पड़ोसियों के हित में मजबूत भारत

By Prabhat Khabar Digital Desk
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थिम्पू (भूटान) से ब्रजेश कुमार सिंह

संपादक-गुजरात, एबीपी न्यूज

मोदी ने भूटान की संसद के दोनों सदनों को किया हिंदी में संबोधित

पड़ोसी देशों के साथ अच्छे रिश्ते की भारत की प्रतिबद्धता दोहराते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि ‘मजबूत व खुशहाल’ भारत क्षेत्र के छोटे देशों की मदद कर सकता है. उन्होंने कहा कि ‘टेररिज्म डिवाइड्स, टूरिज्म, यूनाइट्स.’ दो दिन की अपनी यात्रा का समापन करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने भूटान को आश्वासन दिया कि पिछली सरकारों ने जो भी बचनबद्धताएं दी थीं, उनकी सरकार उसे पूरा करेगी.

‘टेररिज्म डिवाइड्स, टूरिज्म यूनाइट्स’

बतौर प्रधानमंत्री अपनी पहली विदेश यात्र के तहत नरेंद्र मोदी भूटान में करीब 27 घंटे रह कर भारत लौट आये. इस दौरान उन्होंने भारत की विदेश नीति के बारे में अपने नजरिये की झलक दे दी. सोमवार की सुबह भूटान की संसद के दोनों सदनों की साझा बैठक के दौरान अपने संबोधन में मोदी ने न सिर्फ भूटान के साथ भारत के सदियों पुराने रिश्तों को याद किया, बल्कि ये भी कह डाला कि सशक्त भारत न सिर्फ भूटान, बल्कि सभी सार्क देशों के हित में है. यदि भारत सशक्त और समृद्ध होगा, तो इससे पड़ोसी देशों की भी सहायता हो सकेगी.

भूटान की संसद में नरेंद्र मोदी का भाषण करीब 45 मिनट का रहा. उनके भाषण को सुनने के लिए न केवल भूटान के प्रधानमंत्री शेरिंग टोबगे की अगुआई में भूटान नेशनल एसेंबली के सभी 47 सदस्य मौजूद थे, बल्कि नेशनल काउंसिल ऑफ भूटान के 25 सदस्य भी. इसके अलावा भूटान के गणमान्य व्यक्ति और सैन्य अधिकारी भी बड़ी तादाद में उपस्थित थे. इस दौरान भूटान की संसद की एक बड़ी खासियत नजर आयी. दोनों सदनों के सभी सदस्य सदन में आने के बावजूद अगले 40-45 मिनट तक लगातार खड़े रहे,

जब तक कि मेहमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को साथ लेकर अध्यक्ष सदन में नहीं आ गये. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भूटान की संसद को हिंदी में संबोधित किया. मोदी ने लिखा हुआ भाषण नहीं पढ़ा, बल्कि आदत के मुताबिक बिना किसी नोट्स के धाराप्रवाह बोले. मोदी की एक और खासियत यहां नजर आयी. उन्होंने अपने भाषण की शुरु आत में भूटान की राष्ट्रभाषा जोंखा में सुप्रभात कहा. वहीं, भाषण की समाप्ति पर भी जोंखा में ही धन्यवाद भी दिया.

इसी साल चुनावी सभाओं के दौरान भी मोदी देश के जिस हिस्से में जाते थे, वहां की स्थानीय भाषा में कुछ लाइनें जरूर बोलते थे. भूटान में वर्ष 2008 से जनतांत्रिक व्यवस्था के तहत संसदीय चुनाव शुरू हुए थे. 2008 में ही तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भूटान की संसद के संयुक्त अधिवेशन को संबोधित किया था. उसके बाद से मोदी दूसरे ही भारतीय प्रधानमंत्री हैं, जिन्होंने भूटान की संसद के संयुक्त अधिवेशन को संबोधित किया है.

अपने संबोधन के दौरान मोदी ने भूटान की सरकार को आश्वस्त किया कि भूटान को लेकर वह भारत सरकार की नीति में कोई परिवर्तन नहीं करने वाले हैं, बल्कि आपसी सहयोग की योजनाओं में और इजाफा ही करने वाले हैं. मोदी ने कहा कि भारत व भूटान के संबंध सिर्फ शासकीय नहीं, बल्कि सांस्कृतिक भी हैं. भूटान की लोकतांत्रिक व्यवस्था के साथ स्थानीय जनता व महाराजा की जोरदार तारीफ की, जिन्होंने खुद पहल कर भूटान में लोकतंत्र का रास्ता खोला था. मोदी ने अपने भाषण के दौरान भूटान और भारत के पूर्वोत्तर राज्यों के बीच खेल महोत्सव के विचार को भी सामने रखा. यही नहीं, भारत, भूटान और नेपाल के बीच हिमालय को केंद्र में रख कर टूरिज्म को बढ़ाने की बात भी की.

भूटान में पीएम

- 600 मेगावाट की पनिबजली परियोजना की रखी आधारशिला

- महाराजा ने दिया विदाई भोज, सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन

प्रस्ताव

- भूटान व भारत के पूर्वोत्तर राज्यों के बीच संयुक्त खेल महोत्सव का आयोजन

- हिमालय अध्ययन पर एक विश्वविद्यालय स्थापित करने का

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