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asansol

  • May 19 2017 9:30AM

बाजारी निवेश से 50 करोड़ की आय

25 करोड़ पीएफ के सरप्लस फंड में, 25 करोड़ है कंपनी के पास
यूनियनों ने इस राशि का वितरण कर्मियों के बीच करने की रखी मांग
प्रत्येक कर्मी को मिल सकते हैं लाखों रुपये, कानूनी सलाह लेंगे पीएफ आयुक्त
रूपनारायणपुर : हिंदुस्तान केबल्स लिमिटेड (एचसीएल ) के श्रमिकों के भविष्य निधि (पीएफ) की राशि को बाजार में  निवेश कर प्रबंधन ने 50 करोड़ रुपये की राशि अजिर्त की है. यह खुलासा क्षेत्रीय पीएफ आयुक्त आरीफ रोहानी और संस्था के यूनियन नेताओं की उपस्थिति में प्रबंधन के सलाहकार और पीएफ का हिसाब किताब देख रहे देवाशीष सामंत ने किया. उन्होंने कहा कि 25 करोड़ रुपये पीएफ विभाग ने वर्ष 2010 में ही अपने सरप्लस खाते में ले लिया था. शेष 25 करोड़ रुपये  का बांड अब भी प्रबंधन के पास पड़ा है. जिसकी जानकारी प्रबंधन के कुछ आला अधिकारियों के अलावा और किसी को नहीं थी. 
 
50 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आय के खुलासे के बाद यूनियन नेताओं ने इस राशि का वितरण सभी पूर्व श्रमिकों में करने का प्रस्ताव क्षेत्नीय पीएफ आयुक्त श्री रोहानी को दिया है. 
 
श्री रोहानी ने कहा कि 25 करोड रु पये, जो पीएफ के सरप्लस खाते में जमा है, उसे प्राप्त करने के लिए उच्च न्यायालय का आदेश चाहिए. प्रबंधन के पास जो 25 करोड़ रु पया है, उस राशि को श्रमिकों के बीच वितरण करने का कोई कानूनी प्रावधान है या नहीं, इस विषय पर वे कानूनी सलाहकारों से बात करेंगे.  
 
बीते बुधवार को संस्था के सीटू नेता मधुसूदन घोष, एटक नेता गौतम लाहिडी और एचएमएस नेता बी बाग सीटू के जिला सचिव विनय कृष्ण चक्र बर्ती के नेतृत्व में संस्था के श्रमिकों के वर्ष 1992 और 1997 के पीएफ की एरियर राशि के भुगतान के मुद्दे पर अपना लिखित पक्ष देने और उसपर चर्चा के लिए क्षेत्नीय पीएफ आयुक्त श्री रोहानी के पास गये. उसी दौरान संस्था के सलाहकार श्री सामंत भी वहां थे. जिन्होंने 50 करोड़  रुपये का खुलासा किया. 
 
सीटू नेता श्री घोष ने बताया कि पीएफ एक्ट 1952 की धारा सात के तहत एचसीएल संस्था को पीएफ की छूट मिली थी. जिसके तहत कंपनी प्रबंधन ने अपनी ईकाइयों में ही पीएफ ट्रस्टी बोर्ड का गठन किया था. पीएफ के सारे पैसे का हिसाब किताब ट्रस्टी बोर्ड के पास ही होता था. ट्रस्टी बोर्ड पीएफ के पैसे का निवेश सरकारी मान्यता प्राप्त पॉलिसी में करता था.
 
उससे जो मुनाफा होता था, उस पैसे से श्रमिकों के पीएफ का भुगतान होता था. भुगतान के बाद जो अतिरिक्त मुनाफा बचता था, पुन: उसका पुन: निवेश होता था. इस अतिरिक्त निवेश की राशि बढ़कर 50 करोड़ रु पये हो गयी है. ट्रस्टी बोर्ड के नियमानुसार इस अतिरिक्त मुनाफे की राशि को सभी श्रमिकों के बीच समान रूप से वितरण करने का प्रावधान है. 
 
इसी प्रावधान के तहत कंपनी की हैदराबाद इकाई में अतिरिक्त मुनाफे का सम्पूर्ण राशि का वितरण सभी श्रमिकों के बीच हुआ.  जिससे वहां प्रति श्रमिक को वीआरएस के बाद रूपनारायनपुर इकाई के श्रमिक की तुलना में 15 से 20 लाख रु पया पीएफ का अतिरिक्त प्राप्त हुआ. वर्ष 2010 में विभिन्न शिकायतों के आधार पर पीएफ विभाग ने रूपनारायणपुर इकाई की पीएफ की छूट समाप्त कर सारा पैसा जब्त कर अपने पास ले लिया. जिसके कारण उस समय तक अतिरिक्त मुनाफा के 25 करोड़ रुपये पीएफ के सरप्लस खाते में जमा हो गया. जबकि यह पैसा श्रमिकों का था. इस प्रकार की और 25 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि प्रबंधन के पास है.  पीएफ आयुक्त से श्रमिको के इस पैसे को श्रमिकों के बीच वितरण करने को लेकर गुहार लगाई गई है. उन्होंने कहा कि श्रमिकों का पैसा श्रमिकों के पास पहुंचाने के लिए जो भी कानूनी लडाई लड़नी पड़ेगी, वह लड़ी जायेगी.  
 
एचसीएल में वर्ष 1992 और 1997 में हुए वेतन समझौते के उपरांत श्रमिकों के बढ़े हुए वेतन के आधार पर श्रमिकों के वेतन और कंपनी का अनुदान से पीएफ के लिए बढ़ी हुई राशि का पैसा काटा गया. लेकिन इसे पीएफ के खाते में जमा नहीं किया गया. इस राशि की मांग वर्षों से की जा रही है. 
 
कंपनी की बंदी के बाद पैकेज में सरकार ने इस राशि के भुगतान के लिए 75.81 करोड रु पये आवंटित किये. लेकिन श्रमिकों को इसका भुगतान नहीं हुआ. इस राशि के तत्काल भुगतान के लिए सीटू, एटक और एचएमएस नेताओं ने संयुक्त रूप से पीएफ आयुक्त के पास गुहार लगायी. जिसपर पीएफ आयुक्त श्री रोहानी ने वहां उपस्थित कंपनी के सलाहकार श्री सामंत को कहा कि जल्द से जल्द सभी श्रमिकों के पीएफ के बकाये के हिसाब के साथ पैसा जमा कराया जाये. इसका भुगतान पीएफ विभाग करेगा. सीटू नेता श्री घोष ने कहा कि पीएफ आयुक्त श्री रोहानी के सकारात्मक रवैये से यह अनुमान लगाया जा रहा है कि श्रमिको को जल्द पैसे का भुगतान हो जायेगा.
 

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