चलो पापा को दें सरप्राइज गिफ्ट

By Prabhat Khabar Digital Desk
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बच्चो, कल फादर्स डे है. तुम सबने पापा के लिए कुछ-न-कुछ प्लान तो जरूर किया होगा. है न? जैसे कि पापा को क्या गिफ्ट देना है, कौन-सा कार्ड देना है, कहां से शॉपिंग करनी है वगैरह. पापा तुम्हारे गिफ्ट से खुश भी बहुत होंगे, आखिर उनके बच्चे ने उन्हें इतने प्यार से गिफ्ट जो दिया है. वैसे, हमारे पास इससे भी शानदार एक नहीं, पांच गिफ्ट आइडियाज हैं. इस गिफ्ट को पाकर पापा तुम्हें गले से लगा लेंगे और कहेंगे- थैक्यू बेटा. तो चलो, प्लान करें. थोड़ा सरप्राइज है और हो सकता है कि थोड़ा कठिन भी लगे, लेकिन पापा के लिए इतना तो बनता ही है..है न!

गिफ्ट 1 : टाइम से पढ़ाई
अक्सर पापा की शिकायत रहती है तुम टाइम से पढ़ाई नहीं करते. जब पढ़ने का समय होता है, तब खेलते रहते हो. असल में पापा चाहते हैं कि तुम सिर्फ खेलो-कूदो ही नहीं, बल्कि समय से पढ़ाई भी करो, ताकि बेस स्ट्रांग हो. कई बार तुम जल्दी-जल्दी में होमवर्क फिनिश कर लेते हो और पढ़ने के लिए कहने पर कहते हो कि होमवर्क तो कर लिया न. होमवर्क कर लेना ही काफी नहीं. हर दिन टाइम से पढ़ाई जरूरी है. तो क्यों न फादर्स डे पर पापा को यही सरप्राइज दें कि बिना उनके कहे ही टाइम पर पढ़ने बैठ जाएं. पापा के लिए यह किसी महंगे गिफ्ट से भी अच्छा है.

गिफ्ट 2 : अब से टीवी देखना कम
डोरेमॉन, सिनचेन, छोटा भीम ये सब काटरून बच्चों को खूब पसंद हैं, है न! इन्हें देखते-देखते कब सुबह से शाम हो जाती है, पता ही नहीं चलता. तब तो पापा गुस्सा होंगे ही. पता है, जब मैं छोटी थी, तब मुङो भी काटरून देखना पसंद था. मेरे पापा भी मुङो टीवी देखने नहीं देते थे. तब मुङो भी गुस्सा आता था. फिर पापा ने एक दिन मुङो प्यार से समझाया- बेटा, अगर मैं तुम्हें पूरे दिन सिर्फ आम ही खाने को दूं तो? मैंने कहा- पूरे दिन एक ही चीज कैसे खा सकती हूं भला? पापा ने झट से कहा- ठीक वैसे ही पूरे टाइम अगर तुम टीवी देखोगी तो वह भी नुकसान करेगा. पढ़ाई डिस्टर्ब होगी और आंखों पर चश्मा भी लग सकता है. मुङो बात समझ आ गयी और तय कर लिया कि दिन में सिर्फ एक घंटे ही काटरून देखना है. पापा काफी खुश हुए. अब बारी तुम्हारी है. सरप्राइज गिफ्ट के तहत उनसे वादा करो कि एक-डेढ़ घंटे ही टीवी देखोगे. अगर ऐसा करते हो, तो तुम्हें भी रिटर्न गिफ्ट मिलेगा.

गिफ्ट 3 : मस्ती थोड़ा कम
इन दिनों तुम गरमी की छुट्टियां एंजॉय कर रहे होगे. आखिर यही तो समय होता है, जब हम नाना-नानी, दादा-दादी या बुआ के घर छुट्टियां बिताने जाते हैं. या फिर हमारे यहां रिलेटिव्स आते हैं. ऐसे में तुम्हारे पापा अक्सर तुम्हें समझाते होंगे कि बेटा ज्यादा मस्ती मत करना. तुम सोचते होगे कि यह क्या बात हुई, छुट्टी है तो मस्ती क्यों नहीं करेंगे. तुम अपनी जगह सही हो, लेकिन पापा की बात भी समझो कि आखिर वे ऐसा क्यों कहते हैं. इसलिए कि मस्ती के चक्कर में

कहीं तुम खुद का या दूसरे का नुकसान न कर दो. पता है, यह तुम्हारे लिए उनकी फिक्र है. वे तुम्हारा केयर करते हैं. तो तीसरा गिफ्ट पापा के लिए यही है कि छुट्टियों में तुम मस्ती किया करो, लेकिन संभल कर. सुबह से शाम तक मस्ती बिल्कुल नहीं. कुछ अच्छी चीजें सीखने की कोशिश करो.

गिफ्ट 4 : मम्मी की बात मानो
चलो एक इमेजिन करते हैं. इमेजिन यह करो कि शाम में पापा ऑफिस से घर आये हों और मम्मी उनके सामने तुम्हारी तारीफ कर रही हैं. तारीफ सुन पापा इतने खुश हुए कि उन्होंने तुमको गले से लगा लिया. अब तुम सोच रहे होगे कि ऐसा हो ही नहीं सकता, क्योंकि हर रोज तो मम्मी मेरी शिकायत ही करती हैं और पापा से डांट पड़ती है. पर मैं बताऊं, यह सच हो सकता है. आज से ही तय करो कि मम्मी की हर बात माननी है. वैसे भी मम्मी तो कुछ ही चीजों के लिए डांटती हैं, जैसे समय पर खाने के लिए, पढ़ने के लिए और शरारत नहीं करने के लिए, ताकि तुम अच्छे बच्चे बनो. आस-पड़ोस के अंकल-आंटी भी तुम्हारी तारीफ करें. अगर उनकी बात मानोगे, तो फायदा तो तुम्हारा ही है. फिर तो तुम मम्मी के ही नहीं, पापा के भी फेवरेट हो जाओगे. यह चौथा गिफ्ट पापा को खूब पसंद आयेगा.

गिफ्ट 5 : जिद नहीं करना
इस बात से जरूर तुम्हारे घर के लोग परेशान होंगे! सच बताना है न. तो आज से जिद करना बंद. यह थोड़ा मुश्किल है, लेकिन इतना भी नहीं. पापा-मम्मी आपकी हर जरूरत का खयाल रखते हैं, पर जब तुम किसी चीज की जिद पकड़ कर बैठ जाते हो, तो उन्हें बहुत बुरा लगता है. किसी भी चीज के लिए जिद न पकड़ो.

अगर वे किसी चीज के लिए मना करते हैं, तो पहले यह मान लो कि वह सही हैं. मन न माने, तो उनसे पूछ लो कि वे क्यों मना कर रहे हैं. तुमने काउंट किया है कि रोज कितनी बार जिद करते हो? आज से ही इसे कम करो. पापा के लिए इससे अच्छा गिफ्ट कोई नहीं हो सकता. तो इस बार फादर्स डे को यादगार बनाने के लिए और पापा को सरप्राइज गिफ्ट देने के लिए तैयार हो जाओ. मुङो बताना कि तुम्हें इसका रिटर्न गिफ्ट क्या मिला.

प्रस्तुति : पुष्पा शर्मा

कैसे शुरू हुआ फादर्स डे
अमेरिकी महिला सोनारा लुई स्मार्ट ने सोचा कि क्यों नहीं मदर्स डे की तरह फादर्स डे भी मनाया जाये. जब वह 16 वर्ष की थीं, तभी मां एलन विक्टोरिया का निधन हो गया था. पिता विलियम जैकसन स्मार्ट ने ही उन्हें संभाला. वे 1862 के अमेरिकी गृहयुद्ध में प्रमुख योद्धाओं में से एक थे. सोनारा ने पिता के त्याग, प्रेम और साहस के प्रति श्रद्धा जताने के लिए उनके जन्मदिन 19 जून, 1810 को पहला फादर्स डे मनाया. 1913 में इस दिवस को मान्यता देने संबंधी बिल अमेरिकी सरकार ने स्वीकार किया. 1916 में राष्ट्रपति वुड्रो विल्सन की सहमति मिली, पर बिल पास होने में लंबा वक्त लगा. राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन ने 1972 में जून माह के तीसरे रविवार को राष्ट्रीय स्तर पर फादर्स डे घोषित कर दिया.

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