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asansol

  • Aug 19 2019 5:40AM
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जाली नोट मामले में आरोपी दोषमुक्त करार

जिला कोर्ट के फास्ट ट्रैक द्वितीय कोर्ट  की जज सरन्या सेन प्रसाद ने दिया निर्णय

अधिवक्ता समीर भट्टाचार्य का दावा- पुलिस ने फंसाया था झूठे मामले में आरोपी को

तथ्य पेश करने में नाकाम रहे पुलिस जांच अधिकारी, कोर्ट ने खारिज किये आरोप
 
आसनसोल : जाली रुपया छापने,  ट्रांसफर करने और जाली रुपये बरामदगी मामले में तीन साल बाद आरोपी सीतारामपुर गांधीनगर निवासी राजेन्द्र रजक बाईज्जत बरी हो गये. आसनसोल जिला अदालत के फास्ट ट्रैक द्वितीय कोर्ट की जज सरन्या सेन प्रसाद ने यह निर्णय दिया. आरोपी के अधिवक्ता समीर भट्टाचार्य ने बताया कि पुलिस ने उनके मुवक्किल को झूठे मामले में फंसाया था. पुलिस अदालत में कोई ठोस सबूत पेश न कर सकी. अदालत ने आरोप खारिज कर दिया.
 
सनद रहे कि 30 जुलाई,  2016 को कुल्टी थाना पुलिस ने न्यू  रोड बस स्टैंड के पास से श्री रजक को गिरफ्तार किया था. उनके पास से पांच सौ रुपये के नौ जाली नोट बरामद किये गये. जाली नोट की पुष्टि आरबीआई के विशेषज्ञों ने की. उनके खिलाफ कुल्टी थाना कांड संख्या 339/2016 में आईपीसी की धारा 489ए (जाली रुपया छापने, सजा उम्र कैद), 489बी (जाली रुपया ट्रांसफर करने, सजा 10 साल सश्रम कारावास) और 489सी (जाली रुपया बरामद, सजा सात साल सश्रम कारावास) के तहत मामला दर्ज किया. श्री रजक के अधिवक्ता श्री भट्टाचार्य ने बताया कि उनके मुवक्किल को अदालत में चालान करने के 12 दिन बाद वे जमानत पर रिहा हुए. पिछले तीन वर्षों से मामले की सुनवाई चल रही थी.
 
उन्होंने अदालत में पुलिस पर झूठा मामला दर्ज करने का आरोप लगाया और उसे साबित किया. उन्होंने कहा कि उनका तर्क था कि रात आठ बजे न्यूरोड बस स्टैंड के पास भीड़भाड़ वाले इलाके से श्री रजक को पुलिस गुप्त सूचना के आधार पर गिरफ्तार कर जाली नोट बरामद किया. इस घटना का एक भी चश्मदीद गवाह पुलिस पेश नहीं कर पाई.
 
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