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asansol

  • Jun 13 2019 2:12AM
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ओपीडी रहे बंद, हजारों मरीज निराश होकर लौटे

प्रशासन व मरीजों के परिजनों के तमाम आग्रह-विनय के बाद भी गतिरोध

चिकित्सकों ने सुरक्षा की मांग पर दिया धरना, निकाले जुलूस, लगाये काले बैज

दुर्गापुर महकमा अस्पताल में मिली ओपीडी सेवा 
 
दुर्गापुर : नीलरतन मेडिकल कॉलेज अस्पताल में सोमवार की रात मरीज  की मौत को लेकर हुए संघर्ष तथा जूनियर चिकित्सकों की हड़ताल के समर्थन में  आइक्यू सिटी अस्पताल के चिकित्सक भी हड़ताल की तथा अस्पताल के समक्ष धरना दिया. इसके कारण अस्पताल में इलाज के लिए आये मरीजों को काफी परेशानी हुई. पूरे दिन जूनियर चिकित्सक हड़ताल पर रहे. इनडोर मेडिकल सेवा जारी  रही. उधर विधाननगर महकमा अस्पताल में भी चिकित्सकों ने हड़ताल की.
 
लेकिन महकमा प्रशासन के हस्तक्षेप तथा मरीजों को सुविधा देने के लिए की गई पहल के बाद  महकमा अस्पताल  में आउटडोर खोला गया. चिकित्सक उपस्थित हुए तथा कुछ मरीजों को इलाज हुआ. चिकित्सकों ने जुलूस निकाल कर प्रतिवाद किया तथा अस्पताल अधीक्षक को मांगों से संबंधित ज्ञापन सौंपा. 
 
ऐसी ही स्थिति   ईएसआई अस्पताल की भी रही. आउटडोर गेट  बंद होने से मरीज परेशान रहे.  चिकित्सा व्यवस्था बिगड़ जाने के कारण मरीजों एवं परिजनों में आक्रोश  था. मरीजों के परिजनो  का कहना है कि चिकित्सा  सेवा ठीक नहीं होने से   मरीज को काफी परेशानी हो रही है. महकमा प्रशासन के हस्तक्षेप के बाद चिकित्सक काला बैज लगाकर कार्य पर लौटे.

पुरुलिया में डेढ़ घंटे बाद सेवा में लौटे चिकित्सक 
 
आद्रा : एनआरएस (कोलकाता) मे  जूनियर चिकित्सकों की पिटाई के विरोध में पांच संगठनों की हड़ताल के आह्वान से पुरूलिया जिले में भी इसका असर रहा. बुधवार को जिला के डॉक्टरों ने डेढ़ घंटा चिकित्सा सेवा बंद रखी. इसके बाद सेवा आरंभ कर दी गई. पुरुलिया जिला तृणमूल के अध्यक्ष शांतिराम महतो ने कहा कि डॉक्टरों की पिटाई की निंदा पार्टी कर चुकी है.
 
पर पूरूलिया जिला के डॉक्टरों ने जिस तरह से इस घटना की प्रतिवाद कर मात्र डेढ़  घंटे के अंदर पुन: अपनी परिसेवा आरंभ की. वह प्रशंसनीय है. पुरुलिया सदर अस्पताल तथा रघुनाथपुर सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में दूर-दराज इलाकों से मरीज इलाज के लिए आते हैं. डॉक्टरों ने अपनी कमीज पर काली पट्टी लगाकर तथा सदर अस्पताल परिसर में रैली निकाल कर एनआरएस घटना का प्रतिवाद किया. उन्होंने कहा कि वे कभी भी किसी मरीज का नुकसान नहीं चाहते हैं. सभी अस्पताल तथा डॉक्टरों को सुरक्षा प्रदान की जाये.
 
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