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asansol

  • May 19 2019 2:43AM
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भाजपा जिलाध्यक्ष ने कहा: राशि पार्टी की

सीआइडी जांच अधिकारियों को पत्र लिख कर स्वीकारोक्ति

चुनावी खर्च से बची राशि, पार्टी कार्यालय भेजे जाने का दावा

सीआइडी का कोर्ट में दावा- प्रदेश कोषाध्यक्ष के निर्देश पर ट्रांजेक्शन
 
आसनसोल : आसनसोल स्टेशन परिसर से एक करोड़ रूपये के साथ गिरफ्तार दिल्ली निवासी लक्ष्मीकांत साव तथा बारासात निवासी गौतम चट्टोपाध्याय फिलहाल अपराध अनुसंधान विभाग (सीआइडी) की रिमांड में है. 
 
इसी बीच पश्चिम बर्दवान भाजपा जिलाध्यक्ष लखन घड़ुई ने सीआइडी अधिकारियों से लिखित स्वीकार किया है कि वह राशि भाजपा की है. इसके साथ ही यह मामला और रहस्यमय तथा हाई प्रोफाइल हो गया है. मजे की बात है कि सीआइडी जांच अधिकारी का कोर्ट में दावा है कि यह राशि भाजपा के प्रदेश कोषाध्यक्ष सावर धनानिया के निर्देश पर बर्नपुर से इन दोनों आरोपियों ने लिया था.
 
क्या है मामले का फ्लैश बैक
 
लक्ष्मीकांत तथा गौतम को आसनसोल स्टेशन पर ब्लू रंग के बैग के साथ संदिग्धावस्था में जीआरपी ने गिरफ्तार किया था. बैग से पांच सौ और दो हजार रुपये के नोटों की गड्डियों के रूप में दो करोड़ रुपये मिले. गौतम ने कहा कि यह रूपये भाजपा के हैं. वह भाजपा प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष का निजी सचिव है. उसे राशि कोलकाता ले जाना है. श्री घोष ने स्वीकार किया कि वह उनका कभी निजी सचिव था. लेकिन व्यवसाय के नाम पर उनसे अलग हो गया था.
 
उन्होंने इस राशि के बारे में कोई जानकारी होने से इंकार कर दिया. चुनावी दौर होने के कारण आयकर विभाग ने भी इसकी जांच की. रुपये से संबंधित कोई कागजात सामने नहीं आये. जीआरपी ने दोनों को आसनसोल जिला कोर्ट में पेश कर चार दिनों की रिमांड पर लिया. इसी बीच राज्य सरकार ने इसकी जांच का दायित्व सीआइडी को दे दिया. चार दिनों के रिमांड के बाद शुक्रवार को दोनों को सीआइडी ने कोर्ट में पेश किया तथा इसमें भाजपा नेताओं की संलिप्तता बता पुन: 10 दिनों की रिमांड पर लिया.
 
सीआइडी को मिले तथ्य
 
सीआइडी ने कोर्ट को बताया है कि दोनों भाजपा के करीबी है. उन्हें भाजपा प्रदेश कोषाध्यक्ष श्री धनानिया ने स्कार्पियों से खड़गपुर से बर्नपुर भेजा था. यहां आने के बाद उन्होंने किसी शेखर गुप्ता से कोड लिया. उस कोड के आधार पर उन्होंने बर्नपुर के व्यवसायी बजरंगी लाल अग्रवाल से एक करोड़ रुपये लिए. ऑटो से आसनसोल स्टेशन पहुंचे तो जीआरपी ने दबोच लिया.
 
भाजपा नेताओं की रही दोहरी भूमिका
 
इन दोनों की गिरफ्तारी के दिन ही भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष श्री घोष ने कहा कि उन्हें इस राशि के बारे में कोई जानकारी नहीं है. उसी समय पश्चिम बर्दवान भाजपा जिलाध्यक्ष श्री घडुई ने कहा कि भाजपा को बदनाम करने के लिए यह साजिश की जा रही है. भाजपा का इससे कुछ लेना-देना नहीं है. लेकिन चार दिन बाद ही जब सीआइडी ने प्रदेश कोषाध्यक्ष धनानिया को इस मामले में घसीट लिया तो भाजपा जिलाध्यक्ष श्री घड़ुई बचाव में आ गये. उन्होंने कोर्ट परिसर में सीआइडी अपराधियों को लिखित दिया कि यह राशि भाजपा की है.
 
क्या कहते हैं जिलाध्यक्ष
 
जिलाध्यक्ष श्री घड़ुई ने कहा कि यह राशि पार्टी मुख्यालय से उन्हें चुनाव खर्च के लिए दी गई थी. लेकिन जितनी राशि मिली थी, उतनी राशि खर्च नहीं हो सकी. बची राशि पार्टी फंड में लौटानी थी. इसलिए उन्होंने दो मई को बैंक खाते से यह राशि निकासी की. इस राशि को इनके माध्यम से कोलकाता भेजा जा रहा था. उन्होंने दावा किया कि राशि से संबंधित सभी दस्तावेज उनके पास हैं.
 
उठ रहे हैं कई सवाल
 
यदि जिलाध्यक्ष श्री घड़ुई की बात को स्वीकार कर भी लिया जाये तो कई सवाल उठ रहे हैं. चुनाव आयोग ने संसदीय चुनाव में एक प्रत्याशी के लिए अधिकतम 70 लाख रुपये खर्च करने का प्रावधान किया था. उनका दावा है कि चुनावी खर्च  के बाद भी एक करोड़ रुपये बच गये तो पार्टी हाई कमान ने आसनसोल संसदीय क्षेत्र के लिए कितनी राशि आवंटित की थी? भ्रष्टाचार तथा काले धन के खिलाफ कार्रवाई का दावा करनेवाले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी तथा भाजपा ने क्या स्वयं चुनाव आयोग से निर्धारित राशि से अधिक राशि आवंटित की? केंद्र सरकार का प्रावधान है कि 50 हजार से अधिक रूपये का लेने-देन होने पर बैंक के माध्यम से लेन-देन होना चाहिए, ताकि यह लेन-देन सरकारी एजेंसियों की नजर में रहे, तो आखिर भाजपा नेताओं ने कैश क्यों निकाला? यदि यह राशि बैध थी तथा भाजपा के खाते की थी, तो उसे बैंक के माध्यम से पार्टी के बैंक खाते में क्यों नहीं ट्रांसफर कर दिया गया? इन दोनों की गिरफ्तारी के समय जब आयकर अधिकारियों ने उनसे पूछताछ की तो श्री घड़ुई ने आयकर अधिकारियों को क्यों नहीं सभी संबंधित दस्तावेज पेश किया? सनद रहे कि आयकर अधिकारियों ने कोर्ट से दोनों से पूछताछ करने की अनुमति मांगी थी, जिसे फिलहाल खारिज कर दिया गया.
 
सवाल यह भी है कि इतनी बड़ी राशि पार्टी के किसी वरीय पदाधिकारी के माध्यम से क्यों नहीं भेजी गई? पार्टी प्रत्याशी बाबुल सुप्रियो स्वयं कोलकाता में प्रचार कर रहे थे, जिलाध्यक्ष भी यह राशि लेकर जा सकते थे, फिर पार्टी से अदने समर्थक को इतनी बड़ी राशि की क्यों जिम्मेवारी दी गई? बर्नपुर के व्यवसायी बजरंग लाल अग्रवाल के पास किस हैसियत से यह राशि रखी गई थी? श्री अग्रवाल स्वयं सीआइडी के सामने क्यों नहीं आ रहे हैं? उनके घर से 15 मई को बरामद 19,25,300 रूपये किसके हैं?    
 
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