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  • Jul 29 2014 5:13PM

फ्लिपकार्ट ने जुटाये एक अरब रुपये, 7 अरब डालर का हुआ फ्लिपकार्ट

फ्लिपकार्ट ने जुटाये एक अरब रुपये, 7 अरब डालर का हुआ फ्लिपकार्ट

बैंगलूरु: भारत की सबसे बडी ई कामर्स फर्म फ्लिपकार्ट ने निवेशकों के एक समूह से एक अरब डालर (6,000 करोड रुपये) से अधिक धन जुटाया है. देश में अत्यधिक प्रतिस्पर्धी आनलाइन खरीददारी श्रेणी में यह अब तक जुटाई गई सबसे बडी रकम है.

हालांकि कंपनी ने अपनी नई शेयरधारित ढांचे का खुलासा नहीं किया. सूत्रों ने कहा कि धन जुटाने के इस ताजा दौर के साथ फ्लिपकार्ट का मूल्य करीब 7 अरब डालर (लगभग 42,000 करोड रुपये) आंका जा रहा है. 

मौजूदा निवेशकों, टाइगर ग्लोबल मैनेजमेंट और नैसपर्स के अलावा सिंगापुर के सावरेन वेल्थ फंड, जीआईसी, एक्सेल पार्टनर्स, डीएसटी ग्लोबल, आईकोनिक कैपिटल, मार्गन स्टैनले इनवेस्टमेंट मैनेजमेंट और सोफिना ने भी इस दौर में फ्लिपकार्ट में धन लगाया है. बैगलूरु स्थित कंपनी फ्लिपकार्ट इस धन का इस्तेमाल अपनी आनलाइन व मोबाइल सेवाओं का विस्तार करने, अनुसंधान व विकास जैसे क्षेत्रों पर ध्यान देने, ग्राहकों को बेहतर अनुभव प्रदान करवाने और उनकी संख्या बढाने पर करेगी.

नकदी के भंडार के साथ कंपनी अधिग्रहण की भी संभावना तलाश रही है जिससे उसे वियरेबेल्स व रोबोटिक्स जैसी नई प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में उतरने में मदद मिल सकती है. फ्लिपकार्ट के सह संस्थापक व सीईओ सचिन बंसल ने संवाददाताओं को बताया, 'इस धन का इस्तेमाल भारत में दीर्घकालीन रणनीतिक निवेशों, खासकर मोबाइल प्रौद्योगिकी में किया जाएगा.' उन्होंने कहा कि कंपनी में आनलाइन खरीददारी को निरंतर आसान बनाने व प्रौद्योगिकी के माध्यम से अधिक लोगों तक पहुंचने पर ध्यान दिया जा रहा है.

कंपनी की आईपीओ लाने की योजना पर बंसल ने कहा, 'आईपीओ पर बिल्कुल भी विचार नहीं किया जा रहा है.' मई में फ्लिपकार्ट ने 21 करोड डालर धन जुटाया था जिससे निजी इक्विटी फर्म डीएसटी ग्लोबल को निवेशक के तौर पर बोर्ड में शामिल किया गया.

4 लाख रुपये से की थी कंपनी की शुरुआत
उल्लेखनीय है कि 2007 में महज चार लाख रुपयों से सचिन और बिन्नी बंसल ने कंपनी शुरू की. 2014 में यह कंपनी 30,000 करोड़ की बताई जा रही है. 
लेकिन सबसे ख़ास बात यह है कि अमेजन छोड़कर आए इन दोनों उद्यमियों सचिन और बिन्नी बंसल ने भारत में इस अलग तरह के कारोबार को बिल्कुल शून्य से शुरू कर इस मुकाम तक पहुंचाया है. ये ट्रेंड सेटर कामयाबी है जो भारत में ख़रीददारी का तरीक़ा बदल रही है. 

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