किसानों के हित में बीज ग्राम योजना

By Prabhat Khabar Digital Desk
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राष्ट्रीय स्तर पर किसानों की मदद के लिए कई योजनाएं हैं, जिन्हें बिहार-झारखंड में लागू किया गया है. इसमें बीज ग्राम योजना भी शामिल है. यह योजना खेती में सुधार और किसानों को सहायता देने के लिए चलायी जा रही है. इस योजना का मकसद किसानों को प्रमाणित और अच्छे बीच सुविधा से और कम पैसे में मिल सकें. देश भर के किसानों का यह अनुभव है कि बीज और खाद के नाम पर उन्हें ठगी का शिकार बनाने वालों का गिरोह हर जगह मौजूद है. अक्सर किसानों को ऐसे बीज बेचे जाते हैं, जो न तो प्रमाणित हैं और न ही दावे के मुताबिक उपज दे सकते हैं. इससे किसानों को भारी नुकसान तो होता ही है, देश की कृषि उपज के लक्ष्य को भी यह प्रभावित करता है. इसलिए राष्ट्रीय स्तर पर यह प्रयास किया जा रहा है कि किसानों को अच्छे बीज उपलब्ध कराये जाएं. इसी के तहत बीज ग्राम योजना चल रही है. इसके तहत चुने हुए गांवों में बीज उत्पादन की व्यवस्था की गयी है. इस योजना का लाभ हर किसान का अधिकार है, लेकिन अभी इसे सीमित क्षेत्र में ही लागू किया गया है. इसके तहत हर साल राज्य के सभी क्षेत्रों में निश्चित संख्या में बीज ग्राम स्थापित किये जाने हैं. इसके लिए किसानों का पहले चयन किया जाना है. फिर उसे प्रशिक्षण दिया जाता है. उसके बाद उसे अनुदान तथा अन्य सुविधाएं दी जाती हैं. हालांकि इस योजना में भी बड़े पैमाने पर गड़बड़ियों या कमियों की शिकायतें आती रही हैं. फिर भी बीज के मामले में यह बड़ी पहल है. गड़बड़ियों को रोकने के लिए किसान और गांव के लोग आगे आ सकते हैं. वे इस मामले में सूचना का अधिकार का इस्तेमाल कर सकते हैं.

सुदूर गांवों पर ज्यादा फोकस

बीज ग्राम योजना के तहत उन क्षेत्रों पर ज्यादा फोकस है, जो सामान्य तौर पर सुदरवर्ती हैं और जहां के किसानों को सुविधाजनक रूप से प्रमाणित बीज नहीं मिलते. उन किसानों को अपने ही गांव में बीज उत्पादन कर आसपास के किसानों को लाभान्वित करने के लिए प्रेरित किया जाना है. वैसे इस योजना का प्रसार सभी किसानों तक करने का लक्ष्य है. इस योजना का उद्देश्य गुणवत्तायुक्त बीज की उपलब्धता सुदूर ग्राम स्तर पर कराने हेतु बीज उत्पादन के लिए बीज ग्राम स्थापित करना है.

योजना में अनुदान की सीमा

बीज ग्राम योजना में अनुदान का भी प्रावधान है. राज्य के सभी प्रखंडों के चुने हुए गांवों में खरीफ की खेती के मौसम में धान, अरहर एवं उड़द तथा रबी के मौसम में गेहूं, चना, मसूर एवं मटर फसल के बीज उत्पादन के लिए बीज ग्राम स्थापित किया जाना है. चुने गये एक बीज ग्राम में अधिकतम 100 किसानों को सम्मिलित किया जाना है. धान, गेहूं फसल में आधा एकड़ तथा अरहर, उड़द, चना, मसूर एवं मटर फसल में एक चौथाई एकड़ में बीज उत्पादन के लिए आधार बीज 50 प्रतिशत अनुदान पर उपलब्ध कराया जाता है. आधार बीज के साथ राज्य योजना से बायोफर्टिलाइजर नि:शुल्क देने की भी योजना है.

अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति पर विशेष ध्यान

इस योजना के तहत कुल राशि एक खास हिस्सा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के किसानों पर खर्च करने का प्रावधान है. ऐसा यह मान कर किया जा रहा है कि इन वर्गो के किसानों को परंपरागत बीज से खेती करने की पुरानी प्रथा से निकालने के लिए उन पर ज्यादा फोकस करने की जरूरत है. दरअसल अअ भी इन वर्गो के किसानों में खेती की नयी तकनीकों को लेकर जागरूकता की दर कम है. वे पुराने तरीके से क्षेती करते हैं. इससे उन्हें उनकी मेहनत और लागत के अनुपात में लाभ नहीं मिलता. दूसरी बात कि इन वर्गो की आर्थिक स्थिति में सुधार के लिए भी यी जरूरी है कि उनके खेती के पैटर्न में बड़ा बदलाव लाया जाये.

किनसे से लें योजना का लाभ

इस योजना का लाभ लेने के लिए किसान अपने क्षेत्र के किसान सलाहकार, कृषि समन्वयक, प्रखंड कृषि पदाधिकारी या जिला कृषि पदाधिकारी से संपर्क कर सकते हैं. इस सबकी जवाबदेही योजना के तहत निश्चित है. पंचायत स्तर के संबंधित सरकारी सेवक की यह जवाबदेही है कि वह पंचायत के चयनित बीज ग्राम के 100 किसानों की सूची तैयार करे और उसे प्रखंड स्तरीय शिविर में बीज उपलब्ध कराये. योजना के तहत लाभुक किसान के खेत में बीज के आच्छादन से लेकर बिचड़े की रोपनी तक उसे सुनिश्चित करना है. वह बड़ी कड़ी है. इस कड़ी से किसान जुड़ कर योजना के बारे में और विस्तार से जान सकते हैं तथा लाभ ले सकते हैं.

इस तरह होता है किसानों का चयन

बीज ग्राम योजना के तहत लाभान्वित करने के लिए किसानों के चयन की प्रक्रिया तय है. इस प्रक्रिया की जानकारी सभी किसानों को देना संबंधित पदाधिकारियों की जवाबदेही है. कृषकों का चयन प्रखंड कृषि पदाधिकारी द्वारा कृषि समन्वयक एवं किसान सलाहकार के सहयोग से किया जाता है.

किसानों के चयन का आधार

इस योजना के तहत किसानों बीज ग्राम बनाने के लिए प्रेरित किया जाना है. चूंकि इसके तहत उन्हें अनुदान तथा दूसरी सरकारी सुविधाएं भी मिलती हैं. इसलिए उनके चयन के लिए निर्धारित मापदंडों को बहुत स्पष्ट रखा गया है. इसमें इन शर्तो का पालन किया जाना है :

पहली शर्त कि जो किसान बीज ग्राम बनाने के इच्छुक हैं और सभी योग्यता रखते हैं, उन्हें की इस योजना के तहत चुना जायेगा.

दूसरी शर्त कि जिन किसानों को पहले साल योजना का लाभ मिल चुका है, उन्हें अगले साल योजना में शामिल नहीं किया जायेगा. यानी एक ही किसान बार-बार लाभान्वित नहीं होगा, ताकि बाकी किसानों को भी योजना का लाभ लेने का अवसर मिल सके.

तीसरी शर्त कि जिस किसान का चयन इस योजना के तहत बीज उत्पादन के लिए किया जाता है, उसे इस बात के लिए सहमत करना कि वह इसका लाभ उस क्षेत्र के संबद्ध किसानों को बिना किसी भेदभाव के देगा.

चौथी शर्त कि बीज ग्राम बनाने वाले किसान को बीज उत्पादन की सहायता या अनुमति देने के पहले उन किसानों से उसे जोड़ा जाये, जिन्हें इसका लाभ दिया जाना है, ताकि दोनों के बीच समन्वय बना रहे और उत्पादित बीजों का सदुपयोग हो सके.

कौन ले सकता है लाभ

बीज ग्राम योजना का लाभ देने के लिए कृषि विभाग ने कुछ मापदंड तय किये हैं. ऐसा इसलिए भी किया गया है कि अभी बीज ग्राम योजना का विस्तार बीजों की मांग का अनुपात में बहुत कम है. सभी तरह के किसानों को कृषि विभाग अभी बीज उपलब्ध नहीं करा सकता है. इसलिए इस योजना का लाभ पाने योग्य किसानों के चयन के लिए मानदंड तय किये गये हैं. ये मानदंड किसानों की स्थिति पर आधारित हैं. इसके आधार पर जिन किसानों को इन किसानों को इस योजना का लाभ दिया जाना है :

प्रगतिशील कृषक, जो आधुनिक कृषि तकनीक अपनाते हों.

जिनके पास अपनी जमीन हो या बटाई पर खेती करते हो एवं आधा या एक - चौथाई एकड़ जमीन पर बीज उत्पादन करने के लिए इच्छुक हों.

जिनके पास सिंचाई की पर्याप्त व्यवस्था या जो यह सुनिश्चित करते हों के वे ऐसी व्यवस्था कर सकते हैं.

बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में ऊंची भूमि की उपलब्धता हो.

कैसे काम करता है बीज ग्राम

फसलों के उत्पादन में वृद्धि के लिए गुणवत्तापूर्ण बीज की उपलब्धता आवश्यक है. ‘गुणवत्तापूर्वक बीजों का उत्पादन एवं वितरण के लिए आधारभूत संरचना का विकास एवं सुदृढ़ीकरण’ योजनांतर्गत बीज उत्पादन हेतु बीज ग्राम स्थापित किया जाना है. बीज ग्राम में तैयार बीजों को चुने हुए किसानों को उपलब्ध कराया जाना है.

ऐसे मांगें सूचना

बात चाहे फसल बीमा की हो या बीज ग्राम योजना की, आपको अगर ऐसा लगता है कि इनमें किसी प्रकार की गड़बड़ी की जा रही है या पारदर्शिता नहीं बरती जा रही है, तो आप सूचना का अधिकार का इस्तेमाल कर सकते हैं. इसके लिए दस रुपये के शुल्क के साथ संबंधित कार्यालय के जन सूचना पदाधिकारी को आवेदन दे कर जानकारी प्राप्त कर सकते हैं.

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