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banka

  • Sep 20 2019 8:26AM
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ओल की खेती कर समृद्ध हो रहे चुटिया गांव के किसान, सालाना दो लाख का मुनाफा

 निरंजन,  बांका : किसानों की आमदनी दुगुनी करने के लिए कृषि विज्ञान केंद्र आये दिन यहां उन्नत खेती व कम लागत में अधिक मुनाफा कमाने के माध्यम की जानकारी किसानों को दे रहा है. केवीके से किसान उपयोगी तकनीक व उपयोग की जानकारी हासिल कर रहे हैं. 

 
आज प्रगतिशील किसान खेती के जरिये अपने सामाजिक-आर्थिक जीवन स्तर को ऊपर उठाने में सफल हो रहे हैं.ऐसे ही एक किसान जिला मुख्यालय के चार किमी दूर अवस्थित चुटिया गांव के राज प्रताप भारती भी हैं. ये एक ऐसे प्रगतिशील किसान हैं, जिन्होंने ओल, आम, हल्दी, धनिया आदि की खेती कर आसपास के किसानों में नया जोश व उत्साह पैदा कर दिया है.
 
 प्रगतिशील किसान राजप्रताप भारती ने बताया है कि केवीके से प्रशिक्षण व ओल का बीज लेने के बाद करीब 15 कठ्ठे में ओल की खेती शुरू की. इससे आज वो सालाना करीब दो लाख रुपये का मुनाफा कमा रहे हैं. गांव के करीब दर्जन भर किसानों को ओल की खेती के लिए प्रेरित कर उनकी आमदनी दुगुनी करवायी. अब गांव के अरुण कुमार, अशोक भारती, सुरेश मांझी, सबीन महतो आदि द्वारा बड़े पैमाने पर ओल की खेती कर रहे हैं. 
 
छह माह में दस किलो की उपज: उन्होंने गजेंद्र प्रभेद का ओल लगाया. इसकी खासियत है कि छह माह में करीब 6-10 किलो का हो जाता है. अब वो बाजार में ओल बेचने के साथ- साथ केवीके व अन्य किसानों को भी बीज उपलब्ध करा रहे हैं. इससे वो घर बैठे ही आमदनी कर रहे हैं. उन्होंने बताया कि ओल की खेती में बिक्री के पश्चात जो ओल बच जाता है. उस ओल काे बिना स्टोरेज के यूं ही घर में रख देते हैं, और मार्च महीने में पुन: उस ओल को लगाते हैं. जिसकी पैदावार अक्तूबर- नवंबर तक हो जाती है. 
 
मिल चुका है कई सम्मान: कृषि क्षेत्र में बेहतर करने पर किसान राज प्रताप भारती को कई सम्मान मिल चुका है. अपनी उन्नत खेती को लेकर बौंसी कृषि प्रदर्शनी मेला में लगातार उन्होंने पुरस्कार प्राप्त किया है. इसके अलावा उनको महिंद्रा समृद्धि अवार्ड, कृषि विश्वविद्याल सबौर द्वारा किसान सम्मान पुरस्कार आदि से नवाजा गया है. 
 
केवीके बांका  के वैज्ञानिक डाॅ रघुबर साहू ने बताया कि किसानों की आय दुगुनी करने के लिए केवीके लगतार प्रयासरत है. किसानों को उन्नत खेती, वैकल्पिक खेती, सब्जी की खेती, समेकित कृषि प्रणाली आदि के लिए जागरूक किया जा रहा है. इसका असर अब यहां दिखने लगा है.
 
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