Advertisement

bbc news

  • Jan 12 2019 9:50AM

बिहार के गया में ऑनर किलिंग की पुलिस थ्योरी पर उठ रहे हैं सवाल: ग्राउंड रिपोर्ट

बिहार के गया में ऑनर किलिंग की पुलिस थ्योरी पर उठ रहे हैं सवाल: ग्राउंड रिपोर्ट

बिहार के गया ज़िले के मानपुर ब्लॉक के पटवा टोली की संकरी गलियों में मातमी सन्नाटा पसरा है. 12,000 पॉवरलूम और 500 हैंडलूम वाले इस इलाके में, सामान्य दिनों जैसा कुछ भी नहीं.

लूम्स की कोई आवाज़ बीती 9 जनवरी से यहां सुनाई नहीं दी. औरतें घर में दुबकी है, पुरुष धूप सेंकते हुए अनमने ढंग से अख़बार पर नज़रें गड़ाए बैठे हैं.

अख़बार के पीछे छिपी उनकी आंखों में अपनी बेटियों की सुरक्षा को लेकर डर नज़र आने लगता है.

इस रिहाइश से कुछ दूर दुर्गास्थान नाम की जगह पर तकरीबन 500-600 लोग जुटे हैं. इनमें से कई अपने नेता और मानपुर वस्त्र उद्योग बुनकर समिति के अध्यक्ष प्रेम नारायण पटवा को खैंनी ठोंकते हुए शांति से सुन रहे हैं और मोबाइल पर उनकी रिकॉर्डिंग भी कर रहे हैं.

प्रेम नारायण पटवा बीबीसी से कहते हैं, "9 तारीख से सबने अपनी मर्जी से अपना पॉवरलूम और हैंडलूम बंद रखा था लेकिन 11 तारीख से हमने अनिश्चितकालीन बंदी की घोषणा कर दी है. 45 हज़ार लोगों की रोज़ी रोटी पर असर पड़ रहा है. लेकिन हम पटवा टोली की बेटी को न्याय दिला कर रहेंगे. हम सीबीआई जांच की मांग कर रहे है."

हमारे सामने पटवा टोली की बेटी की कहानी घूमने लगती है जिसका ज़िक्र प्रेम नारायण कर रहे थे.

पटवा टोली की बेटी

पटवा टोली की बेटी यानी 16 साल की प्रतिमा (बदला हुआ नाम). जिसका शव बीती 6 जनवरी को गया-खिजरासराय रोड के बकसरिया टोला के पास क्षत-विक्षत हालत में मिला.

पुलिस के मुताबिक लाश का सिर, एक हाथ और दोनों स्तन कटे हुए थे और कुर्ता फाड़ कर नीचे की ओर खिंचा हुआ था. धड़ से कुछ दूरी पर सिर मिला जिसपर कोई रसायन डालकर उसकी पहचान मिटाने की कोशिश की गई थी.

प्रतिमा की पहचान उसके घरवालों ने पांव में पहनी पायल और चप्पल के आधार पर की. कुछ स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रतिमा के साथ दुष्कर्म हुआ है.

क्या है मामला?

प्रतिमा 28 दिसंबर को अपने घर से शाम साढ़े 6 बजे किराने का सामान खरीदने निकली थी. लेकिन वापस नहीं लौटी. 7 फुट लंबे 5 फुट चौड़े एक बेहद छोटे से कमरे में रहने वाले इस बुनकर मज़दूर परिवार ने उसे बहुत ढूंढा और आखिरकार थक-हारकर 4 जनवरी को स्थानीय थाने बुनियादगंज में एफ़आईआर दर्ज़ कराई.

6 जनवरी को पुलिस को प्रतिमा की लाश मिली. इसके बाद 8 जनवरी की शाम से मानपुर बुनकर समिति ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया, जो अभी भी चल रहा है.

बुनकर समिति के विरोध प्रदर्शनों के बाद 10 जनवरी को गया के एसएसपी राजीव मिश्रा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इसे ऑनर किलिंग का मामला बताया.

उन्होंने कहा, " पीडिता 31 दिसंबर की शाम 6 बजे घर लौटी थी जिसके बाद वो उसी रात गायब हो गई. पीडिता की मां और बहन ने बताया कि उसके पिता ( तुराज प्रसाद उर्फ निना) और उनके एक दोस्त (लीला पटवा) उसे अपने साथ बाहर ले गए जिसके बाद वो वापस नहीं लौटी. जो लाश मिली है वो प्रथम दृष्टया पांच-छह दिन पुरानी लग रही है."

पुलिस की थ्योरी में कई पेंच

पुलिस भले ही इसे ऑनर किलिंग का मामला बता रही है, लेकिन उनकी इस थ्योरी पर कई सवाल खड़े होते हैं.

4 बहनों वाले इस परिवार में प्रतिमा दूसरे नंबर की बेटी थी. प्रतिमा से बड़ी बहन कहती हैं, "वो 28 के बाद कभी वापस नहीं लौटी. पुलिस ने हमको मारपीट कर, करंट का डर दिखाकर हमसे बयान ले लिया कि वो 31 को लौटी थी."

पटवा टोली के लोग भी कहते हैं कि उन्होने 28 दिसंबर के बाद प्रतिमा की लाश ही देखी.

दूसरी बात ये कि पुलिस पीड़िता के पिता के अलावा उनके दोस्त (लीला पटवा) को मुख्य अभियुक्त बता रही है. लेकिन स्थानीय लोगों का दावा है कि 31 दिसंबर की रात नए साल का जश्न मनाने के लिए लीला पटवा 50 लोगों के साथ भीमबांध नाम के पर्यटक स्थल चले गए थे.

उनके साथ घूमने गए राजाराम और तालकेश्वर प्रसाद ने बीबीसी को बताया, "हम लोगों ने एक बस बुक की थी और परिवार सहित घूमने गए थे. 31 की रात हम लोग रात 9.15 बजे के आस पास निकले और 1 तारीख की रात वापस आए थे."

वहीं स्थानीय पत्रकार विश्वनाथ कहते हैं, "पुलिस कह रही है पीड़िता 28 दिसंबर को अपने प्रेमी के साथ गई थी और 31 दिसंबर को वापस आई थी. साथ एसएसपी ने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रथम दृष्टया पीड़िता के साथ दुष्कर्म होने से इनकार किया है. ऐसे में अगर ऑनर किलिंग हुई है तो हथियार कहां है , हत्या कहां हुई?"

गांव में रहने वाले एक बुनकर डौलेश्वर प्रसाद भी अपनी ओर से एक उठाते हैं. वो कहते हैं, " कोई पिता इस कदर अपनी बच्ची का स्तन काट सकता है या कटवा सकता है क्या?"

वहीं वज़ीरगंज के अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी अभिजीत सिंह ने बीबीसी को बताया, "पिता और उनके दोस्त को जेल भेजा गया है जबकि लड़की के कथित प्रेमी पिंटू के नाम वाले 3 लड़कों से पूछताछ चल रही है. कोर्ट में बयान भी दर्ज किया गया है. जहां तक दुष्कर्म की बात है, उसके लिए पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट का इंतज़ार है."

महिला हिंसा के नए नए रूप

बिहार में महिलाओं के प्रति हिंसा नए-नए रूपों में सामने आ रही है. 2005 में सत्ता संभालने के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने महिलाओं के सशक्तिकरण को लेकर तमाम योजनाएं चलाई लेकिन उनके प्रति बढ़ती हिंसा को रोकने में असफल रहे.

सिर्फ दुष्कर्म का ही आंकड़ा देखें तो बिहार पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक 2005 में 973 मामले दुष्कर्म के दर्ज हुए वहीं 2018 में ये 1304 थे.

मानपुर का पटवा टोली वो जगह है जहां से हर साल एक अच्छी खासी तादाद में बच्चे आईआईटी प्रवेश परीक्षा पास करते हैं. लेकिन आज वो जगह एक लड़की की हत्या की वजह से चर्चा में है.

महिला हिंसा
Getty Images

गांव में घूमते-घूमते और लोगों से बात करते हुए शाम के 5 बज चुके थे. सर्दियों में इस वक़्त तक अंधेरा घिरने लगता है.

प्रतिमा की मां जिन्हें स्थानीय थाने ने 9 जनवरी की शाम से पूछताछ के लिए रखा हुआ था, वो दो दिन बाद घर लौट रही हैं. उनके आंसू सूख चुके हैं.

मुझे देखते हुए वो कहती हैं, "मैंने 2 दिन से नहाया नही है, मुंह नहीं धोया है. मुझे कुछ नहीं चाहिए. बस मेरी बिटिया का क़ातिल ढूंढ दो, मेरी आत्मा को चैन मिल जाएगा."

ये भी पढ़ेंः

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉयड ऐप के लिए यहां क्लिक करें. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

]]>

Advertisement

Comments

Advertisement