भारत के जंगल में मिले 5 बेबी ऑरंगुटान, मचा हड़कंप; दक्षिण-पूर्व एशिया से तस्करी की जांच शुरू

भारत के एक जंगल में पांच बेबी ऑरंगुटान मिलने से हड़कंप मच गया है. ये दुर्लभ जीव दक्षिण-पूर्व एशिया के मूल निवासी हैं, जिन्हें अवैध रूप से भारत लाए जाने का संदेह है. वन्यजीव तस्करी के शक में जांच शुरू कर दी गई है.

भारत के एक जंगल में पांच बेबी ऑरंगुटान मिलने के बाद वन्यजीव तस्करी को लेकर जांच शुरू हो गई है. ऑरंगुटान भारत के मूल निवासी नहीं हैं. ये दुर्लभ वनमानुष मुख्य रूप से दक्षिण-पूर्व एशिया के बोर्नियो और सुमात्रा द्वीपों में पाए जाते हैं.

पांचों बेबी ऑरंगुटान ओडिशा के बालासोर जिले के जलेश्वर रेंज में वन विभाग की टीम को मिले. अधिकारियों को संदेह है कि इन्हें अवैध तरीके से भारत लाया गया हो सकता है.

जंगल में कैसे मिले पांच बेबी ऑरंगुटान?

रिपोर्ट के अनुसार, वन विभाग के अधिकारी बालासोर जिले के जलेश्वर इलाके में गश्त कर रहे थे. इसी दौरान उन्हें जंगल में पांच छोटे ऑरंगुटान मिले.

अधिकारियों का मानना है कि ये ऑरंगुटान इलाके में कुछ ही दिनों से मौजूद थे. इसके बाद सभी पांचों को सुरक्षा के लिए ओडिशा के एक चिड़ियाघर में क्वारंटीन किया गया है.

दक्षिण-पूर्व एशिया से तस्करी का शक

ओडिशा के पर्यावरण मंत्री राम सिंह खुंटिया ने कहा है कि वन्यजीव जांचकर्ता यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि ये दुर्लभ जानवर भारत तक कैसे पहुंचे.

उन्होंने अंतरराष्ट्रीय वन्यजीव तस्करी नेटवर्क की आशंका भी जताई है. अधिकारियों की जांच का मुख्य सवाल यही है कि बोर्नियो और सुमात्रा के मूल निवासी ये ऑरंगुटान हजारों किलोमीटर दूर भारत के जंगल तक कैसे पहुंचे.

अगर तस्करी की पुष्टि होती है तो यह अंतरराष्ट्रीय वन्यजीव तस्करी का गंभीर मामला हो सकता है.

भारत में ऑरंगुटान मिलना क्यों हैरान करने वाला है?

ऑरंगुटान भारत के प्राकृतिक वन्यजीव नहीं हैं. ये मुख्य रूप से इंडोनेशिया और मलेशिया के बोर्नियो तथा इंडोनेशिया के सुमात्रा द्वीपों में पाए जाते हैं.

इनकी पहचान इनके लंबे लाल-भूरे बाल और इंसानों जैसी कई शारीरिक विशेषताओं से होती है. जंगलों का खत्म होना, अवैध शिकार और वन्यजीव व्यापार इनके लिए बड़ी चुनौतियां हैं.

इसी वजह से भारत में इनका जंगल में मिलना वन्यजीव विशेषज्ञों के लिए भी गंभीर सवाल खड़े करता है.

दुनिया में कितने ऑरंगुटान बचे हैं?

WWF के अनुसार, बोर्नियो और सुमात्रा में करीब 1.04 लाख ऑरंगुटान बचे हैं. करीब एक सदी पहले इनकी संख्या दो लाख से ज्यादा बताई जाती थी.

ऑरंगुटान की आबादी में गिरावट के पीछे प्राकृतिक आवास का नुकसान एक बड़ी वजह है. जंगलों की कटाई और कृषि विस्तार ने इनके रहने वाले क्षेत्रों को लगातार प्रभावित किया है.

तीसरी प्रजाति Tapanuli Orangutan भी गंभीर खतरे में

ऑरंगुटान की एक तीसरी प्रजाति Tapanuli Orangutan है, जिसे गंभीर रूप से संकटग्रस्त यानी Critically Endangered माना जाता है.

वैज्ञानिकों के अनुमान के मुताबिक जंगल में इस प्रजाति के 800 से भी कम ऑरंगुटान बचे हैं. इनका पूरा प्राकृतिक आवास इंडोनेशिया के उत्तरी सुमात्रा स्थित Batang Toru क्षेत्र के एक हिस्से तक सीमित है.

खनन, पाम ऑयल के बागान और बड़ी जलविद्युत परियोजनाओं के कारण इस क्षेत्र पर लगातार दबाव बना हुआ है.

बाढ़ और भूस्खलन से भी प्रभावित हुई आबादी

Tapanuli Orangutan की छोटी आबादी प्राकृतिक आपदाओं से भी प्रभावित हुई है. संरक्षण से जुड़े आंकड़ों के अनुसार, उत्तरी सुमात्रा में आई भीषण बाढ़ और भूस्खलन के दौरान करीब 33 से 54 Tapanuli Orangutans के मारे जाने का अनुमान लगाया गया था.

विशेषज्ञों के अनुसार, इस प्रजाति की आबादी इतनी कम है कि हर साल करीब एक प्रतिशत की लगातार कमी भी लंबे समय में इसके विलुप्त होने का खतरा बढ़ा सकती है.

अब पांचों बेबी ऑरंगुटान की जांच क्यों जरूरी?

ओडिशा में मिले पांचों बेबी ऑरंगुटान को फिलहाल क्वारंटीन में रखा गया है. जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश करेंगी कि वे कहां से आए, उन्हें भारत तक कैसे पहुंचाया गया और क्या इसके पीछे कोई संगठित तस्करी नेटवर्क काम कर रहा है.

वन्यजीव विशेषज्ञों के लिए इन जानवरों की पहचान, स्वास्थ्य और उनके मूल स्थान का पता लगाना भी महत्वपूर्ण होगा.

Highlights

  • ओडिशा के बालासोर जिले में पांच बेबी ऑरंगुटान मिले.
  • ऑरंगुटान भारत के मूल निवासी नहीं हैं.
  • वन विभाग को दक्षिण-पूर्व एशिया से तस्करी का शक है.
  • पांचों ऑरंगुटान को फिलहाल क्वारंटीन में रखा गया है.
  • बोर्नियो और सुमात्रा में करीब 1.04 लाख ऑरंगुटान बचे हैं.
  • Tapanuli Orangutan की संख्या 800 से भी कम मानी जाती है.

भारत में पांच बेबी ऑरंगुटान कहां मिले हैं?

पांचों बेबी ऑरंगुटान ओडिशा के बालासोर जिले के जलेश्वर रेंज के जंगल में मिले हैं.

ऑरंगुटान भारत के मूल निवासी हैं क्या?

नहीं. ऑरंगुटान प्राकृतिक रूप से मुख्य रूप से बोर्नियो और सुमात्रा द्वीपों में पाए जाते हैं.

ओडिशा में मिले ऑरंगुटान को लेकर जांच क्यों हो रही है?

भारत में ऑरंगुटान का प्राकृतिक आवास नहीं है. इसलिए अधिकारियों को शक है कि इन्हें दक्षिण-पूर्व एशिया से अवैध तरीके से भारत लाया गया हो सकता है.

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By संतोष कुमार

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