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kuch khaas

  • May 25 2014 6:36AM
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शी जिनपिंग : अमेरिका के लिए बड़ी चुनौती

शी जिनपिंग : अमेरिका के लिए बड़ी चुनौती

देखते-देखते बदल गया चीन

60 वर्षीय शी जिनपिंग चीन के राष्ट्रपति हैं. वह चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव भी हैं. उन्होंने आर्थिक सुधारों के कार्यक्रम को चीन में न सिर्फ आगे बढ़ाया है, बल्कि गवर्नेस में सुधार के लिए भी काम किया है. वह चीन में माओ के बाद पांचवीं पीढ़ी के नेता हैं. हाल ही में अंतरराष्ट्रीय समाचार पत्रिका ‘टाइम’ ने उन्हें सबसे प्रभावशाली नेताओं की सूची में स्थान दिया है. आज पढ़ें शी जिनपिंग के बारे में.

जिनपिंग के पूर्व चीन की राजनीति में सरकार व कम्युनिस्ट पार्टी पर उस पुरानी पीढ़ी के नेताओं का आधिपत्य रहा था, जो माओ के क्रांतिकारी आंदोलन से बहुत करीब से जुड़े रहे थे. शी जिनपिंग अपने देश की उस अपेक्षाकृत नयी पीढ़ी का प्रतिनिधित्व करते हैं, जो 1949 की कम्युनिस्ट क्रांति के बाद पैदा हुई. मार्च 2013 में शी जिनपिंग ने चीन का राष्ट्रपति पद संभाला. इसके पहले हू जिंताओ के उत्तराधिकारी के रूप में नवंबर, 2012 में उन्हें चीन की कम्युनिस्ट पार्टी का महासचिव बनाया गया था.  

पार्टी प्रमुख का पद स्वीकार करने के बाद अपने भाषण में शी ने कहा था, ‘‘पार्टी के पास कई बड़ी चुनौतियां हैं और ऐसी कई परेशानियां हैं पार्टी के भीतर जिन्हें सुलझाना होगा, खास तौर से भ्रष्टाचार, लोगों से अलग होना और नौकरशाही, जिसे कुछ पार्टी अधिकारियों की वजह से बढ़ावा मिला है.’’ डेंग शियाओ पेंग के बाद शी जिनपिंग चीन के सर्वाधिक युगांतकारी नेता के रूप में सामने आये हैं. उनके काम करने के तरीके और सोच ने दुनिया भर के नेताओं का ध्यान अपनी ओर खींचा है. इस अति-प्रतिस्पद्र्धी वैश्विक बाजार में अपने देश को सफलता दिलाये जाना ही उनका एकमात्र एजेंडा है.

जिनपिंग अपने भाषणों में बार-बार ‘चीनी स्वप्न’ की बात करते हैं. वह कहते हैं कि यह सपना हर चीनी का सपना है, जिसमें हर व्यक्ति के लिए बेहतर जिंदगी की हसरत है, आमलोगों की एक अच्छे जीवन की ख्वाहिश को पूरा करना ही हमारा मकसद है. उनकी नजर में भ्रष्टाचार देश की सबसे बड़ी समस्या है. सत्ता में आने से पहले शी जिनपिंग को लेकर आशंका जतायी जा रही थी कि क्या वे प्रभावी ढंग से शासन कर पायेंगे? वह समय ऐसा था जब चीन की कम्युनिस्ट पार्टी आपसी मतभेदों से घिरी थी. लेकिन यह शी जिनपिंग की राह में रोड़े अटका नहीं सकी.

उन्होंने चीन की सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी में अपनी हैसियत बेहद मजबूत बना ली है. बीते एक साल में शी जिनपिंग ने कई उल्लेखनीय काम करके दिखाये हैं.

वह दशकों बाद चीन के अंदर बहुप्रतीक्षित आर्थिक और सामाजिक सुधार को दिशा दे रहे हैं. शी जिनपिंग के ‘नये सपने’ के तहत चीन को नया विजन मिला है. चीन के लोगों को लग रहा है कि अगर वे सामूहिक तौर पर मिल कर काम करते हैं तो इससे देश की प्रतिष्ठा बढ़ेगी. उन्होंने देश के अंदर भ्रष्ट नौकरशाही को हटाने के लिए अभियान चलाया हुआ है यह हर दिन सुर्खियों में आ रहा है.

उनके शासन के दौरान  मीडिया और इंटरनेट पर सेंसरशिप बढ़ी है. इस दौरान उन्होंने देश की एक बच्चे की राष्ट्रीय नीति में बदलाव लाने की घोषणा की है और ठप पड़े लेबर कैंपों को शुरू करने का निर्देश भी दिया है. शी की मुखर विदेश नीति के चलते चीन के पड़ोसी देशों का भरोसा डगमगाया है, लेकिन जिनपिंग बदलाव की नीति पर बने हुए हैं.

चीन की सरकार को पोलित ब्यूरो स्टैंडिंग कमेटी के सदस्य सामूहिक रूप से चलाते रहे हैं. लेकिन अब लग रहा है कि शी जिनपिंग का कद उनके साथियों के मुकाबले बढ़ गया है. चीन के पूर्व नेता माओ-त्से-तुंग और डेंग शियाओपिंग की तरह. जब नवंबर में सरकार ने सुधार की शुरुआत की तो माना गया कि चीन के प्रधानमंत्री ली शिजियांग इसमें अहम भूमिका निभायेंगे क्योंकि चीन में आर्थिक नीतियों की देखरेख प्रधानमंत्री करते रहे हैं, लेकिन सारे सुधारों में शी जिनपिंग के नाम की चर्चा हो रही है. 

इतना ही नहीं राष्ट्रीय सुरक्षा और देश के संरचना के फिर से निर्माण का फैसला करने वाली कमेटी और चीन के इंटरनेट सेक्टर की देखरेख के लिए बनी समिति के मुखिया भी वही हैं. उनके कार्यकाल में अब तक करीब 40 हजार सरकारी कर्मचारियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई हुई है जबकि 10 हजार कर्मचारियों को नौकरी से हटाया जा चुका है. इनमें से ज्यादातर कर्मचारी निम्न पदों पर तैनात हैं. लेकिन माना जा रहा है कि वह बड़ी मछलियों पर भी कार्रवाई करने के लिए तैयार हैं.

अभी हाल ही में चीन(उरूमची) में हुई आतंकवादी घटना पर शी जिनपिंग ने कहा कि हिंसा और आतंकवाद के खिलाफ संघर्ष में कोई ढील नहीं दी जायेगी और आतंकवाद के बढ़ते खतरे से निबटने के लिए निर्णायक कदम उठाए जायेंगे. अलगाववादियों के खिलाफ लड़ाई ’लंबी,जटिल और निर्णायक’ होगी. ऐसा करके जिनपिंग ने दुनिया को आतंकवाद के विरुद्ध लड़ाई में भी अपनी हिस्सेदारी दर्शा दी है.

 

चीन बड़ी मजबूती के साथ रूस का मुख्य व्यापारिक साझीदार बन चुका है. रूस और चीन आपसी व्यापार को बढ़ाते हुए अपने व्यापारिक व आर्थिक संबंधों की गुणवत्ता में परिवर्तन करना चाहते हैं. चीन आज दुनिया का दूसरे नंबर का खुशहाल देश बन चुका है और अगले दशक में वह दुनिया की सब से बड़ी व खुशहाल अर्थव्यवस्था वाले मुल्क में परिवर्तित होने की कगार पर खड़ा है. जानकार बताते हैं कि इस सदी में अमेरिका के लिए सबसे बड़ी चुनौती और अवसर, दोनों बन सकता है चीन.

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