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bbc news

  • Sep 20 2019 10:51PM
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पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर पर क़ब्ज़े का सपना कितना हक़ीक़त?

पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर पर क़ब्ज़े का सपना कितना हक़ीक़त?
एस. जयशंकर
Reuters

दुनिया के सबसे बड़े विवादों में से एक 'कश्मीर मुद्दा' अब और गहराता जा रहा है. इस सप्ताह की शुरुआत में भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा था कि एक दिन पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर भारत का भौगोलिक हिस्सा होगा.

भारत और पाकिस्तान दोनों ही कश्मीर पर अपना-अपना दावा करते हैं लेकिन दोनों के पास इसके कुछ हिस्से हैं जिन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 'भारत प्रशासित कश्मीर' और 'पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर' के रूप में जाना जाता है.

भारत प्रशासित कश्मीर का क्षेत्र 13 हज़ार स्क्वेयर किलोमीटर से अधिक का है जिसके 10 ज़िलों में 80 लाख से अधिक लोग रहते हैं. विदेश मंत्री जयशंकर ने इस विवादित क्षेत्र पर भारत की स्थिति को दोहराया है.

1994 में भारतीय संसद ने एक प्रस्ताव पास किया था जिसमें मांग की गई थी कि 'पाकिस्तान भारतीय राज्य जम्मू-कश्मीर के क्षेत्र को ख़ाली करे जिसका उसने अतिक्रमण कर लिया था.'

मगर बहुत से लोग चिंता जताते हैं कि अभी हो रही बयानबाज़ी के पीछे और भी कोई गंभीर बात हो सकती है जो नज़र नहीं आ रही है. क्योंकि अगस्त के बाद से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मंत्रिमंडल के तीन अहम सदस्यों, विदेश, रक्षा और गृह मंत्री ने दोहराया है कि पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर और अक्साई चीन जम्मू-कश्मीर का हिस्सा हैं.

कश्मीर में प्रदर्शन
EPA

भारत कोरी बयानबाज़ी नहीं कर रहा?

ये तीनों रक्षा मामलों की शक्तिशाली कैबिनेट कमेटी के सदस्य हैं, जो देश की राष्ट्रीय सुरक्षा पर अंतिम फ़ैसले लेती है. साथ ही भारत यह भी कह चुका है कि वह 'परमाणु हथियारों के पहले इस्तेमाल न करने की नीति' पर विचार कर सकता है.

ऐसे में ये सवाल उठना लाज़िमी है कि भारत प्रशासित कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के हफ़्तों बाद भारत क्या केवल इस मामले में कोरी बयानबाज़ी कर रहा है क्योंकि अगले सप्ताह संयुक्त राष्ट्र में भारत-पाकिस्तान इस मामले में आमने-सामने हो सकते हैं.

या भारत क्या वाक़ई बहुत गंभीर है पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर को अपने क़ब्ज़े में लेने के लिए?

अमरीका में पाकिस्तान के पूर्व राजदूत हुसैन हक़्क़ानी कहते हैं, "भारत और पाकिस्तान के नेता वे बातें कहते हैं जिनका मतलब राजनीतिक लाभ हासिल करना नहीं होता है."

हक़्क़ानी के अनुसार, "इसकी सबसे अधिक संभावना है कि भारतीय नेता ऐसे बयान इसलिए दे रहे हैं ताकि वह पाकिस्तान के जम्मू-कश्मीर में ख़राब मानवाधिकारों की बार-बार बात उठाने का मुक़ाबला कर सकें और वो एक नया मुद्दा उठा सकें.''

लेकिन हर कोई ऐसा नहीं सोचता.

कई लोगों का मानना है कि मोदी पाकिस्तान को लेकर एक मज़बूत नीति का पालन कर रहे हैं.

दो बार 'सर्जिकल स्ट्राइक'

भारत प्रशासित कश्मीर के पुलवामा में इसी साल फ़रवरी में हुए चरमपंथी हमले के लिए भारत ने पाकितान को ज़िम्मेदार ठहराया था और इसका जवाब देने के लिए कुछ ही दिनों बाद भारत ने पाकिस्तान के भीतर बालाकोट में चरमपंथियों के ख़िलाफ़ एयर स्ट्राइक की थी. पुलवामा हमले में 40 जवानों की मौत हुई थी.

ये हमले पहली बार नियंत्रण रेखा के पार पाकिस्तानी सीमा के अंदर किए गए थे.

दोनों देशों के बीच 1971 में हुए युद्ध के बाद से नियंत्रण रेखा को ही भारत और पाकिस्तान के बीच वास्तविक सीमा माना जाता है.

इससे पहले सितंबर 2016 में मोदी सुर्ख़ियों में आए थे जब उन्होंने इसी सीमा के पार मौजूद चरमपंथियों पर 'सर्जिकल स्ट्राइक' का आदेश दिया था. भारत का कहना था कि यह कार्रवाई भारतीय सैन्य ठिकाने पर हुए उस हमले के बदले में की गई थी जिसमें 18 भारतीय सैनिकों की मौत हुई थी.

'द हिंदू' अख़बार की डिप्लोमैटिक एडिटर सुहासिनी हैदर कहती हैं, "भारत जिसे 'पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर' कहता है, उसे लेकर भारत की ओर से आए बयानों को उन लोगों को गंभीरता से लेना चाहिए जो उपमहाद्वीप में बढ़ते विवाद का अध्ययन करते हैं."

दो परमाणु हथियार संपन्न प्रतिद्वंद्वी पहले ही कश्मीर को लेकर दो युद्ध लड़ चुके हैं और एक सीमित संघर्ष कर चुके हैं.

प्रदर्शन
EPA

सीमा पर झड़पों में हुई बढ़ोतरी

ब्रूकिंग्स इंस्टिट्यूशन के स्टीफ़न कोहन कहते हैं कि दोनों देशों के पास मिलाकर 250 से अधिक परमाणु हथियार हैं और इसी कारण दोनों के बीच अंदर ही अंदर संघर्ष चल रहा है और दोनों देश एक दूसरे की सहनशक्ति की परीक्षा कर रहे हैं.

मगर इस साल सीमा पर झड़पें बड़े स्तर पर बढ़ी हैं. 2003 में हुए युद्धविराम पर हाल के सालों में काफ़ी दबाव बढ़ा है.

भारत के गृह मंत्रालय का दावा है कि इस साल पाकिस्तान ने नियंत्रण रेखा पर 2000 से अधिक बार बिना उकसावे के सीज़फ़ायर का उल्लंघन किया और इनमें 21 भारतीयों की जान गई.

पाकिस्तान कहता है कि 2019 में भारतीय बलों की गोलीबारी में 45 लोगों की मौत हुई है जिनमें 14 सैनिक हैं.

सुरक्षाबल
Getty Images

भारत सैन्य विकल्प अपनाएगा?

दिल्ली की जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी में डिप्लोमेसी और डिसार्ममेंट के प्रोफ़ेसर हैपीमन जेकब कहते हैं कि सीमा पर युद्धविराम का उल्लंघन "राजनीतिक बयानबाज़ी, सैन्य प्रदर्शन और कूटनीतिक गतिरोध को बढ़ावा दे सकता है जिससे युद्धविराम के उल्लंघन में और तेज़ी आएगी और मामला और तूल पकड़ लेगा."

लेकिन अगर पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर पर नियंत्रण करना है तो भारत को सैन्य विकल्प ही अपनाना ही पड़ेगा. पाकिस्तान अपने से यूं ही इसे नहीं छोड़ेगा और न ही किसी बाहरी दबाव के कारण जो कि बहुत मामूली सा है.

'कश्मीर: द अनरिटन हिस्ट्री' किताब के लेखक क्रिस्टोफ़र स्नेडन ने मुझे बताया, "भारत की ऐसी ख़्वाहिश अति महत्वाकांक्षी और दीर्घकालिक होगी."

इस तरह की महत्वाकांक्षा न सिर्फ़ युद्ध की ओर ले जाएगी बल्कि ऐसा करने के लिए भारत को पाकिस्तान को उकसाना पड़ेगा ताकि पहला हमला वह करे और फिर भारत अपने जवाबी हमले को सही ठहरा सके.

तो क्या यह दो परमाणु हथियार संपन्न पड़ोसियों के बीच चिंताजनक वाकयुद्ध के अलावा और कुछ नहीं है?

दिल्ली स्थित रणनीतिक मामलों के जानकार अजय शुक्ला मानते हैं कि पकिस्तान प्रशासित कश्मीर को लेकर बात करने के लिए भारत की रणनीति में तीन चरण हैं.

वह कहते हैं, "पहला- कश्मीर घाटी की डरावनी हक़ीक़त से ध्यान बंटाओ जो कि एक महीने से ज़्यादा समय से लॉकडाउन में है. दूसरा- कश्मीर पर अंतरराष्ट्रीय नज़रिया को बदलते हुए पाकिस्तान को असंतुलित करो. तीसरा- भारतीय कश्मीरियों के मन में नाउम्मीदी का भाव पैदा करो और यह संदेश दो कि भारत के ख़िलाफ़ प्रतिरोध से कुछ नहीं होने वाला."

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