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bbc news

  • Sep 15 2019 1:45PM
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छत्तीसगढ़ में 24 घंटे में मारे गए छह संदिग्ध माओवादी

छत्तीसगढ़ में 24 घंटे में मारे गए छह संदिग्ध माओवादी

प्रतीकात्मक तस्वीर, माओवादी

CG KHABAR
प्रतीकात्मक तस्वीर

छत्तीसगढ़ में पुलिस ने 24 घंटों में मुठभेड़ की तीन अलग-अलग घटनाओं में छह संदिग्ध माओवादियों के मारे जाने का दावा किया है. ये मुठभेड़ माओवाद प्रभावित दंतेवाड़ा, सुकमा और बीजापुर ज़िले में हुईं.

कथित मुठभेड़ की ये घटनायें ऐसे समय में हुई हैं, जब इसी महीने की 23 तारीख़ को दंतेवाड़ा विधानसभा सीट के उपचुनाव के लिये मतदान होना है.

इस साल नौ अप्रैल को बस्तर इलाक़े से भाजपा के इकलौते विधायक भीमा मंडावी की संदिग्ध माओवादियों के हमले में मौत हो गई थी. उसके बाद से दंतेवाड़ा विधानसभा की सीट खाली है.

इस सीट पर भाजपा ने भीमा मंडावी की पत्नी ओजस्वी मंडावी को उम्मीदवार बनाया है. वहीं दूसरी ओर कांग्रेस पार्टी ने 2013 में बस्तर के झीरम में संदिग्ध माओवादियों के हमले में मारे गये पूर्व मंत्री महेंद्र कर्मा की पत्नी देवती कर्मा को उम्मीदवार बनाया है.

इस बीच इस इलाके में एक के बाद एक, संदिग्ध माओवादियों के साथ मुठभेड़ की तीन-तीन घटनाओं से भय का वातावरण बना हुआ है.

क्या हैं पुलिस के दावे?

मुठभेड़ की पहली खबर दंतेवाड़ा के किरंदुल इलाके से सामने आई है, जहां पुलिस ने कुटरेम और समलवार के जंगल में हुई मुठभेड़ में दो संदिग्ध माओवादियों के मारे जाने का दावा किया है.

पुलिस के मुताबिक, "दोनों माओवादी भाजपा विधायक भीमा मंडावी की हत्या में शामिल थे. दोनों के सर पर पांच-पांच लाख रुपये का इनाम था."

ज़िले के पुलिस अधीक्षक अभिषेक पल्लव ने बताया, "इनकी सूची वहां के सभी गांवों में भी बांटी गई थी. अगर वो चाहते तो आत्मसमर्पण कर सकते थे. पुलिस काफी संयम से काम कर रही है. हमने पांच लाख, आठ लाख, दस लाख के इनामी को पकड़ा भी है. हमारी कोशिश रहती है कि नक्सली पकड़े जायें."

इसके अलावा पुलिस ने बीजापुर जिले के आवापल्ली की पुन्नूर पहाड़ी पर एक लाख रुपये के इनामी माओवादी के कथित मुठभेड़ में मारे जाने का दावा किया.

शनिवार की रात तक मुठभेड़ की एक और खबर सामने आई. पुलिस ने सुकमा ज़िले में तीन संदिग्ध माओवादियों के मारे जाने का दावा किया.

ज़िले के पुलिस अधीक्षक शलभ सिन्हा ने बीबीसी से कहा, "बुरकापाल कैंप से आगे मुकराम नाम का एक गांव पड़ता है. हमें ख़बर मिली थी कि मुकराम नाले के पास सड़क काटने के लिये काफी बड़ी संख्या में नक्सली हथियार लेकर, (कुछ लोग वर्दी में और कुछ सादे वेषभूषा में) आए हुए हैं. जब हमारे जवान वहां पहुंचे तो माओवादी भागने लगे और गोलीबारी करने लगे. हमें भी जवाबी कदम उठाना पड़ा. जवाबी कार्रवाई के बाद माओवादी वहां से भाग निकले. इसके बाद जब मुठभेड़ स्थल पर सर्च ऑपरेशन चलाया गया तो वहां हमें तीन माओवादियों के शव मिले."

पुलिस अधीक्षक के अनुसार मौक़े से एक इंसास राइफ़ल सहित तीन देशी बंदूकें बरामद की गई हैं.

बारिश में भी जारी रहा अभियान

बारिश के दिनों में आम तौर पर माओवादियों के ख़िलाफ़ पुलिस के अभियान कम ही होते हैं. लेकिन, अगले सप्ताह विधानसभा उपचुनाव होने हैं और पुलिस के मुताबिक सुरक्षा कारणों से ऐसे मौसम में भी सुरक्षा बलों को अपना अभियान तेज़ करना पड़ा है.

शलभ सिन्हा ने कहा, "बारिश के दिनों में हमारे अभियान कम होते हैं. लेकिन जहां तक संभव होता है, हम डॉमिनेशन के लिए निकलते हैं. लेकिन ये पहाड़ी इलाका है और अंदरुनी इलाक़ों में कई नदी-नाले हैं, जो बारिश के दौरान उफनने लगते हैं. इस वजह से हम लोगों को थोड़ी असुविधा होती है."

"बारिश के दौरान अभियान नहीं करने की एक वजह ये भी है कि अंदरुनी इलाक़ों में अभियान के लिये हम गये और दुर्भाग्य से कोई घायल हो गया तो हमें तत्काल घायलों को निकालने के लिए हेलीकॉप्टर नहीं मिल पाता है."

इधर दंतेवाड़ा के किरंदुल इलाके में संदिग्ध माओवादियों की ओर से एक ग्रामीण की हत्या किए जाने की भी ख़बर है. माओवादियों ने मृतक के शव के साथ पर्चा फेंक कर उस पर पुलिस के लिये मुख़बिरी करने का आरोप लगाया है.

'कार्यकर्ताओं को मिलेगी सुरक्षा'

राज्य के गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू ने कहा है कि माओवादी हिंसा के मद्देनज़र दंतेवाड़ा के इलाके में सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई है. उन्होंने कहा कि चुनाव के दौरान सभी उम्मीदवारों को भी सुरक्षा मुहैया करवाई गई है.

ताम्रध्वज साहू ने कहा, "सुरक्षा व्यवस्था को लेकर किसी को चिंता करने की ज़रुरत नहीं है. पुलिस प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद है और विशेषकर चुनाव में तो हम सबको सुरक्षा प्रदान करते ही हैं."

गृहमंत्री ने कहा,"जो लोग भी चुनाव प्रचार में रहेंगे और सरकार को पहले से इसकी जानकारी देंगे कि वे चुनाव प्रचार के लिये जा रहे हैं तो उन्हें पूरी तरह से सुरक्षा मुहैया करवाई जायेगी."

गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू के दावे अपनी जगह हैं लेकिन 24 घंटे के भीतर एक के बाद एक मुठभेड़ की तीन-तीन घटनाओं से यह बात तो बहुत साफ़ है कि इस इलाक़े में चुनाव की राह बहुत आसान तो नहीं होगी.

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