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  • Feb 22 2019 7:09AM

किसान लॉन्ग मार्च: अब नहीं होगा किसानों का मार्च, सरकार से बातचीत में हुआ समझौता

किसान लॉन्ग मार्च: अब नहीं होगा किसानों का मार्च, सरकार से बातचीत में हुआ समझौता

किसान मार्च

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अलग-अलग मांगों को लेकर 20 फ़रवरी को किसानों का 'लॉन्ग मार्च' गुरुवार सुबह से शुरू हुआ लेकिन लेकिन राज्य सरकार से बातचीत और समझौत के बाद इसे गुरुवार रात ही स्थगित कर दिया गया.

हालांकि पहले ख़बर ये आई थी कि सरकार के साथ किसानों की बातचीत विफल रही है और वो अपनी मांगों के साथ एक बार फिर नासिक से मुंबई कूच करने वाले हैं. लेकिन रात बीतते समझौते और मार्च स्थगित होने की बात सामने आई.

मुंबई के स्थानीय पत्रकार संजय रमाकांत तिवारी ने बीबीसी को बताया कि महाराष्ट्र सरकार की ओर से कैबिनेट मंत्री गिरीश महाजन आन्दोलनकारियों से चर्चा केलिए पहुंचे थे. उनसे किसान नेताओं की बातचीत तक़रीबन पांच घंटे चली और इसके बाद पैदल मार्च स्थगित किए जाने की ख़बर आई.

ऑल इंडिया किसान सभा के महासचिव अजित नवले ने बीबीसी को बताया, 'हमारे बीच ये तय हुआ है कि भले ही समय लगे लेकिन न्याय मिलना चाहिए और आदिवासियों को जमीन का हक़ मिलना चाहिए.'

नवले ने कहा, "बड़ा दुर्भाग्य है कि पहले लॉन्ग मार्च में जो बातें मान ली गयी थी उन्हें लागू करवाने के लिए किसानों को फिर से तलना पड़ा. अगर वो इसे लागू करते, ठीक तरह से फ़ॉलो-अप करते तो ये कदम नहीं उठाना पड़ता. उन्होंने वादा किया है कि हर दो महीने में इसकी समीक्षा करेंगे. अगर मंत्री इसकी जिम्मेदारी लेते हैं तो ये अपने आप में अच्छी बात होगी.'

मार्च की शुरुआत

राज्य के अलग-अलग हिस्सों से इस आंदोलन में शरीक होने आए किसान नासिक के मुंबई नाका के पास महामार्ग बस स्टॉपपर इकठ्ठा हुए. भारी भीड़ के कारण इस बस स्टॉप से छुटने वाली सभी बसें दूसरे स्टॉप से रवाना हुई.

यह लॉन्ग मार्च 20 फ़रवरी को निकलने वाला था लेकिन एक दिन देरी से निकला. अखिल भारतीय किसान सभा के नेता डॉ. अजित नवले ने कहा की कई जगहों पर पुलिस ने लॉन्ग मार्च में शामिल होने आ रहे किसानों को रोका.

इतना ही नहीं उन्हें कई घंटों तक रोका गया. इस वजह से किसानों को मार्च के लिए पहुंचने में देरी हुई. देर रात बारह बजे तक किसान आ रहे थे. दूसरी तरफ़ किसान सभा के प्रतिनिधियों की सरकार के साथ बातचीत भी चल रही थी.

https://twitter.com/bbcnewsmarathi/status/1098449963254636544

सरकार की ओर से जलसंपदा मंत्री गिरीश महाजन ने किसान सभा के प्रतिनिधियों से बैठक की. देर रात तक चली इस बैठक में कोई ठोस परिणाम नहीं निकला. किसान सभा की ओर से स्पष्ट किया गया कि किसानों के प्रस्ताव पर विचार के लिए सरकार चाहे जितना समय ले. लेकिन तब तक लॉन्ग मार्च मुंबई की ओर बढ़ता रहेगा. किसान सभा के नेताओं ने यह भी बताया था कि अगर सुबह मार्च निकलने पर सरकार ने बैठक का प्रस्ताव रखा तो सभा स्थल पर ही मुलाक़ात की जाएगी.

इस बैठक के बाद मंत्री गिरीश महाजन ने कहा कि मुख्यमंत्री के साथ हुई चर्चा में अनेक मुद्दों पर सहमति बनी है. वहीं मुद्दे हम लिखित रुप में देंगे, ताकि किसानों को 180 किमी पैदल चलना ना पड़े.

किसानों की लंबित मांगों की ओर सरकार का ध्यान आकर्षित करने के लिए अखिल भारतीय किसान सभा ने पिछले साल मार्च में नासिक से मुंबई तक लॉन्ग मार्च निकाला था. उस वक़्त मुख्यमंत्री ने आश्वासन देते हुए किसानों की मांगें मान ली थी. लेकिन एक साल बीत जाने के बाद भी कई मांगें पूरी नहीं हुई है.

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अजित नवले ने कहा था कि इस बार सरकार और किसानों के बीच ठोस हल निकाल कर ही आंदोलन वापस लिया जाएगा.

आंदोलन रोकने के सरकार के प्रयास

आमदार जीवा पांडू गावित ने आरोप लगाया है कि बुधवार (20 फ़रवरी) को दिनभर आंदोलन रोकने के लिए सरकार प्रयास करती रही. जगह जगह हमारी गाड़ियां रोकी गई. गाड़ी चेक करना, काग़ज़ात चेक करना, आंदोलनकारियों की जानकारी लेना, जैसी वजहें बताकर पुलिस ने घंटों गाड़ियां रोक कर रखी. आमदार गावित ने दावा किया है कि आंदोलन ही ना हो, इसलिए पुलिस और प्रशासन सक्रिय था.

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नासिक पुलिस के मुताबिक़ उन्होंने आंदोलनकारियों को एक जगह बैठकर विरोध प्रदर्शन करने की इजाज़त दी थी लेकिन लॉन्ग मार्च के लिए अबतक अनुमति नहीं दी गई थी.

मुंबई नाका इलाक़े में शहर पुलिस के साथ ही रिज़र्व पुलिस बल की टीमें भी बुलाई गईं थीं. ये टीमें अहमदनगर, बीड और पुणे से पहुंची थीं.

क्या है किसानों की प्रमुख मांगें?

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1. नारपार, दमणगंगा, वाघ और पिंजाल के साथ अरब महासागर को मिलने वाली सभी नदियों का पानी रोका जाए, ताकि महाराष्ट्र के किसानों की खेती को पानी मिल सके. ऐसा करते समय स्थानीय किसानों का नुक़सान ना हो, गाव ना डूबे इसका पूरी तरह से ध्यान रखा जाए. इस योजना का स्थानीय किसानों को लाभ हो इसलिए पानी रिज़र्व रखा जाए. इस पानी पर महाराष्ट्र का हक़ है. इसलिए वो गुजरात को देने का षडयंत्र तुरंत बंद किया जाए.

2. सूखे को देखते हुए किसानों को कम से कम 40 हज़ार रुपये प्रति एकड़ मुआवज़ा मिले. बिजली का बिल माफ़ हो. पीने का पानी, पशुओं का चारा, अनाज, रोज़गार और आरोग्य सुविधाएं मुहैय्या कराई जाए. मांगने पर 300 रुपये प्रति दिन भत्ते पर रोज़गार मिले.

3. अकाल निवारण और निर्मूलन के लिए अलग-अलग समितिओं द्वारा सुझाई गई सिफ़ारिशें कालबद्ध तरीक़े से लागू हो. केंद्रीय अकाल संहिता के ग़लत सिद्धांत बदले जाए. फसल बिमा योजना किसानों की हित की हो. जल आपूर्ती व्यवस्था सुधारी जाएं और उसे आधुनिक बनाया जाए. विद्यार्थीयों की सभी प्रकार की फ़ीस माफ़ हो.

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4. सभी संकटग्रस्त किसानों को बिना शर्त संपूर्ण क़र्ज़माफ़ी देकर कृषी उपज को डेढ़ गुना क़ीमत देने वाला क़ानून बनाया जाए. स्वामीनाथन आयोग की सभी सिफ़ारिशें लागू हो.

5. देवस्थान को दी गई ज़मीन, पशु के चरने की ज़मीन, बेनामी ज़मीन, बंजर ज़मीन उपज लेने वाले किसान के नाम की जाए.

6. ज़रुरतमंदों को निराधार योजना का तुरंत लाभ मिले. उनके मानधन में बढ़ोतरी कर 3000 रुपये प्रति माह की जाए.

7. पुराने राशनकार्ड बदले जाए. सभी राशनकार्ड धारकों को अंत्योदय योजना के दर से राशन मिले. अंगुठे के निशान मॅच ना होने पर मज़दूरों को राशन देने से मना करना तुरंत बंद हो.

8. विकास योजनाओं को नाम पर, बुलेट ट्रेन और एक्सप्रेस/समृद्धी हायवे के नाम पर किसानों की ज़मीन हथियाने का षडयंत्र बंद करे.

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9. राज्य हायवे के लिए किसानों को उचित मुआवज़ा देने की बजाए धोके से ज़मीन अधिग्रहित करना रोका जाए. भूमी-अधिग्रहन क़ानून 2013 के मुताबिक़ किसानों को मार्केट रेट से पांच गुना ज़्यादा दर मिले.

10. किसान आंदोलन के दौरान दर्ज किए गए सभी पुलिस केस वापस लिए जाएं.

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11. गन्ना किसानों को एफ़आरपी का भुगतान गन्ना काटने के 14 दिन के अंदर मिले, इस क़ानून का कड़ा पालन किया जाए.

12. नासिक-मुंबई लॉन्ग मार्च 2018 के वक़्त किसान सभा के साथ की गई बातचीत में स्वीकार की गई मांगों पर तत्काल अमल हो.

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