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arwal

  • Jan 3 2019 2:06PM

उपेंद्र कुशवाहा ने की शिक्षा सुधार यात्रा की शुरुआत, कहा- 'सर्टिफिकेट लाओ नौकरी पाओ' के नीति से बरबाद हुई सूबे की शिक्षा व्यवस्था

उपेंद्र कुशवाहा ने की शिक्षा सुधार यात्रा की शुरुआत, कहा- 'सर्टिफिकेट लाओ नौकरी पाओ' के नीति से बरबाद हुई सूबे की शिक्षा व्यवस्था

कुर्था / अरवल : बिहार में शिक्षा व्यवस्था बिल्कुल ध्वस्त हो चुकी है. इसे फिर से पटरी पर लाने के लिए राष्ट्रीय लोक समता पार्टी प्रतिबद्ध है. उक्त बातें गुरुवार को प्रखंड मुख्यालय में राष्ट्रीय लोक समता पार्टी के बैनर तले आयोजित शिक्षा सुधार जन अधिकार कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय लोक समता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष सह पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री उपेंद्र कुशवाहा ने कहीं. साथ ही उन्होंने कहा कि बिहार के किसानों मजदूरों और गरीबों के बच्चों के लिए ध्वस्त शिक्षा व्यवस्था को फिर से पटरी पर लाकर नौजवान छात्रों के बर्बाद हो रहे भविष्य को बचाना है. उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार के कार्यकाल में शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह चौपट हो चुकी है. शिक्षक बच्चों को पढ़ाने के बजाय खिचड़ी बनाने और बिल्डिंग बनाने में व्यस्त हैं. उन्हें ठेकेदार बनाया जा रहा है. इस कारण शिक्षा व्यवस्था की स्थिति खस्ताहाल होती जा रही है. इसे फिर से पटरी पर लाने के लिए राष्ट्रीय लोक समता पार्टी प्रतिबद्ध है. 

कुर्था पहुंचते ही अमर शहीद जगदेव प्रसाद के शहीद स्थल और आदमकद प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर उपेंद्र कुशवाहा ने कार्यक्रम की शुरुआत की. कार्यक्रम की अध्यक्षता राष्ट्रीय लोक समता पार्टी के जिलाध्यक्ष सुभाष चंद्र यादव ने की. वहीं, मंच संचालन राष्ट्रीय लोक समता पार्टी के प्रदेश महासचिव पप्पू वर्मा ने किया. इस मौके पर पूर्व केंद्रीय मंत्री नागमणि, उदय सम्राट, संजीत कुशवाहा, रालोसपा प्रखंड अध्यक्ष सदन कुशवाहा, सुजीत रजक सुधीर सिंह समेत कई गणमान्य लोग उपस्थित थे.

उच्च गुणवत्तावाले आयोग का गठन कर शिक्षकों की हो बहाली  

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार को राष्ट्रीय लोक समता पार्टी ने 25 सूत्री मांगों का ज्ञापन सौंपा है. इनमें विद्यालयों के विभिन्न स्तरों पर शिक्षकों की बहाली के लिए बीपीएससी के समान उच्च गुणवत्ता वाले अलग-अलग आयोग का गठन किये जाने की मांग की गयी है. साथ ही विभिन्न स्तरों पर शिक्षकों के लिए रिक्त पदों पर शीघ्र बहाली के साथ शिक्षक पात्रता परीक्षा के लिए अनिवार्य रूप से ऑनलाइन पद्धति अपनाये जाने की बात कही गयी है. वर्ष 2003 और उसके बाद बहाल शिक्षकों का पुनर्मूल्यांकन आयोग द्वारा किया जाये. मूल्यांकन में जो शिक्षक उत्तीर्ण हों, वह शिक्षक पद पर बने रहे और जो शिक्षक मूल्यांकन में उत्तीर्ण ना हो सकें, उन्हें दूसरे विभागों में समायोजित किया जाये. राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा परिषद द्वारा निर्धारित मानकों के अनुसार ही शिक्षकों की बहाली की जाये. प्राथमिक विद्यालयों में भी कम से कम एक शिक्षक विज्ञान का हो तथा अन्य स्तर के विद्यालयों में भी विषयवार शिक्षकों की बहाली हो. सभी स्तर पर नियुक्त शिक्षकों को पूर्ण वेतनमान दिये जाएं. विद्यालयों में उर्दू पढ़नेवाले छात्रों की उपलब्धता के आधार पर अनिवार्य रूप से उर्दू शिक्षकों की बहाली की जाये. शिक्षकों को गैर शैक्षणिक कार्यों से पूर्ण रूप से मुक्त रखा जाये. शिक्षकों को निर्माण कार्यों के ठेके से पूर्ण रूप से अलग रखा जाये. प्राथमिक, माध्यमिक, उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों, महाविद्यालयों, विश्वविद्यालयों, तकनीकी संस्थानों सहित अन्य शिक्षण संस्थानों में शिक्षक और छात्रों की उपस्थिति के लिए बायोमेट्रिक पद्धति अपनायी जाये. विद्यालयों में नामांकित छात्रों की संख्या के अनुरूप आधारभूत संरचना का निर्माण हो तथा विद्यालयों में प्रयोगशाला एवं पुस्तकालय की व्यवस्था अनिवार्य रूप से हो. सभी कक्षाओं में बच्चों के मूल्यांकन के आधार पर ही प्रोन्नति हो. कक्षा में छात्रों की उपस्थिति कम-से-कम 75 प्रतिशत होने पर ही परीक्षा की अनुमति दी जाये. देश के कुछ अन्य राज्यों की तरह मिड-डे-मील के संचालन की जवाबदेही अन्य संस्थानों को देकर शिक्षकों को मिड-डे-मील से पूर्ण रूप से मुक्त रखा जाये. सत्र शुरू होने से पहले विद्यार्थियों को अनिवार्य रूप से पुस्तकों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाये. मुफ्त एवं अनिवार्य शिक्षा अधिनियम के तहत आर्थिक रूप से कमजोर परिवार से आनेवाले बच्चों के लिए निजी विद्यालयों के नामांकन में आरक्षित 25% कोटा को अभियान चलाकर भरा जाये. निजी विद्यालयों में हो रही गड़बड़ियों को रोकने के लिए विशेष नियामक की व्यवस्था की जाये. शिक्षक प्रशिक्षण विद्यालयों महाविद्यालयों के शिक्षकों की उपस्थिति के आधार से लिंक करते हुए बायोमेट्रिक पद्धति से कराने की व्यवस्था की जाये. अनुदानित विद्यालयों महाविद्यालयों को दिये जानेवाले अनुदान प्रत्येक वर्ष नियत समय पर देना सुनिश्चित किया जाये. चंदा प्राप्त विद्यालयों-महाविद्यालयों के शिक्षक एवं शिक्षकेतर कर्म चारियों की बहाली में राज्य सरकार के आरक्षण रोस्टर का शत-प्रतिशत अनुपालन सुनिश्चित किया जाये. विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों, तकनीकी एवं अन्य शिक्षण संस्थानों में शिक्षक एवं शिक्षकेतर कर्मचारियों के रिक्त पदों को अविलंब भरा जाये. विश्वविद्यालयों-महाविद्यालयों में छात्र संघ का चुनाव नियमित रूप से हो. राज्य से बाहर मानता प्राप्त तकनीकी शिक्षण संस्थानों में पढ़ रहे पिछड़ा अति पिछड़ा अनुसूचित एवं अनुसूचित जनजाति के छात्रों को सरकार द्वारा घोषित छात्रवृत्ति समय पर अनिवार्य रूप से मिले. विद्यालयों-महाविद्यालयों में व्यावसायिक विषयों के विषय की बहाली अनिवार्य रूप से हो. मदरसे का आधुनिकीकरण अविलंब किया जाने समेत 25 सूत्री मांगों का ज्ञापन राज्य सरकार को दी गयी है. 

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