Advertisement

bbc news

  • Apr 16 2019 1:34PM

मस्जिदों में औरतों के दाख़िले की अनुमति पर सुप्रीम कोर्ट का नोटिस

मस्जिदों में औरतों के दाख़िले की अनुमति पर सुप्रीम कोर्ट का नोटिस

मुस्लिम महिला

Getty Images

सुप्रीम कोर्ट में एक मुस्लिम दंपत्ति ने एक याचिका दाख़िल कर अपील की है कि मस्जिदों में औरतों के दाख़िल होने, एक ही जगह पर मर्दों के साथ नमाज़ पढ़ने का आदेश दिया जाए.

पुणे के इस दंपति के मुताबिक़ उन्हें एक मस्जिद में नमाज़ पढ़ने से रोका गया था जिसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दी.

इस पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र, राष्ट्रीय महिला आयोग, सेंट्रल वक़्फ़ काउंसिल, ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड को एक नोटिस जारी किया है.

जस्टिस एसए बोबड़े की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने पुणे की दंपति की याचिका को स्वीकार करते हुए यह नोटिस जारी किया है.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि "हम आपकी याचिका पर सबरीमला पर हमारे फ़ैसले की वजह से सुनवाई कर सकते हैं."

मौजूदा समय में धर्म औरतों के मस्जिद में दाख़िल होने और मर्दों के साथ नमाज़ पढ़ने के बारे में क्या कहता है?

मुस्लिम महिला
AFP

क्या औरतें मस्जिद में दाख़िल हो सकती हैं?

औरतों के मस्जिद में दाख़िल होने पर क़ुरान में कोई रोक नहीं बताई गई है.

शिया, बोहरा और खोजा मतों वाली मस्जिदों में औरतें आराम से दाख़िल होती हैं.

इस्लाम के सुन्नी मत को माननेवालों में से कई लोग, औरतों का मस्जिद में जाना ठीक नहीं समझते इसलिए सुन्नी मस्जिदों में औरतें नहीं जाती.

हालांकि दक्षिण भारत में कई सुन्नी मस्जिदों में औरतों का जाना आम है.

मुस्लिम महिला, नमाज़
Reuters

क्या औरतें मर्दों के साथ नमाज़ पढ़ सकती हैं?

क़ुरान और अरबी भाषा की पढ़ाई अक्सर मस्जिदों में या मस्जिदों से लगे हुए मदरसों में ही होती है और इसमें लड़के-लड़कियां सभी शामिल होते हैं.

नमाज़ पढ़ने और वज़ू करने पर कोई रोक-टोक नहीं है. पर मर्द और औरतों के लिए इसकी जगह अलग-अलग बनाई गई हैं.

मुस्लिम महिला
Getty Images

कई मस्जिदें मतों के मुताबिक़ नहीं होतीं, ऐसे में शिया-सुन्नी एक ही इमाम के पीछे नमाज़ पढ़ते हैं.

अगर कोई औरत मस्जिद में नमाज़ पढ़ना चाहे तो इमाम से कह सकती है और इसके लिए उन्हें अलग जगह दे दी जाती है.

सबरीमला
PTI

सबरीमला का हवाला

याचिकाकर्ताओं ने केरल के सबरीमाला मंदिर में औरतों को जाने की अनुमति देनेवाले सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला दिया है.

उन्होंने ये भी लिखा है कि मक्का में भी औरतें, मर्दों के साथ काबा की परिक्रमा करती हैं, ऐसे में मस्जिदों में उन्हें मर्दों से अलग हिस्से में रखना ग़लत है.

हालांकि मक्का की मस्जिद में भी नमाज़ पढ़ने और वज़ू करने के लिए मर्द और औरतों के लिए अलग हिस्से तय किए गए हैं.

ऐसा दुनिया की सभी मस्जिदों में किया जाता है.

याचिकाकर्ताओं ने इसे भारतीय संविधान के तहत तय किए गए मूल अधिकारों का उल्लंघन बताया है.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूबपर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

]]>

Advertisement

Comments

Advertisement