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bbc news

  • Dec 7 2018 1:28PM

दिल्ली मेट्रो की ब्लू लाइन बार-बार क्यों ख़राब हो रही?

दिल्ली मेट्रो की ब्लू लाइन बार-बार क्यों ख़राब हो रही?

"मेट्रो लेट चल रही है इसलिए दफ्तर समय पर नहीं पहुंच पाऊंगी." क्या पिछले दो दिन से आप भी दफ़्तर लेट पहुंचने के लिए यही वजह बता रहे हैं?

दिल्ली के जिस दफ़्तर में जाइए, एक जगह खड़े हो कर दिल्ली मेट्रो की ब्लू लाइन की लेट लतीफ़ी पर चर्चा करने वाले लोग मिल ही जाएंगे.

पांच दिसंबर को दिल्ली मेट्रो की इस लाइन की 16 ट्रिप कैंसल थी और 20 ट्रिप देरी से चल रही थी.

लेकिन पिछले दो दिनों से ब्लू लाइन पर मेट्रो ट्रेन शॉर्ट लूप में चल रही है. एक लूप है वैशाली से यमुना बैंक के लिए और दूसरा लूप है यमुना बैंक से द्वारका के लिए.

ब्लू लाइन की सीधी मेट्रो वैशाली से द्वारका नहीं चल रही और लोगों को बीच में मेट्रो बदलने की ज़रूरत पड़ रही है.

इससे मेट्रो को जो नुक़सान हुआ सो हुआ, लोगों की लंबी क़तार ऑफिस आने और जाने के समय मेट्रो स्टेशन पर देखने को मिल रही है.

कई लोगों ने आधे घंटे की दूरी दो से तीन घंटे में तय की.

इस वजह से प्राइवेट गाड़ियां ज़्यादा निकलीं और लोगों को ट्रैफ़िक जाम का सामना करना पड़ा.

दिल्ली मेट्रो
Getty Images

दिक्क़त कहां है?

सवाल ये है कि आख़िर दिल्ली मेट्रो की ब्लू लाइन इतनी ख़राब क्यों होती है?

इस बार ज़्यादा दिक्क़त दिल्ली को ग़ाजियाबाद के वैशाली से जोड़ने वाली लाइन में आ रही है. दिल्ली मेट्रो के मुताबिक़ दिक्क़त बहुत हद तक ठीक हो गई है.

अब जो दिक्क़त रह गई है वो है यमुना बैंक से वैशाली के बीच की. इसलिए तीसरे दिन भी मेट्रो की फ्रिक्वेंसी थोड़ी कम कर दी गई है और रफ़्तार धीमी.

ब्लू लाइन मेट्रो की दिक्क़त को समझने के लिए आपको ये समझना ज़रूरी है कि मेट्रो काम कैसे करती है.

दिल्ली मेट्रो वैसे तो ऑटोमेटिक सिग्नलिंग सिस्टम पर काम करती है.

ब्लू लाइन में 17 इंटरलॉकिंग सेक्शन हैं, जिनको 8 इंटरलॉकिंग पॉइंट में बांटा गया है.

जब मेट्रो ट्रेन एक सेक्शन से निकल जाती है तो उसकी सूचना उनके नजदीकी इंटरलॉकिंग पॉइंट पर पहले ख़ुद-ब-ख़ुद मिल जाया करती थी.

कौन सी मेट्रो ट्रेन किस स्टेशन से निकली है, इसका डेटा नियमित अंतराल पर मेट्रो के ऑपरेशन कंट्रोल सेंटर (OCC) यानी मेट्रो के सेंट्रलाइज्ड सर्वर में मिलता रहता था.

लेकिन बीते तीन दिनों से ये सिग्नल ऑपरेशन कंट्रोल सेंटर को नहीं मिल पा रहा है.

इंटरलॉकिंग पॉइंट अपने आप बंद हो जा रहे हैं और अपने आप चलने लग रहे हैं.

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दिल्ली मेट्रो
Getty Images

इसलिए दिल्ली मेट्रो की ब्लू लाइन को अब हर स्टेशन से मैनुअली कंट्रोल किया जा रहा है.

इस चक्कर में मेट्रो की रफ़्तार धीमी पड़ गई है, हर सूचना मौखिक तौर पर दूसरे स्टेशन तक देनी पड़ रही है और फिर वहां से सूचना ऑपरेशन कंट्रोल सेंटर तक जा रही है.

दिल्ली मेट्रो के प्रवक्ता, निखिल कुमार के मुताबिक, "ब्लू लाइन के 8 इंटरलॉकिंग पॉइंट में से पांच को फ़िलहाल ठीक कर लिया गया है. अब दिक्क़त केवल तीन प्वाइंट पर बची है."

इसलिए फ़िलहाल मेट्रो ट्रेन द्वारका से लेकर यमुना बैंक तक ठीक चल रही है. यमुना बैंक से वैशाली के लाइन पर अब भी दिक्क़त है और ट्रेन छह मीनट के अंतराल पर आ रही है.

दिल्ली मेट्रो
EPA

दिक्क़त कैसे होगी दूर?

दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन के मुताबिक़ ये पहला मौक़ा है जब उनकी तकनीकी सॉफ्टवेयर टीम इस दिक्क़त को समझ नहीं पा रही है. इसलिए उन्होंने जर्मनी से मदद मांगी है.

दिल्ली मेट्रो ने ये सॉफ्टवेयर M/S SIMENS से ख़रीदा था. ये जर्मनी की कंपनी है.

डीएमआरसी के मुताबिक़ छह दिसंबर का पूरा डेटा लॉग उन्होंने जर्मनी को भेजा है. फ़िलहाल उनको जर्मनी की तरफ़ से जवाब का इंतजार है.

निखिल के मुताबिक, "ये एक तकनीकी दिक्क़त है, फ़ोन और मेल पर ही बातचीत के ज़रिए इसका हल निकल आने की उम्मीद है."

दिक्क़त के बीच कितनी सुरक्षित है रेल यात्रा?

ब्लू लाइन की दिक्क़तों के बारे में दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन ने एक बयान जारी किया है. बयान में कहा गया है कि डीएमआरसी इन दिनों "फेल- सेफ" तकनीक पर काम कर रही है. किसी भी वक़्त सिग्नल फेल होने पर मेट्रो अपनी स्पीड कम कर मेनुअल मोड में ही काम करने लगती है. यात्री निश्चिंत होकर मेट्रो से यात्रा कर सकते हैं. यात्रा में थोड़ी देर हो सकती है, पर यात्रा सुरक्षित है."

इस सवाल के जवाब में ब्लू लाइन पर दिक्क़त ज़्यादा क्यों आती है? निखिल मुस्कुराते हुए कहते हैं, "दिल्ली मेट्रो में रोजाना 28 लाख लोग सफर करने हैं, जिसमें से तकरीबन 11 लाख ब्लू लाइन पर चलते हैं. इसमें से सबसे ज़्यादा मीडिया में काम करने वाले लोग हैं."

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