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arwal

  • Apr 16 2019 12:41AM
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जो लोग काम मांगेंगे, उन्हें काम दिया जायेगा : डीडीसी

 अरवल : एक दशक पहले देश में लागू हुए महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम से मजदूरों और लघु व सीमांत किसानों के पक्ष में एक बड़ी उम्मीद की गयी थी. 

 
ग्रामीण क्षेत्र के प्रत्येक परिवार को एक वर्ष में 100 दिनों के रोजगार की गारंटी से मिलने वाली मजदूरी उसके भरण-पोषण के लिए अच्छा सहारा मानी जाती है. सूखे और अकाल की स्थिति में भी इससे बहुत उम्मीदें थीं, किंतु पिछले एक दशक के अनुभव इस दिशा में ज्यादा बेहतर नहीं रहे. 
 
 मनरेगा के नये दिशा-निर्देशों में ऐसे कामों को शामिल किया गया था, जिनसे गांव में जल और मिट्टी संरक्षण हो सके और आजीविका विकास की दिशा में गांव आगे बढ़ सकें. अत: मनरेगा में कई सार्वजनिक व हितग्राही मूलक कामों को जोड़ा गया. 
 
मनरेगा में शामिल हितग्राही मूलक कामों, जैसे खेतों में पालाबंदी, कंटूर ट्रेंच का निर्माण, खेत तालाब, आदि शामिल है. इससे खेती में सुधार होने और पानी व मिट्टी के संरक्षित होने की संभावना सामने आती है. 
 
मनरेगा योजना के तहत जिले में बेरोजगार जॉब कार्डधारी मजदूरों को 100 दिन काम देने की गारंटी है, लेकिन बीते वित्तीय वर्ष में महज 307 लोगों को 100 दिन का काम मिला. सबसे कम कलेर प्रखंड के जॉब कार्ड धारी मजदूर का है, जिसमें 17 घर के परिवार के मिलाकर 100 दिन का काम पूरा हुआ. 
 
आंकड़े के अनुसार अरवल प्रखंड में 22, कलेर प्रखंड में 17, करपी प्रखंड में 106, कुर्था प्रखंड में 112 तथा वंशी प्रखंड में 50 घर के सदस्यों को 100 दिन का काम मिल पाया जो बहुत ही कम है. 
 
आंकड़े के मुताबिक जिला के सभी प्रखंड मिलाकर 125735 घर के 177637 व्यक्ति का जॉब कार्ड के लिए निबंधन किया गया था जिसमें 278 घर के 677 लोगों का जॉब कार्ड रद्द कर दिया गया. 
 
बीते वित्तीय वर्ष में 9744 घर के 12229 व्यक्ति को जॉब कार्ड बनाया गया. आंकड़े बताते हैं कुल जॉब कार्डधारियों में 53630 घर के 65054 व्यक्ति ने काम की मांग किया. मांग के विरोध में 53600 घर के 65019 व्यक्ति को काम दिया गया. सभी को मिलाकर 2080982 दिन काम मिला. 
 
 इस संबंध में उपविकास आयुक्त डीडीसी राजेश कुमार ने बताया कि जिन लोगों ने काम की मांग की है, उन्हें काम दिया गया है. जो लोग काम मांगेंगे, उन्हें काम दिया जायेगा.
 
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