भारत, इस्राइल बने रणनीतिक साझेदार, आतंकवाद का मिलकर करेंगे मुकाबला

By Prabhat Khabar Digital Desk
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यरुशलम : बढ़ते कट्टरपंथ और आतंकवाद के खिलाफ मिलकर काम करने की शपथ लेने के साथ ही भारत और इस्राइल ने अपने संबंधों को विस्तार देते हुए उन्हें 'सामरिक साझेदारी' के स्तर पर ले आये हैं. उन्होंने आतंकी समूहों को पनाह और आर्थिक मदद देनेवालों के खिलाफ 'कड़े कदम' उठाने की भी वकालत की. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके इस्राइली समकक्ष बेंजामिन नेतन्याहू के बीच बुधवार को यहां हुई बातचीत में आतंकवाद और 'सामरिक खतरों' समेत कई अन्य मुद्दों पर भी चर्चा हुई जिनमें रक्षा सहयोग और सुरक्षा, जल, कृषि, अंतरिक्ष और पश्चिम एशिया अहम हैं. व्यापक बातचीत के बाद दोनों पक्षों ने नवोन्मेष, जल संरक्षण, कृषि और अंतरिक्ष जैसे मुद्दों से जुड़े सात अहम समझौतों पर चर्चा की.

अपनी तीन दिवसीय यात्रा के दौरान मोदी ने इस्राइली बच्चे मोशे होल्त्जबर्ग से भी मुलाकात की. मोशे 2008 में मुंबई में हुए आतंकवादी हमले में बाल-बाल बचा था. एक संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में नेतन्याहू ने मोदी की मौजूदगी में कहा, 'यह एक अच्छा दिन है. आप और मैं दुनिया बदल सकते हैं. हमारा रिश्ता जन्नत में बना है और हम इसे अमल में लाने का काम कर रहे हैं.' मोदी की तीन दिवसीय यात्रा के दौरान अपना पूरा वक्त भारतीय प्रधानमंत्री के साथ दे रहे नेतन्याहू ने कहा कि दोनों देश साथ मिलकर 'बड़ा अंतर पैदा कर सकते हैं.' इस्राइल में अपने अब तक के ठहराव को 'फायदेमंद' और 'यादगार' करार देते हुए मोदी ने कहा, 'हमारा लक्ष्य ऐसा रिश्ता बनाना है जो हमारी साझा प्राथमिकताओं को परिलक्षित करे और हमारे लोगों के बीच प्रगाढ़ रिश्ते बनाये.' मोदी ने कहा कि भारत और इस्राइल 'जटिल भौगोलिक' स्थिति में रहते हैं और क्षेत्रीय शांति और स्थायित्व के लिए 'सामरिक खतरों' से परिचित हैं.

उन्होंने कहा, 'भारत सीधे तौर पर हिंसा और आतंक द्वारा फैलायी गयी नफरत से पीड़ित है. इसी तरह इस्राइल भी है.' उन्होंने कहा कि दोनों नेता 'हमारे सामरिक हितों की सुरक्षा के लिए साथ मिलकर काम करने तथा साइबर स्पेस समेत बढ़ते कट्टरपंथ और आतंकवाद से लड़ने के लिए सहयोग पर सहमत हैं.' नेतन्याहू ने कहा कि दोनों देशों को आतंकवाद के खिलाफ सहयोग करने की भी जरूरत है. उन्होंने मुंबई में हुए हमले को 'भयावह आतंकवादी हमला' बताया. दोनों नेताओं के बीच हुई बातचीत के बाद मीडिया को इस पर जानकारी देते हुए विदेश सचिव एस जयशंकर ने कहा कि दोनों देशों ने अपने रिश्तों को सामरिक साझेदारी तक पहुंचाने का फैसला किया है जो इस संबंध को नया आयाम देगी.

बातचीत के बाद एक संयुक्त बयान में कहा गया, 'आतंकवादियों, आतंकी संगठनों, उनके नेटवर्कों और उन सभी के खिलाफ जो उन्हें बढ़ावा, समर्थन, आर्थिक मदद और पनाह देते हैं उन पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए.' हालांकि, इस संदर्भ में किसी का नाम नहीं लिया गया, लेकिन भारतीय पक्ष इसे पाकिस्तान के संदर्भ में देखता है. संयुक्त बयान के मुताबिक, दोनों नेताओं ने माना कि आतंकवाद वैश्विक शांति और स्थायित्व के लिए बड़ा खतरा है तथा उसके सभी रूपों और अभिव्यक्तियों से लड़ने के लिए अपनी मजबूत प्रतिबद्धता पर जोर दिया. इसमें कहा गया, 'उन्होंने जोर दिया कि किसी भी आधार पर आतंकी कृत्य को न्यायोचित नहीं ठहराया जा सकता.' जयशंकर ने बताया कि मोदी और नेतन्याहू ने इस बात पर जोर दिया कि बंटे हुए होने पर आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई सफल नहीं हो सकती. इसमें कहा गया कि दोनों नेताओं ने कंप्रेहेन्सिव कन्वेंशन ऑन इंटरनेशनल टेररिज्म (सीसीआइटी) को जल्द अपनाने के लिये सहयोग पर भी प्रतिबद्धता जतायी.

दोनों पक्षों ने अंतरिक्ष, कृषि और जल संरक्षण समेत सात समझौतों पर दस्तखत किये. भारत और इस्राइल ने औद्योगिक शोध और विकास तथा नवोन्मेष के लिए 4 करोड़ अमेरिकी डॉलर के कोष की स्थापना पर भी सहमति जतायी है. दोनों देश इसके लिए दो-दो करोड़ डॉलर देंगे. जयशंकर ने कहा कि मोदी और नेतन्याहू ने वीजा प्रक्रिया आसान बनाने पर भी चर्चा की. भारत ने वार्षिक प्रौद्योगिकी शिखर-सम्मेलन में साझेदार देश के तौर पर हिस्सा लेने के लिए इस्राइल को न्योता दिया. मोदी ने नेतन्याहू को सपरिवार भारत आने के लिए आमंत्रित किया.

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