अमरीकी सांसदों को कड़ी आलोचना की थी.

अमरीका के अनुरोध पर बीते हफ्ते तुर्की आक्रामक अभियान रोकने के लिए सहमत हो गया था.

अमरीका के उपराष्ट्रपति माइक पेंस ने गुरुवार को अर्दोआन को 120 घंटे के लिए आक्रामक अभियान रोकने के लिए मनाया था ताकि 'वाईपीजी के लड़ाकों को तुर्की के नियंत्रण वाले सेफ़ ज़ोन से निकाला जा सके.' वापीजी के लड़ाकों के पूरी तरह से हटने की स्थिति में अर्दोआन स्थाई संघर्ष विराम के लिए सहमत हो गए थे.

कितना नुकसान?

संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक बीते दो हफ़्तों के दौरान करीब 80 हज़ार बच्चों समेत एक लाख 76 हज़ार से ज़्यादा लोग उत्तर पूर्व सीरिया से विस्थापित हो चुके हैं. यहां करीब तीस लाख लोग रहते हैं.

ब्रिटेन स्थित निगरानी समूह सीरियन ऑब्ज़रवेट्री फॉर ह्यूमन राइट्स के मुताबिक संघर्ष में 120 आम लोगों की मौत हुई है. इसमें 259 कुर्द लड़ाके, 196 तुर्क समर्थित सीरियाई विद्रोहियों और सात तुर्की सैनिकों की मौत भी हुई है.

तुर्की के अधिकारियों का कहना है कि तुर्की के क्षेत्र में वाईवीजी के हमले में 20 आम लोगों की मौत भी हुई है.

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