नरेंद्र मोदी का ट्रूडो पर सितम, मैक्रों पर करम क्यों?

By Prabhat Khabar Digital Desk
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नरेंद्र मोदी का ट्रूडो पर सितम, मैक्रों पर करम क्यों?
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फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों सोमवार को बनारस में थे और नरेंद्र मोदी ने उन्हें अपना संसदीय क्षेत्र बड़े चाव से दिखाया. ख़ास नाव में बैठकर दोनों ने गंगा दर्शन भी किए.

सौर ऊर्जा संगठन की बैठक में हिस्सा लेने दुनिया के कई नेता पहुंचे थे लेकिन सबसे ज़्यादा सुर्खियां बटोरीं मैक्रों ने.

मोदी दुनिया के जिन नेताओं को तरजीह देते हैं, प्रोटोकॉल ताक पर रखते हुए उनकी अगवानी के लिए ख़ुद एयरपोर्ट पहुंचते हैं. मैक्रों के मामले में भी ऐसा ही हुआ. वो जब हवाई जहाज़ से उतरे तो मोदी नीचे उनका इंतज़ार कर रहे थे.

जब ट्रूडो आए थे तब क्या हुआ था

अब कुछ दिन पहले की बात याद कीजिए. कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो भारत आए तो नरेंद्र मोदी उनकी अगवानी के लिए नहीं पहुंचे थे. यही नहीं, मोदी ने उनसे मिलने में भी कई दिन लगा दिए थे.

ट्रूडो और उनका परिवार भारतीय परिधान में भारत के कई जगह घूमता रहा लेकिन मोदी से उनकी मुलाक़ात लौटने से पहले ही हो सकी. ट्रूडो का भारत दौरा यूं भी खालिस्तानी समर्थकों की वजह से विवादों में रहा.

ये भी कहा गया कि कनाडा सरकार खालिस्तान समर्थकों को लेकर नरम रुख़ रखती है, इस वजह से भारत और मोदी कुछ ख़फ़ा हैं और ट्रूडो के दौरे में यही बात सामने आ गई है. हालांकि, अपनी तरफ़ से ट्रूडो और कनाडा, दोनों ने खालिस्तान का समर्थक होने से इनकार किया.

कनाडा कितना ज़रूरी?

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कारोबारी ताल्लुक़ात की नज़र से देखें तो भी कनाडा भारत के लिए ख़ासी अहमियत रखता है, ऐसे में ये बात खलनी ज़ाहिर है कि क्या ट्रूडो से 'बेरुख़ी' की वजह सिर्फ़ उनका तथाकथित खालिस्तान समर्थक रुख़ था.

आंकड़े भी इस बात की गवाही देते हैं. सर्विसेज़ की बात करें तो फ्रांस की तुलना में कनाडा के साथ भारत के कारोबारी रिश्तें ज़्यादा महत्व रखते हैं. फ्रांस की तुलना में कनाडा को भारत कहीं ज़्यादा निर्यात करता है.

इसके अलावा प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) की बात करें तो फ्रांस और कनाडा के बीच ज़्यादा फ़ासला नहीं है लेकिन फिर भी कनाडा आगे खड़ा है.

फ्रांस की तुलना में कनाडा कहां?

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भारतीय विदेश मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक भारत और कनाडा के बीच व्यापार साल 2010 में 3.21 अरब डॉलर था जो साल 2016 में बढ़कर 6.05 अरब डॉलर पर पहुंच गया.

हालांकि, कनाडा के वैश्विक कारोबार में भारत की हिस्सेदारी महज़ 1.95% है जो ये भी दिखाता है कि दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय कारोबार का स्तर कितनी आगे तक ले जाने की संभावनाएं हैं.

इसके अलावा कनाडा में भारतीय मूल के 12 लाख से ज़्यादा लोग रहते हैं जो वहां की कुल आबादी में 3% हिस्सा रखते हैं.

भारतीयों के लिए पढ़ाई का ठिकाना भी

जो भारतीय कंपनियां कनाडा में बड़े पैमाने पर काम फैलाए हैं, उसमें आदित्य बिड़ला ग्रुप, एस्सार स्टील, टाटा कंसल्टेंसी सर्विस, टाटा स्टील मिनरल्स कनाडा, टेक महिंद्रा, विप्रो, इंफ़ोसिस टेक, जुबिलैंट लाइफ़ साइंसेज़, एबेलोन एनर्जी, इफ़को और गुजरात स्टेट फ़र्टिलाइज़र्स एंड केमिकल्स शामिल है.

एक लाख से ज़्यादा भारतीय छात्र कनाडा में पढ़ाई करते हैं और दोनों देशों के बीच शिक्षा एक अहम क्षेत्र है.

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