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asansol

  • Mar 14 2019 1:48AM

विधि छात्रों ने दिया केएनयू में धरना

 समय पर परीक्षा लेने व रिजल्ट जारी करने की रखी मांग

बार काउंसिल ऑफ इंडिया की मान्यता न होने से परेशानी  
 
आसनसोल : काजी नजरुल यूनिवर्सिटी के अधीन संचालित कालेजों में एलएलबी कोर्स को बार काउंसिल ऑफ़ इंडिया ( बीसीआई) द्वारा मान्यता न मिलने के प्रतिवाद में बुधवार को एलएलबी फाइनल वर्ष के स्टूडेंट्स ने यूनिवर्सिटी के समक्ष प्रदर्शन किया तथा धरना दिया.
 
दुर्गापुर इन्स्टीच्युट ऑफ़ लिगल स्टडीज (दुर्गापुर), लॉ कालेज (दुर्गापुर, राजबांध) के सौकड़ों छात्र छात्राओं ने यूनिवर्सिटी के मुख्य द्वार के पास प्रदर्शन किया और कुलपति से जवाब मांगा. प्रदर्शनकारियों के आक्रोश को देखते हुए सुरक्षा गार्ड ने प्रशासनिक भवन के गेट पर ताला जड़ दिया. कुलपति डॉ साधन चक्रवर्ती के जल्द ही मामले के समाधन के  आश्वासन के बाद प्रदर्शन समाप्त किया गया. उन्होंने कहा कि एलएलबी कोर्स की मान्यता के मुद्दे पर यूनिवर्सिटी प्रबंधन और राज्य शिक्षा विभाग  बार काउंसिल ऑफ इंडिया के संपर्क में है. बीसीआई अधिकारियों से पिछ्ले सप्ताह भी बात की गयी है. केएनयू से फॉर्मेट ओर ड्रॉफ्ट की कॉपी बीसीआई को भेजी गई है.  जल्द ही बीसीआई की टीम केएनयू में मुयायना करने आयेगी. 
 
छात्रों ने कहा कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) से इस यूनिवर्सिटी को मान्यता न मिलने के कारण प्रबंधन  अंतिम परीक्षा नहीं ले पा रहा है. परीक्षा ले भी लिया तो डिग्री जारी नहीं कर पायेगा. बगैर बीसीआई अनुमोदनवाली यूनिवर्सिटी की डिग्री के आधार पर कोई छात्र एडवोकेट नहीं बन सकता है. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार शिक्षा के नाम पर छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ कर रही है. बुनियादी सभी सुविधा के बगैर एक के बाद एक यूनिवर्सिटी खोली जा रही है और छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है.
 
यूनिवर्सिटी प्रबंधन ने छात्रों को आश्वास्त किया कि मान्यता के लिए अपील की गयी है. जल्द ही मान्यता मिल जाएगी. छात्रों ने इसे सफेद झूठ बताते हुए कहा कि बीसीआई से उन्हें एक पत्र के जवाब में कहा गया है कि उपकुलपति ने बीसीआई में अनुमोदन के लिए कोई कागजात ही जमा नहीं किया है.
 
दुर्गापुर लॉ कॉलेज के छात्र एस मुखर्जी ने कहा कि वर्ष 2014 तक उनका कॉलेज बर्दवान यूनिवर्सिटी के अधीन था. वर्ष 2015 से दुर्गापुर के दोनों लॉ कॉलेज को केएनयू के अंतर्गत ला दिया गया. जिसका छात्रों ने जमकर विरोध किया था. केएनयू का बीसीआई से अनुमोदन नहीं मिला है. इसे लेकर छात्र लगातार आंदोलन कर रहे है. तीन साल के कोर्स वाले छात्रों के लिए लगातार समय बर्बाद हो रहा है. सरकार इस दिशा में उदासीन है. इस मुद्दे को लेकर राज्य के शिक्षा मंत्री, उच्च शिक्षा के वरीय अधिकारियों को भी नियमित पत्राचार किया गया, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुयी.
 
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