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bbc news

  • Jun 13 2019 2:16PM
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डोनल्ड ट्रंप पोलैंड में 1000 अमरीकी सैनिक क्यों भेज रहे हैं

डोनल्ड ट्रंप पोलैंड में 1000 अमरीकी सैनिक क्यों भेज रहे हैं

अमरीका-पोलैंड

Getty Images

अमरीका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने पोलैंड के राष्ट्रपति आंद्रेज़ डूडा के साथ प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि अमरीका अपने एक हज़ार सैनिक पोलैंड भेजेगा.

ट्रंप ने कहा कि ये हज़ार सैनिक जर्मनी में मौजूद अमरीका की 52 हज़ार सैन्य टुकड़ियों में से ली जाएंगी जिनके साथ ड्रोन और बाक़ी मिलिट्री हथियार होंगे.

हालांकि उन्होंने पोलैंड में एक स्थायी अमरीकी मिलिट्री बेस बनाने को लेकर कुछ नहीं कहा.

अमरीकी राष्ट्रपति, डोनल्ड ट्रंप, पोलैंड के राष्ट्रपति, आंद्रेज़ डूडा
EPA
अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के साथ पोलैंड के राष्ट्रपति आंद्रेज़ डूडा

पोलैंड ने बेस बनाने के लिए 200 करोड़ डॉलर लगाने का ऑफ़र भी दिया था.

राष्ट्रपति डूडा ने तो यहां तक कहा कि बेस का नाम ट्रंप फोर्ट भी रखा जा सकता है.

ट्रंप ने कहा कि अमरीका इस आइडिया में दिलचस्पी रखता है लेकिन स्थायी बेस बनाने में हिचकता रहा क्योंकि रूस प्रतिक्रिया करेगा.

ट्रंप ने कहा, "मैं स्थायी या अस्थायी के बारे में बात नहीं कर रहा लेकिन बेस एक स्टेटमेंट ज़रूर होता."

पोलैंड के राष्ट्रपति आंद्रेज़ डूडा
EPA
पोलैंड के राष्ट्रपति आंद्रेज़ डूडा

राष्ट्रपति डूडा की एक साल के अंदर ये दूसरा अमरीकी दौरा है. इस बार की यात्रा में नाटो में पोलैंड की सदस्यता की बीसवीं सालगिरह मनाई गई और देश में वामपंथ के खत्म होने की तीसवीं सालगिरह भी.

पत्रकारों से बात करते हुए राष्ट्रपति डूडा ने ट्रंप को उनकी पोलैंड के लिए सद्भाव और उसके मामलों पर अच्छी समझ के लिए शुक्रिया किया.

अमरीका-पोलैंड
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अमरीका और पोलैंड का समझौता

दोनों देशों ने रक्षा क्षेत्र में आपसी सहयोग के लिए एक समझौता किया है.

इस समझौते में 100 अमरीकी टुकड़ियों के बेस और इंफ्रास्ट्रक्चर का इंतज़ाम करना होगा जो वहां अस्थायी रूप से रोटेशन में रहेंगे.

बीबीसी ने जब अमरीका के रक्षा मंत्रालय से पूछा कि नए समझौते के मुताबिक कितने आर्मी वाले पोलैंड भेजे जाएंगे.

पहले ही पोलैंड में 5 हज़ार टुकड़ियां रोटेशन से पोलैंड आती जाती रही हैं.

अमरीका-पोलैंड
Getty Images

इस नए समझौते का क्या है मतलब

बीबीसी के रक्षा मामलों के संवाददाता जोनाथन मार्कस कहते हैं कि पिछले साल से ही पोलैंड सरकार अमरीका को अपने यहां मिलिट्री बेस बनाने के लिए मना रही है.

इस आइडिया को फोर्ट ट्रंप नाम भी दे दिया गया. लेकिन इसमें कुछ दिक्कतें थी.

इसके लिए पैसा कौन देगा? पोलैंड ने 200 करोड़ डॉलर का ऑफर दिया लेकिन इससे तो बेस की सिर्फ शुरुआत ही की जा सकती थी.

अमरीकी सेना
EPA

वहां पर सैन्य टुकड़ियां कहां से आएंगी? उन्हें अमरीका से वहां शिफ्ट करना काफ़ी मंहगा होता और अगर जर्मनी या इटली से लाया जाता तो अमरीका और इन देशों के आपसी रिश्तों में दिक्कत आ सकती है.

सबसे बड़ी बात तो ये कि स्थायी बेस बनाना नाटो और रूस के बीच 1997 में हुए एक समझौते का उल्लंघन होता.

अभी जो हुआ है वो नाकाफ़ी है. मांग से कम सैन्य टुकड़िया दी गईं और वे भी रोटेशन में. हालांकि ये टुकड़ियां पोलैंड के लिए मिलिट्री इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने में मदद करेंगी ताकि कभी भविष्य में ज़्यादा सैनिकों को भी शामिल किया जा सके.

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