क्या फिर लौट सकते हैं बाघ अपने पुराने ठिकानों पर? 15 देशों में 17 लाख वर्ग किमी नए आवास की उम्मीद

एशिया के बाघों के लिए एक नई उम्मीद जगी है. WWF की एक स्टडी के अनुसार, बाघों के लिए उनके पुराने इलाकों में 17 लाख वर्ग किलोमीटर अतिरिक्त आवास विकसित किया जा सकता है. यह अध्ययन बाघों के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश देता है.

कभी एशिया के बड़े हिस्से में बाघों की दहाड़ सुनाई देती थी. लेकिन जंगलों के कम होने, मानव बस्तियों के विस्तार, शिकार और अवैध वन्यजीव व्यापार के कारण बाघों का प्राकृतिक क्षेत्र लगातार सिमटता गया. अब संरक्षण से जुड़े एक अध्ययन में सामने आया है कि एशिया में बाघों के लिए उनके पुराने इलाकों को फिर से सुरक्षित बनाया जा सकता है.

WWF की एक स्टडी के मुताबिक, मौजूदा बाघों के आवास के अलावा करीब 17 लाख वर्ग किलोमीटर ऐसे क्षेत्र हैं, जहां भविष्य में बाघों की आबादी को बढ़ाया जा सकता है. यह क्षेत्र वर्तमान में बाघों के कब्जे वाले क्षेत्र से लगभग दोगुना है.

कभी एशिया के बड़े हिस्से में रहते थे बाघ

करीब दो सौ साल पहले बाघ एशिया के बड़े हिस्से में पाए जाते थे. उनका प्राकृतिक क्षेत्र पश्चिम में काला सागर के आसपास से लेकर पूर्व में कोरियाई प्रायद्वीप तक फैला हुआ था.

समय के साथ जंगलों की कटाई, खेती और मानव बस्तियों के विस्तार ने बाघों के प्राकृतिक आवास को कम कर दिया. इसके अलावा शिकार और अवैध वन्यजीव व्यापार ने भी उनकी संख्या पर गंभीर असर डाला.

आज बाघ दुनिया की सबसे ज्यादा खतरे में पड़ी बड़ी बिल्लियों में शामिल हैं और उनका प्राकृतिक क्षेत्र ऐतिहासिक क्षेत्र के पांच प्रतिशत से भी कम रह गया है.

15 देशों में मिल सकता है बाघों को नया आवास

WWF की Restoring Asia’s Roar: Opportunities for Tigers Recovery Across their Historic Range स्टडी में मानव बस्तियों और उनके प्रभाव को ध्यान में रखते हुए बाघों के लिए संभावित क्षेत्रों का अध्ययन किया गया.

स्टडी में करीब 17 लाख वर्ग किलोमीटर अतिरिक्त संभावित आवास की पहचान की गई. ये क्षेत्र 15 देशों में फैले हुए हैं. इनमें वे देश भी शामिल हैं जहां आज बाघ पाए जाते हैं और ऐसे क्षेत्र भी हैं जहां बाघ कई साल पहले खत्म हो चुके हैं.

अगर इन इलाकों में जंगल, घास के मैदान और दूसरे प्राकृतिक आवास सुरक्षित और जुड़े हुए रहते हैं, तो बाघों को नए क्षेत्रों में फैलने का अवसर मिल सकता है.

नेपाल में बाघों के लिए बड़ी संभावना

नेपाल में बाघों के लिए कई बड़े संभावित क्षेत्र मौजूद हैं. खास बात यह है कि इनमें से कई इलाके मौजूदा बाघ आबादी से करीब 100 किलोमीटर के दायरे में हैं.

इसका मतलब है कि अगर इन क्षेत्रों को सुरक्षित रखा जाए तो बाघ खुद भी नए इलाकों तक पहुंच सकते हैं. इसके लिए नए क्षेत्रों में जंगलों और प्राकृतिक गलियारों को सुरक्षित रखना जरूरी होगा.

नेपाल और भूटान के हिमालयी क्षेत्रों में बाघों की मौजूदगी से जुड़े कैमरा ट्रैप रिकॉर्ड भी सामने आए हैं. नेपाल में एक बाघ को करीब 3,165 मीटर की ऊंचाई पर कैमरे में रिकॉर्ड किया गया था. यह नेपाल में बाघ की मौजूदगी का सबसे ऊंचे स्थानों में से एक माना गया.

प्राकृतिक गलियारों से बढ़ी बाघों की संख्या

नेपाल का Terai Arc Landscape बाघ संरक्षण का एक अहम उदाहरण है. यह क्षेत्र नेपाल की दक्षिणी सीमा के साथ भारत से जुड़ा हुआ है और कई संरक्षित क्षेत्रों को प्राकृतिक गलियारों के जरिए जोड़ता है.

इन गलियारों की वजह से बाघों को अलग-अलग जंगलों के बीच सुरक्षित तरीके से आने-जाने में मदद मिलती है. WWF के अनुसार, नेपाल में बाघों की संख्या को दोगुना करने में ऐसे प्राकृतिक गलियारों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है.

बाघों का आवास बचाने से इंसानों को भी फायदा

बाघों के लिए जंगलों और प्राकृतिक क्षेत्रों को बचाने का फायदा केवल वन्यजीवों तक सीमित नहीं है. बाघों के कई महत्वपूर्ण आवास ऐसे क्षेत्रों में हैं जो इंसानों के लिए भी जल और पर्यावरण की दृष्टि से बेहद अहम हैं.

बाघों के आवास से जुड़े क्षेत्र दुनिया की कई महत्वपूर्ण नदी घाटियों और जलग्रहण क्षेत्रों को सहारा देते हैं. WWF के अनुसार, ऐसे जलग्रहण क्षेत्र करीब 83 करोड़ लोगों को पानी उपलब्ध कराने में भूमिका निभाते हैं.

इसके अलावा जंगल कार्बन को अवशोषित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. ऐसे में बाघों के आवास को बचाना जल सुरक्षा और जलवायु संरक्षण के लिए भी उपयोगी हो सकता है.

मानव-बाघ संघर्ष बनी बड़ी चुनौती

बाघों की संख्या बढ़ने के साथ एक दूसरी चुनौती भी सामने आती है. जब बाघ जंगलों से बाहर निकलकर इंसानी बस्तियों के करीब पहुंचते हैं तो मानव-बाघ संघर्ष का खतरा बढ़ जाता है.

इसलिए केवल बाघों को नए क्षेत्रों में पहुंचाना पर्याप्त नहीं होगा. स्थानीय लोगों को संरक्षण की प्रक्रिया में शामिल करना, प्राकृतिक गलियारों को सुरक्षित रखना और जंगलों को आपस में जोड़ना भी जरूरी है.

क्या पुराने इलाकों में फिर लौट सकते हैं बाघ?

WWF की स्टडी का संकेत है कि बाघों को उनके ऐतिहासिक क्षेत्रों के कुछ हिस्सों में वापस लाने की संभावना मौजूद है. इसके लिए मौजूदा बाघ अभयारण्यों की सुरक्षा के साथ-साथ नए संभावित आवासों को भी संरक्षित करना होगा.

अगर जंगलों को सुरक्षित किया जाए, प्राकृतिक गलियारों को मजबूत बनाया जाए और स्थानीय समुदायों के साथ मिलकर मानव-बाघ संघर्ष को कम किया जाए, तो एशिया में बाघों की सीमा फिर बढ़ सकती है.

बाघों की वापसी केवल एक प्रजाति के संरक्षण की कहानी नहीं होगी. इसके साथ जंगल, जल स्रोत और कई दूसरे वन्यजीवों के आवास भी सुरक्षित हो सकते हैं.

Highlights

  • WWF की स्टडी में 15 देशों में करीब 17 लाख वर्ग किलोमीटर संभावित बाघ आवास की पहचान की गई.
  • बाघों का ऐतिहासिक क्षेत्र आज काफी सिमट चुका है.
  • नेपाल में प्राकृतिक गलियारों ने बाघों की आवाजाही और संरक्षण में अहम भूमिका निभाई है.
  • बाघों के आवास बचाने से जल सुरक्षा और जंगलों के संरक्षण में भी मदद मिल सकती है.
  • मानव-बाघ संघर्ष को कम करना बाघों की भविष्य की वापसी के लिए जरूरी है.

FAQs

बाघों के लिए कितने नए संभावित आवास की पहचान हुई है?

WWF की स्टडी में करीब 17 लाख वर्ग किलोमीटर अतिरिक्त संभावित बाघ आवास की पहचान की गई है.

किन देशों में बाघों के आवास को बढ़ाने की संभावना है?

स्टडी में 15 देशों में संभावित आवास की पहचान की गई है. इनमें मौजूदा बाघ रेंज वाले देश और ऐसे क्षेत्र भी शामिल हैं जहां बाघ पहले पाए जाते थे.

बाघों की वापसी के लिए क्या जरूरी है?

प्राकृतिक आवासों की सुरक्षा, जंगलों को जोड़ने वाले गलियारों का संरक्षण, स्थानीय समुदायों की भागीदारी और मानव-बाघ संघर्ष को कम करना जरूरी है.

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लेखक के बारे में

By संतोष कुमार

संतोष कुमार एक स्वतंत्र साइबर सिक्योरिटी रिसर्चर हैं। उनकी रुचि के प्रमुख क्षेत्रों में साइबर सिक्योरिटी, IoT सिक्योरिटी, सैटेलाइट सिक्योरिटी, एथिकल हैकिंग, वल्नरेबिलिटी रिसर्च और डिजिटल फोरेंसिक शामिल हैं। वे टेक्नोलॉजी और साइबर सिक्योरिटी कम्युनिटी में सक्रिय रूप से जुड़े हुए हैं और सिक्योरिटी रिसर्च, वल्नरेबिलिटी एनालिसिस तथा उभरती हुई तकनीकों पर नियमित रूप से काम करते हैं।

उन्होंने IBM, Google, Microsoft और Apple जैसी प्रमुख टेक्नोलॉजी कंपनियों से जुड़े सिक्योरिटी रिसर्च और वल्नरेबिलिटी रिसर्च पर भी काम किया है। संतोष कुमार साइबर सिक्योरिटी, टेक्नोलॉजी और उभरते ट्रेंड्स से जुड़े विषयों पर भी लिखते हैं। उनके लेख जटिल तकनीकी विषयों को सरल और आसानी से समझ आने वाली भाषा में प्रस्तुत करने पर केंद्रित होते हैं।

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