Advertisement

allahabad

  • Sep 12 2015 9:09PM

यूपी सरकार को HC से झटका, 1.75 लाख शिक्षामित्रों की नियुक्ति रद्द

यूपी सरकार को HC से झटका, 1.75 लाख शिक्षामित्रों की नियुक्ति रद्द

इलाहाबाद : उत्तर प्रदेश की सपा सरकार को इलाहाबाद हाई कोर्ट से जबरदस्त झटका लगा है. हाई कोर्ट ने शनिवार को प्राइमरी स्कूलों में तैनात 1 लाख 75 हजार शिक्षा मित्र शिक्षकों की नियुक्ति को रद्द कर दिया है. हाई कोर्ट ने इस नियुक्ति प्रक्रिया को असंवैधानिक करार देते हुए कहा कि नियमों में ढील अथवा संशोधन करने का अधिकार राज्य के पास नहीं है. कोर्ट के इस फैसले के बाद अब शिक्षा मित्रों का भविष्य अधर में लटक गया है. 

इलाहाबाद हाईकोर्ट में शनिवार को मुख्य न्यायधीश डीवाई चंद्रचूड़ की डिविजन बेंच ने यह आदेश दिया. मुख्य न्यायधीश के अलावा न्यायाधीश दिलीप गुप्ता एवं न्यायधीश यशवंत वर्मा बेंच के जज थे. इन शिक्षकों की नियुक्ति का आदेश बीएसए ने साल 2014 में जारी किया था, जिसे कोर्ट ने रद्द कर दिया है. प्रदेश में 1.71 लाख शिक्षामित्र हैं, इनकी नियुक्ति बिना टीईटी परीक्षा के ग्राम पंचायत स्तर पर मेरिट के आधार पर की गयी थी. 2009 में तत्कालीन बसपा सरकार ने इनके दो वर्षीय प्रशिक्षण की अनुमति नेशनल काउंसिल फार टीचर्स एजुकेशन (एनसीटीई) से ली. इसी अनुमति के आधार पर इन्हें दूरस्थ शिक्षा के अंतर्गत दो वर्ष का बीटीसी प्रशिक्षण दिया गया.

इसके साथ ही 2012 में सत्ता में आयी सपा सरकार ने इन्हें सहायक अध्यापक पद पर समायोजित करने का निर्णय लिया. पहले चरण में जून 2014 में 58,800 शिक्षामित्रों का सहायक अध्यापक के पद पर समायोजन हो गया. जबकि दूसरे चरण में जून में 2015 में 73,000 शिक्षामित्र सहायक अध्यापक बनाये गये. वहीं, तीसरे चरण का समायोजन होने से पहले ही मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया. बीटीसी प्रशिक्षु शिवम राजन सहित कई युवाओं ने समायोजन के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर दी. सुप्रीम कोर्ट ने शिक्षामित्रों के समायोजन पर रोक लगाते हुए हाईकोर्ट से विचाराधीन याचिकाओं पर अंतिम निर्णय लेने को कहा. जिसके बाद इस खंडपीठ ने यह ऐतिहासिक फैसला सुनाया है.

Advertisement

Comments

Other Story

Advertisement