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  • Jun 18 2014 7:15PM
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सिविल सेवा परीक्षाओं में हिन्दी और ग्रामीण छात्रों ने लगाया उपेक्षा का आरोप, दिल्ली में किया विरोध प्रदर्शन

सिविल सेवा परीक्षाओं में हिन्दी और ग्रामीण छात्रों ने लगाया उपेक्षा का आरोप, दिल्ली में किया विरोध प्रदर्शन

नयी दिल्ली: देश की प्रतिष्ठित सिविल सेवा परीक्षाओं में अंग्रेजी को तरजीह देने और इस परीक्षा में आईआईटी, आईआईएम और मेडिकल संकाय के छात्रों के बढ़ते दबदबे के विरोध में भारी संख्या में छात्रों ने विरोध प्रदर्शन किया.  छात्रों ने राजधानी दिल्ली के कई जगहों में इसका विरोध किया. आंदोलनकारी छात्रों ने प्रधानमंत्री आवास के सामने प्रदर्शन करके प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी को ज्ञापन सौंपना चाहते थे लेकिन उन्हें रेसकोर्स मेट्रो स्टेशन के पास ही आगे बढ़ने से रोक दिया गया.

 
हालांकि बाद में केंद्रीय मंत्री वेंकैया नायडू ने प्रदर्शनकारी छात्रों से मुलाकात की और उनकी मांगों पर गौर करते हुए इस विषय को आगे बढाने का भरोसा दिया. प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने अपनी मांग सामने रखते हुए कहा, सिविल सेवा परीक्षा का प्रारुप  ऐसा बना दिया गया है जिससे ग्रामीण पृष्ठभूमि के छात्रों के लिए काफी कठिन परिस्थिति पैदा हो गई है. परीक्षा के सीसैट पत्र का प्रारुप हमारी चिंता का अहम विषय है. उन्होंने परीक्षा के प्रारुप को समावेशी बनाने की मांग की.  उन्होंने कहा कि हमने इस विषय पर सरकार का ध्यान आकर्षित करने के लिए विभिन्न स्थानों पर विरोध प्रदर्शन किए हैं. छात्र सुबह आठ बजे से ही विरोध प्रदर्शन की तैयारी में लगे थे अलग अलग स्थानों से छात्र एक जगह जमा हुए और विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया.
 
छात्रों के विरोध प्रदर्शन में इस बात को लेकर काफी निराशा थी कि उनके हिंदी माध्यम से होने की वजह से उनके परिणाम पर असर पड़ता है. इस प्रतिष्ठित परीक्षा में हिन्दी और ग्रामीण पृष्ठभूमि के छात्रों की उपेक्षा किये जाने का आरोप लगाते हुए पिछले कुछ समय से छात्र विभिन्न मंचों पर यह मांग उठाते रहे हैं. 2013 की सिविल सेवा परीक्षा के परिणाम में शीर्ष 25 स्थान प्राप्त करने वालों में 24 अंग्रेजी माध्यम से परीक्षा देने वाले हैं. इसमें 9 इंजीनियरिंग संकाय, 3 मेडिकल और 4 विज्ञान संकाय से हैं. 
 
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